इस दौर में हमें मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक रूप से मजबूत करने के लिए कुछ ऐसा चाहिए जिसे हम इन परिस्थितयों से जोड़ कर भी देख सके और वह हमें हर रूप से मजबूत भी करे।
लादेन को एक 'पिता-पति' बताने वाले 'दी क्विंट' को स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन पर यह बताने की सबसे ज्यादा जरूरत महसूस हुई कि वह एक ‘सिगार पीने वाले सन्यासी’ थे।