विषय: Science and Technology

सरस्वती नदी

वैज्ञानिकों ने सबूत के साथ साबित किया सरस्वती नदी का अस्तित्व: वैदिक ऋचाओं पर रिसर्च की मुहर

78,000 ईसापूर्व से लेकर 18,000 ईसापूर्व और 7000 ईसापूर्व से लेकर 2500 ईसापूर्व की समयावधि में सरस्वती नदी निरंतर बिना किसी रुकावट के बहा करती थी। इसके साथ ही ऋग्वेद की उन कई ऋचाओं पर भी मुहर लग गई है, जिनमें सरस्वती नदी का जिक्र है।
वशिष्ठ नारायण सिंह

जिन्होंने 40 साल पहले इलाज के लिए चंदा जुटाया, उनकी ही सरकार ने मरने के बाद सड़क पर छोड़ दिया

पटना यूनिवर्सिटी में उनके लिए वो पागलपन था कि छात्र उन्हें छूने के लिए मारामारी करते थे। अमेरिका ने उन्हें 'जीनियसों का जीनियस' कहा था। जिसके निधन के बाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने शोक जताया, उनका पार्थिव शरीर 2 घंटे सड़क पर धूल फाँकता रहा। वशिष्ठ बाबू, काश आप भारत लौटते ही नहीं!
चंद्रयान-2, इसरो

ISRO के चंद्रयान-2 ने भेजी क्रेटर (गड्ढे) की 3-D तस्वीरें, ‘अन्धविश्वासी’ बताने वालों के मुँह पर यह है एक तमाचा

चंद्रयान-2 मिशन की 98% सफलता और केवल विक्रम लैंडर की लैंडिंग के अंतिम चरण की नाकामी को लेकर देश के कुछ कथित अति-बुद्धिजीवियों ने ISRO का मज़ाक बनाया था। लॉन्च से पहले पूजा, कथित तौर पर ज्योतिषीय रूप से शुभ घड़ी में लॉन्च करना आदि को टारगेट कर...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फ़ाइल फोटो)

साइंस में Failure नहीं होते, सिर्फ Efforts, Experiments होते हैं और होती है Success: PM मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हमारा दायित्व है कि विद्यार्थियों की शक्ति को 21वीं सदी के साइंटिफिक एनवायरनमेंट में सही माहौल में लेकर जाएँ। विज्ञान में फेलियर कुछ नहीं होता, सब कुछ प्रयत्न या प्रयोग होते हैं और फिर कामयाबी होती है। इसीलिए लम्बे मुनाफे का सोचना चाहिए।"
इसरो, चंद्रयान-2

इसरो निश्चित रूप से चंद्रमा की सतह पर एक और लैंडिंग का प्रयास करेगा, योजना पर काम हो रहा है: के सिवान

इसरो प्रमुख ने कहा, "आप सभी लोग चंद्रयान-2 मिशन के बारे में जानते हैं। तकनीकी पक्ष की बात करें तो यह सच है कि हम विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग नहीं करा पाए, लेकिन पूरा सिस्टम चाँद की सतह से 300 मीटर दूर तक पूरी तरह काम कर रहा था।"
चंद्रयान 2

NASA ने जारी की 3 हाई रेजॉलूशन तस्वीरें, कहा- लैंडर विक्रम की हुई थी हार्ड लैंडिंग

"चंद्रमा की सतह पर विक्रम की हार्ड लैंडिंग हुई, यह स्पष्ट है। मगर लैंडर के बारे में अभी कुछ पता नहीं चल पाया है। तस्वीरें शाम के अंधेरे में ली गईं हैं। बाकी तस्वीरें अक्टूबर में बेहतर प्रकाश की स्थिति में ली जाएँगी।”
हज़्ज़ा अल मंसूरी, संयुक्त अरब अमीरात के पहले अंतरिक्ष यात्री ( News18 से साभार चित्र)

आसमान में मक्का के टाइमटेबल से पढ़ना नमाज: UAE के अंतरिक्षयात्री को मिलीं ‘इस्लामिक गाइडलाइन’

इस्लाम की प्रथाओं के अनुसार मुसलमानों को नमाज़ दिन के समय के हिसाब से पढ़नी होती है, जबकि अंतरिक्ष में हज़्ज़ा को 16-16 सूर्योदय और सूर्यास्त एक दिन में दिखने थे। ऐसे में प्राधिकरण ने हज़्ज़ा को मुसलमानों की पवित्रतम जगह मक्का के सूर्योदय-सूर्यास्त के समय नमाज़ पढ़ने की सलाह दी है।
पाकिस्तान

कबूतर से जहर खींचने वाला पाकिस्तान पानी से भी चला चुका है कार

परमाणु बम की तकनीक 'नकलचोरी' करने वाले कादिर खान को सर पर बिठाने वाले पाकिस्तान में असली वैज्ञानिकों की नाकद्री का अब्दुस सलाम से बड़ा उदाहरण नहीं हो सकता। लेकिन उन्हें कभी भाव नहीं दिया गया, क्योंकि वे अहमदी थे, जिन्हें कठमुल्ले 'सच्चा मुसलमान' नहीं मानते।
पाकिस्तान

पाकिस्तान के वो 6 आविष्कार, जिसने पूरी दुनिया में मचा दी सनसनी, विदेशी मीडिया में भी हुए चर्चे!

क्या आपको पता है कि दुनिया की सबसे बड़ी अंतरिक्ष दूरबीन को NASA ने नहीं, बल्कि पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी ने भेजा था। क्या आपको यह पता है कि पानी को हाइड्रोजन-ऑक्सीजन में तोड़ने से उत्पन्न उर्जा के माध्यम से चलने वाली कार का आविष्कर तक पाकिस्तान में हुआ है!
डॉ मोहम्मद नियाजी

पानी से बनाया पेट्रोल, किसी भी फल से बना डाला चीनी: पाकिस्तान का वैज्ञानिक चमत्कार

पाकिस्तान के नेता मुअज्जम नियाजी इतने काबिल और सफल ‘वैज्ञानिक’ हैं कि आप उन्हें कोई भी फल दे दो, वो उससे चीनी बना देंगे। इतना ही नहीं, उनका दावा है कि वो पानी और सौर ऊर्जा से पेट्रोल बनाने में सफल रहे हैं। अब जल्द ही वो लोगों को मुफ्त में पेट्रोल देंगे।
पाकिस्तान और विज्ञान

कबूतर का पिछवाड़ा खींच लेता है आपके नाभि से हेपेटायटिस का कीड़ा: पाकिस्तान का वैज्ञानिक चमत्कार

वीडियो में देखा जा सकता है कि पठानी कुर्ता-पजामा में एक व्यक्ति लेटा हुआ है और दूसरा व्यक्ति प्रैक्टिकल कर के बता रहा है कि कैसे कबूतर अपने गुदाद्वार का प्रयोग करते हुए उक्त व्यक्ति की नाभि से हेपेटायटिस के कीड़े को खींच लेता है।
के. सिवन

प्रधानमंत्री प्रेरणा के स्रोत, चंद्रयान-2 पर उम्मीदें अभी कायम: इसरो प्रमुख सिवन

सिवन ने बताया कि हालाँकि ऑर्बिटर में काफी अतिरिक्त ईंधन मौजूद है। ऑर्बिटर लगभग 7-7.5 साल तक चन्द्रमा की परिक्रमा कर सकता है। विक्रम लैंडर से फ़िलहाल सम्पर्क टूटा हुआ है। अगले 14 दिनों में सम्पर्क फिर से स्थापित करने के प्रयास किए जाएँगे।

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