Wednesday, June 12, 2024

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swami vivekananda

भगवा वस्त्र, भगवान भास्कर को अर्घ्य, ओंकार का नाद, हाथों में माला… जिस ‘विवेकानंद शिला स्मारक’ का कभी ईसाई नाविकों ने किया था बहिष्कार,...

जब वहाँ पहली बार नौका सेवा प्रारंभ की गई तो स्थानीय नाविकों ने इसका बहिष्कार कर दिया। फिर केरल से नाविकों को बुलाना पड़ा। ईसाइयों ने शिलालेख फेंक दिया था।

जहाँ माता कन्याकुमारी के ‘श्रीपाद’, 3 सागरों का होता है मिलन… वहाँ भारत माता के 2 ‘नरेंद्र’ का राष्ट्रीय चिंतन, विकसित भारत की हुंकार

स्वामी विवेकानंद का संन्यासी जीवन से पूर्व का नाम भी नरेंद्र था और भारत के प्रधानमंत्री भी नरेंद्र हैं। जगह भी वही है, शिला भी वही है और चिंतन का विषय भी।

‘जब तक एक भी हिन्दू व्यक्ति जीवित है… तब तक रहेगी माता सीता की कथा’ – क्यों स्वामी विवेकानंद बनना चाहते थे गिलहरी?

“अपने महिमावान अतीत को मत भूलो। स्मरण करो... हम कौन हैं? किन महान पूर्वजों का रक्त हमारी नसों में प्रवाहित हो रहा है?” - स्वामी विवेकानंद

गोरों ने जिसे समझा गुलाम, स्वामी विवेकानन्द ने उनसे हाथ मिला कर कहा था – ‘धन्यवाद भाई’

“ऐसे विद्वान राष्ट्र में मिशनरी भेजना मूर्खता। वहाँ से तो हमारे देश में धर्मप्रचारक भेजे जाने चाहिए।” - स्वामी विवेकानन्द पर एक टिप्पणी।

विवेकानन्द केंद्र की उपाध्यक्ष निवेदिता भिडे को झेलना पड़ा वामपंथियों और इस्लामवादियों के दुष्प्रचार का वार, विश्व धर्म संसद ने उनका भाषण रद्द किया

मिडिल ईस्ट आई ने इस्लामवादी प्रचारक आज़ाद एस्सा का 'कार्यकर्ताओं ने विश्व धर्म संसद में हिंदू राष्ट्रवादी मौजूदगी पर फिक्र जताई' लेख छापा था।

जिनसे मनोज मुंतशिर ने चुराया ‘आदिपुरुष’ का घी-बत्ती-तेल वाला डायलॉग, उन्हें इस्कॉन ने किया निलंबित: इंजीनियर और मैनेजर रह चुके हैं अमोघ लीला दास

कोलकता इस्कॉन के उपाध्यक्ष राधारमण दास द्वारा जारी एक पत्र में स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस को भारतीय इतिहास की महान विभूति बताया गया है।

G20 के 10 देशों में प्रवास, भारतीय संस्कृति-दर्शन से कराया परिचित: विदेश से आकर माँ भारती की सेवा में लगे स्वामी विवेकानंद के कई...

स्वामीजी के अनुयायी भारत में आकर भारतीय हो गए। न कोई सेवा के नाम पर धर्मांतरण का छलावा न कोई मान-सम्मान की चाहत। उन्होंने निस्वार्थ भाव से माँ भारती की सेवा की।

विश्व एक व्यायामशाला है, जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं: स्वामी विवेकानंद

जिस राष्ट्र ने अतीत में हमारे लिए इतने बड़े-बड़े काम किए हैं, उसे प्राणों से भी प्यारा समझो - स्वामी विवेकानंद की यही थी अपील।

जातिगत भेदभाव हमारी सबसे बड़ी दुर्बलता, संगठित होना इस काल की आवश्यकता: स्वामी विवेकानंद

पश्चिम का अन्धानुकरण भारत के लिए भयंकर खतरा... जातिगत भेदभाव हमारी सबसे बड़ी दुर्बलता - इन विचारों के साथ भारत का चिंतन करते थे विवेकानंद।

6 साल की उम्र में स्वामी विवेकानंद ने नहीं दी थी जमशेदजी टाटा को सलाह: PM मोदी के दावे का जानें पूरा सच, Video...

जमशेदजी टाटा ने स्वामी विवेकानंद को पत्र लिखा था, जिसे टाटा स्टील ने सार्वजनिक किया है। पीएम मोदी को सोशल मीडिया पर बनाया जा रहा निशाना।

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