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‘The Hindu’ के चेन्नई हेडक्वार्टर में चीन का राजदूत, जानिए कैसे बीजिंग के प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाता है वामपंथी मीडिया संस्थान

चीन के राजदूत सन वेइदॉन्ग भारत की दो दिवसीय यात्रा पर तमिलनाडु आए हुए हैं। यहाँ उन्होंने वामपंथी आउटलेट द हिंदू के मुख्यालय का दौरा किया।

‘धर्म में मेरा भरोसा, कर्म के अनुसार चाहता हूँ परिणाम’: कोरोना से लेकर जनसंख्या नियंत्रण तक, सब पर बोले CM योगी

सपा-बसपा को समाजिक सौहार्द्र के बारे में बात करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि उनका इतिहास ही सामाजिक द्वेष फैलाने का रहा है।

PM मोदी से The Hindu की चेयरपर्सन मालिनी पार्थसारथी की मुलाकात पर ‘खिसियाए’ पूर्व एडिटर-इन-चीफ एन राम

पार्थसारथी की पीएम मोदी से मुलाकात के संबंध में एन राम ने कहा कि इससे उनका कोई लेना-देना नहीं है और वह द हिन्दू की मेहनत से कमाई गई प्रतिष्ठा और गँवाई जा रही 142 से अधिक सालों की लीगेसी को बचाने का लगातार प्रयास कर रहे हैं।

चायनीज प्रोपेगेंडा के लिए The Hindu के खिलाफ आयकर जाँच शुरू, HT पर भी शिकायत दर्ज: रिपोर्ट

"यह सप्लीमेंट पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चीन के चाइना डेली द्वारा तैयार किया गया। इसमें हिंदुस्तान टाइम्स की न्यूज व संपादकीय नहीं शामिल किए गए हैं।"

‘द वायर’ और ‘द हिन्दू’ के पत्रकार ने किया भगवान हनुमान का अपमान, कहा- ‘हनुमान का राम पर समलैंगिक क्रश था’

‘द वायर’ और ‘द हिंदू’ जैसी कुख्यात वामपंथी वेबसाइटों में रोजगार प्राप्त करने की एकमात्र शर्त हिंदूफोबिक विचारों को पोषित और प्रकट करना है। ऐसा इसलिए, क्योंकि हिंदू-विरोधी प्रवृत्ति लंबे समय से इन वेबसाइटों से जुड़े पत्रकारों और लेखकों की पहचान रही है।

बंद होने के कगार पर ‘द हिन्दू’ मुंबई संस्करण, 3 माह की सैलेरी देकर पत्रकारों से माँगा इस्तीफ़ा

'द हिन्दू' के मुंबई संस्करण के 20 से अधिक पत्रकारों को संस्थान द्वारा 25 जून से 30 जून तक इस्तीफा देने को कहा गया है।

भारतीय मीडिया में विदेशी संपादक… देश-विरोधी बातें छापना और प्रोपेगेंडा फैलाना है जिसका एकमात्र काम

सही मायने में भारत को अगर किसी से खतरा है तो वो यही फेक न्यूज और प्रोपेगेंडा चलाने वालों तथा देश का अपमान करने वाले सम्पादकों से है जो...

भारतीय सेना ने J&K में जला डाले 400 स्कूल? THE HINDU की संपादकीय (घटिया व धूर्त) तो यही कहती है

The Hindu ने भारतीय सेना के बारे में बड़े ही स्पष्ट और सीधे शब्दों में लिखा है, मगर प्रदर्शनकारियों के बारे में लिखते हुए इसी अखबार के शब्द खत्म हो गए! या फिर यूँ कहें कि ये भी प्रोपेगेंडा फैलाने वाले गिरोह का हिस्सा बनकर अराजत तत्वों का तुष्टिकरण करना चाहते हैं।

लेफ़्ट-लिबरल इकोसिस्टम की नई चाल को काटने के लिए कितने तैयार हैं आप?

लेफ़्ट-लिबरलों का एक नया खेल शुरू हो गया है। "फेक न्यूज़" चिल्लाने से काम बनता नहीं देख उन्होंने उसी शराब को नई बोतल में डालकर "मिसइंफॉर्मेशन" का लेबल लगा दिया है। अब 'स्थानीय' गिरोह को वैश्विक लेफ़्ट-लिबरलों के नेटवर्क के सरगनाओं का साथ मिल रहा है।

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