Tuesday, May 18, 2021

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Varanasi

काशी की 400 साल पुरानी परंपरा: बाबा मसाननाथ मंदिर में मोक्ष की आकांक्षा में धधकती चिताओं के बीच नृत्य करती हैं नगरवधुएँ

काशी की महाशिवरात्रि, रंगभरी एकादशी, चिता भस्म की होली के बाद एक और ऐसी प्राचीन परंपरा जो अपने आप में अनूठी है वह है मणिकर्णिका घाट महाश्मशान में बाबा मसाननाथ के दर पर नगरवधुओं का नृत्य।

ज्ञानवापी मस्जिद में ASI सर्वे को रोकने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुँचे अंजुमन इंतेजामिया, सुन्नी बोर्ड: याचिका दायर

ज्ञानवापी मस्जिद की प्रबंधन समिति अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद समिति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष एक तत्काल याचिका दायर कर वाराणसी की एक स्थानीय अदालत द्वारा 8 अप्रैल को सुनाए गए सर्वे वाले फैसले पर रोक लगाने की माँग की है।

महादेव की नगरी काशी बनेगी विश्‍व की सबसे बड़ी संस्‍कृत नगरी: CM योगी की बड़ी पहल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल के बाद देवलोक व महादेव की धर्मनगरी कही जाने वाली काशी अब विश्व में संस्कृत नगरी के रूप में जानी जाएगी।

‘ASI वाले ज्ञानवापी में घुस नहीं पाएँगे, आप मारे जाओगे’: काशी विश्वनाथ के पक्षकार हरिहर पांडेय को धमकी

ज्ञानवापी केस में काशी विश्वनाथ के पक्षकार हरिहर पांडेय को जान से मारने की धमकी मिली है। धमकी देने वाले का नाम यासीन बताया जा रहा।

बनारस के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का होगा पुरातात्विक सर्वेक्षण, खुदाई कराएगा ASI: फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दी मंजूरी

फैसला सुनने के बाद इंतेजामिया कमेटी के सैयद यासीन ने बताया कि वह कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे। साथ ही समिति, ऐसा सर्वे करने के लिए किसी को मस्जिद में दाखिल नहीं होने देगी।

वाराणसी के सरैया में होली के दिन हिंदुओं पर पत्थरबाजी, कई घायल: रंग पड़ने का मामला – अजीम, आसिम गिरफ्तार

"होली खेलने के बाद हिन्दू बच्चे सबमर्सिबल पर नहा रहे थे, इसी दौरान एक मोहम्मडन पर छींटा पड़ गया। जिसके बाद मुस्लिमों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी।"

भारत की विविधता, संस्कृति, लोक कला, साहित्य को समेटती होली: हर राज्य में उल्लास का अलग है रंग

जहाँ ब्रजधाम में राधा और कृष्ण के होली खेलने के वर्णन मिलते हैं वहीं अवध में राम और सीता के जैसे होली खेलें रघुवीरा अवध में। राजस्थान के अजमेर शहर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर गाई जाने वाली होली का विशेष रंग है।

होली के रंग में जीवन का उल्लास: होलिका, होलाका, धुलेंडी, धुरड्डी, धुरखेल, धूलिवंदन… हर नाम में छिपा है कुछ बहुत खास

आध्यात्मिक रूप से होलिका दहन का मकसद पुराने कपड़ों या वस्तुओं को जलाना ही नहीं है, बल्कि पिछले एक साल की यादों को जलाना है ताकि...

बनारस की अड़भंगी चिता-भस्म होली: 11 तस्वीरों और 5 वीडियो से समझिए काशी की परंपरा, जहाँ मृत्यु भी है उत्सव

बनारस की होली भी बनारस के मिजाज के अनुसार ही अड़भंगी और निराली है। यह दुनिया का इकलौता शहर जहाँ अबीर, गुलाल के अलावा धधकती चिताओं के बीच चिता-भस्म से होली खेली जाती है।

काशी में क्यों खेली जाती है चिता-भस्म की होली, भूतभावन महादेव अब भी आते हैं महाश्मशान मणिकर्णिका?

बनारस की होली भी बनारस के मिजाज के अनुसार ही अड़भंगी है। दुनिया का इकलौता शहर जहाँ अबीर, गुलाल के अलावा धधकती चिताओं के बीच चिता भस्म की होली होती है।

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