Saturday, October 23, 2021
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भारतीय मीडिया में विदेशी संपादक… देश-विरोधी बातें छापना और प्रोपेगेंडा फैलाना है जिसका एकमात्र काम

1. आतंकवादियों को तथाकथित आतंकी कहना। 2. कश्मीर को विवादित कश्मीर कहना। 3. भारतीय कश्मीर को भारतीय अधिकृत कश्मीर 4. पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को आजाद कश्मीर... ये बस कुछ उदाहरण हैं। ये तो यह भी मानते हैं कि साबरमती एक्सप्रेस की S-6 बोगी को कट्टरपंथियों की भीड़ ने जलाया ही नहीं था और गोधरा कांड इसलिए हुआ क्योंकि...

किसी भी मीडिया ग्रुप में संपादक ही यह तय करता है कि कौन सी खबर कैसे प्रस्तुत की जाए या उन्हें प्रस्तुत किया भी जाए या नहीं। और ये खबर न सिर्फ अपने देश के नागरिकों की मानसिकता को प्रभावित करती है, बल्कि पूरे विश्व के सामने उस देश की छवि को भी प्रभावित करती है, जहाँ की ये मीडिया है। अब आप सोचिए, अगर किसी मीडिया ग्रुप का संपादक ही विदेशी हो तो वो किस तरह से उस देश को प्रभावित करता होगा क्योंकि उसकी देशभक्ति तो अपने देश के लिए होगी न कि उस देश के लिए, जहाँ की मीडिया में वह संपादक है।

आप सोच रहे होंगे मैं आज ये सब क्यों बता रहा हूँ। वो इसलिए कि भारत में भी विदेशी संपादक मौजूद हैं। जिनमें से एक ‘द हिन्दू’ के पूर्व संपादक और ‘द वायर’ के सह-संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन हैं, जो कि अमेरिका के नागरिक हैं और उन्होंने किस तरह से हमारी मानसिकता पर चोट पहुँचाने की कोशिश की, वो हमें उनकी रिपोर्टिंग से पता चल ही जाता है।

इसी सिद्धार्थ वरदराजन ने गुजरात दंगों पर आधारित एक रिपोर्ट गोधरा आउटलुक बनाया था। जिसमें उन्होंने बिना सबूत के बहुत ही मनगढ़ंत बातें कही थीं। जैसे कि अगर गोधरा कांड नहीं भी होता तो भी गुजरात दंगा होता। उन्होंने तो ये भी मानने से इनकार कर दिया कि साबरमती एक्सप्रेस की S-6 बोगी को कट्टरपंथियों के भीड़ ने जलाया था।

उनका मानना था कि पीएम नरेंद्र मोदी (तब गुजरात के सीएम मोदी) ने गोधरा कांड और उसके बाद हुए दंगे किसी साजिश के तहत किया था, जिससे उसका फायदा वह चुनाव में ले सकें। सिद्धार्थ के बिना सिर-पैर की बात ने सभी को गुमराह करने की कोशिश की।

लेकिन उन्हें ये समझना चाहिए कि पीएम मोदी 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री और उसके बाद 2014 से वर्तमान समय तक भारत के प्रधानमंत्री हैं, इस बीच कोई गुजरात जैसा दंगा क्यों नहीं हुआ? अब तो कोर्ट ने भी पीएम मोदी को निर्दोष मान लिया है और गोधरा कांड के मुख्य आरोपित सहित 31 कट्टरपंथियों को दोषी। तो अब उनका रिपोर्ट झूठा सिद्ध हो ही चुका है।

बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सिद्धार्थ वरदराजन के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में केस भी किया था कि कोई विदेशी नागरिक कैसे भारतीय मीडिया का संपादक हो सकता है और उनके देश विरोधी रिपोर्टों को भी दिखाया था। बाद में दबाव में बीच केस में सिद्धार्थ को ‘द हिन्दू’ से इस्तीफा भी देना पड़ा। अब आप सोच सकते हैं कि इतने सालों तक देश के दूसरे सबसे बड़े अंग्रेजी समाचार पत्र का संपादक होकर पूरे विश्व के सामने भारत की कैसी इमेज बनाई होगी और किस हद तक लोगों की मानसिकता को आघात पहुँचाया होगा।

‘द हिन्दू’ से इस्तीफा देने के बाद सिद्धार्थ ने अपने अन्य दो साथियों के साथ ‘द वायर’ नामक ऑनलाइन न्यूज वेब पोर्टल बनाई, जिसमें भी वो देश विरोधी प्रोपेगेंडा चला रहे हैं। उन्होंने अपनी एक रिपोर्ट में कश्मीर को विवादित कश्मीर कहा। यही नहीं, वो लगातार भारतीय कश्मीर को भारतीय अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, जिसको उन्होंने अवैध रूप से कब्जाया है, को आजाद कश्मीर कहते रहते हैं। दूसरे शब्दो में कहूँ तो वो पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं।

वैसे तो उनके सभी आर्टिकल्स में देश विरोधी बात मिल ही जाएगी लेकिन मैं अभी हंदवाड़ा में हुए एनकाउंटर पर उनकी रिपोर्ट की बात करूँगा। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में आतंकवादियों को तथाकथित आतंकी कहा। जी हाँ, आपने सही सुना… तथाकथित आतंकी। और तो और, उन्होंने हमारे वीरगति को प्राप्त जवानों का भी अपमान किया। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में वीरगति को प्राप्त जवानों को ऐसे बताया जैसे कि कोई आम आदमी मरा हो। हमारे वीरों का इससे ज्यादा और अपमान तो हो ही नहीं सकता।

इंडियन एक्सप्रेस में पाकिस्तानी अखबार ‘न्यूज वीक पाकिस्तान’ के एक परामर्श संपादक खालिद अहमद का एक आर्टिकल छपा था। आप सोच सकते हैं कि किस प्रकार उसमें पाकिस्तानी एजेंडा भरा हुआ होगा। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है, “भारत में मुस्लिमों को समान नागरिक नहीं माना जाता क्योकि मुस्लिम पूरे विश्व के लिए एक खतरा हैं और जहाँ वो अधिक होता है, वहाँ समस्याएँ अधिक होती हैं। और इस समस्या के हल के लिए पूरा देश हमारे साथ है।” और यह सब खालिद ने सुब्रमण्यम स्वामी के कनाडा की एक मीडिया को दी गई साक्षात्कार को तोड़-मोड़कर पेश किया था।

उनकी इसी रिपोर्ट के आधार पर संयुक्त राष्ट्र के ऐडम डियांग ने सुब्रमण्यम स्वामी पर आरोप लगाया था। इसके लिए स्वामी ने इंडियन एक्सप्रेस और ऐडम डियांग दोनों को लीगल नोटिस भी भेजा कि किस आधार पर उन्होंने उनको ऐसा बोला।

अब सोचिए एक पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा वाला आर्टिकल संयुक्त राष्ट्र तक को प्रभावित करती है। भारत में ऐसे हजार आर्टिकल हर महीने छपते हैं, तो उससे पूरे विश्व के सामने भारत की कैसी छवि बनती होगी? और यही आर्टिकल भारतीयों के मानसिकता पर कैसा असर छोड़ता होगा। इनकी आर्टिकल अधिकतर अंग्रेजी में ही होती है, जिससे कि वो पूरे विश्व तक अपनी बात को पहुँचा सकें।

भारत में जो अभी प्रेस एक्ट चल रहा है, वो अंग्रेजों के ज़माने का है, जिसको संसोधित करने की बहुत जरूरत है। ऐसे प्रोपेगेंडा को रोकने के लिए और आपकी जानकारी के लिए मैं बता दूँ कि सुब्रमण्यम स्वामी के केस से प्रेरित होकर भारत सरकार ने एक नया प्रेस एक्ट लाने की कोशिश की थी लेकिन अभी भी लटका हुआ है। ऐसे देश-विरोधी लेखों और समाचारों को रोकने के लिए इसे पास करवाना बहुत जरूरी है। सही मायने में भारत को अगर किसी से खतरा है तो वो यही फेक न्यूज और प्रोपेगेंडा चलाने वालों और देश का अपमान करने वाले भारत में रहने वाले सम्पादकों से ही है।

 

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