सामान्य वर्ग (आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों) के लिए 10% रिजर्वेशन के बाद केंद्र सरकार अब इसे धरातल पर उतारने की तैयारी में। दो चरणों (2019-20 और 2020-21) में तीन लाख तक सीटें बढ़ाने का निर्णय।
गुजरात पहला ऐसा राज्य था, जहाँ इसे म़ँजूरी मिली थी। बिल लागू होने के बाद से अब सरकारी नौकरियों और शिक्षा के क्षेत्र में सामान्य वर्ग को 10% आरक्षण का लाभ मिल सकेगा
इसके आलावा मंत्री ने यह भी कहा कि वर्तमान कोटे में किसी तरह से छेड़छाड़ किए बिना 10% अतिरिक्त कोटा के ज़रिए इस कैटेगरी के छात्रों को आरक्षण का लाभ दिया जाएगा।
अगर जातिगत आरक्षण से आपको समस्या नहीं है, तो फिर आर्थिक आरक्षण से तो बिलकुल ही नहीं होनी चाहिए क्योंकि जातिगत आरक्षण की जड़ में यही अवधारणा है कि इन जातियों के लोग ग़रीब और वंचित हैं।