Thursday, July 29, 2021

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PM मोदी से The Hindu की चेयरपर्सन मालिनी पार्थसारथी की मुलाकात पर ‘खिसियाए’ पूर्व एडिटर-इन-चीफ एन राम

पार्थसारथी की पीएम मोदी से मुलाकात के संबंध में एन राम ने कहा कि इससे उनका कोई लेना-देना नहीं है और वह द हिन्दू की मेहनत से कमाई गई प्रतिष्ठा और गँवाई जा रही 142 से अधिक सालों की लीगेसी को बचाने का लगातार प्रयास कर रहे हैं।

चायनीज प्रोपेगेंडा के लिए The Hindu के खिलाफ आयकर जाँच शुरू, HT पर भी शिकायत दर्ज: रिपोर्ट

"यह सप्लीमेंट पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चीन के चाइना डेली द्वारा तैयार किया गया। इसमें हिंदुस्तान टाइम्स की न्यूज व संपादकीय नहीं शामिल किए गए हैं।"

‘द वायर’ और ‘द हिन्दू’ के पत्रकार ने किया भगवान हनुमान का अपमान, कहा- ‘हनुमान का राम पर समलैंगिक क्रश था’

‘द वायर’ और ‘द हिंदू’ जैसी कुख्यात वामपंथी वेबसाइटों में रोजगार प्राप्त करने की एकमात्र शर्त हिंदूफोबिक विचारों को पोषित और प्रकट करना है। ऐसा इसलिए, क्योंकि हिंदू-विरोधी प्रवृत्ति लंबे समय से इन वेबसाइटों से जुड़े पत्रकारों और लेखकों की पहचान रही है।

बंद होने के कगार पर ‘द हिन्दू’ मुंबई संस्करण, 3 माह की सैलेरी देकर पत्रकारों से माँगा इस्तीफ़ा

'द हिन्दू' के मुंबई संस्करण के 20 से अधिक पत्रकारों को संस्थान द्वारा 25 जून से 30 जून तक इस्तीफा देने को कहा गया है।

भारतीय मीडिया में विदेशी संपादक… देश-विरोधी बातें छापना और प्रोपेगेंडा फैलाना है जिसका एकमात्र काम

सही मायने में भारत को अगर किसी से खतरा है तो वो यही फेक न्यूज और प्रोपेगेंडा चलाने वालों तथा देश का अपमान करने वाले सम्पादकों से है जो...

भारतीय सेना ने J&K में जला डाले 400 स्कूल? THE HINDU की संपादकीय (घटिया व धूर्त) तो यही कहती है

The Hindu ने भारतीय सेना के बारे में बड़े ही स्पष्ट और सीधे शब्दों में लिखा है, मगर प्रदर्शनकारियों के बारे में लिखते हुए इसी अखबार के शब्द खत्म हो गए! या फिर यूँ कहें कि ये भी प्रोपेगेंडा फैलाने वाले गिरोह का हिस्सा बनकर अराजत तत्वों का तुष्टिकरण करना चाहते हैं।

लेफ़्ट-लिबरल इकोसिस्टम की नई चाल को काटने के लिए कितने तैयार हैं आप?

लेफ़्ट-लिबरलों का एक नया खेल शुरू हो गया है। "फेक न्यूज़" चिल्लाने से काम बनता नहीं देख उन्होंने उसी शराब को नई बोतल में डालकर "मिसइंफॉर्मेशन" का लेबल लगा दिया है। अब 'स्थानीय' गिरोह को वैश्विक लेफ़्ट-लिबरलों के नेटवर्क के सरगनाओं का साथ मिल रहा है।

The Hindu वालो, ज़हरीला मर्द होना नहीं, तुम्हारे जैसा विक्षिप्त-लिबरपंथी होना है

इसमें कोई शक नहीं कि पुरुष महिलाओं से सामान्यतः थोड़े अधिक आक्रामक होते हैं, लेकिन यह किसी सांस्कृतिक ज़बरदस्ती या 'toxic masculinity' के चलते नहीं, बायोलॉजिकल कारणों से होता है। इसलिए जहर फैलाने के लिए कुछ भी लिखने से पहले...

विवेकानंद का ‘सर्व-धर्म-समभाव’ इस्लाम के लिए एक मौका था, कट्टरपंथियों को सोचना होगा क्यों गँवा दिया

समुदाय विशेष को यह सोचने की ज़रूरत है कि विवेकानंद के 'सर्व-धर्म-समभाव' वाले पन्ने पर क्यों विभाजन की खूनी दास्ताँ लिखी, क्यों मुस्लिम-बहुल कश्मीर को हिन्दू-बहुल भारत का साथ मंज़ूर नहीं और क्यों कश्मीरी पंडितों के साथ वो किया, जो उन्हें नहीं करना चाहिए था।

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