Sunday, July 14, 2024
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नहीं रहे रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा कराने वाले पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित: सांगवेद महाविद्यालय में थे वरिष्ठ आचार्य, कई रियासतों का करा चुके थे राज्याभिषेक

लोकसभा चुनाव 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक और राम मंदिर उद्घाटन का समय तय करने वाले गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने इसे सनातन के लिए अपूरणीय क्षति करार दिया है।

अयोध्या स्थित राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा कराने वाले वाराणसी के पुजारी लक्ष्मीकांत दीक्षित का निधन हो गया है। वो राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के मुख्य पुजारी थे और उन्होंने 121 वैदिक ब्राह्मणों का नेतृत्व किया था। उनके बेटे और परिवार के अन्य सदस्य भी इस पूजन का हिस्सा थे। दिसंबर 2021 में जब काशी में बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ, उसमें भी वो शामिल हुए थे। शनिवार (22 जून, 2024) की सुबह उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और उनका निधन हो गया।

भारतीय सनातन परंपरा के प्रचार-प्रसार में ही वो आजीवन लगे रहे। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ग्वालियर और राजस्थान समेत कई राजघरानों में राज्याभिषेक की प्रक्रिया को उनके द्वारा पूरा कराया जा चुका है। छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक में उनके पूर्वजों का योगदान था। उन्होंने अयोध्या प्राण प्रतिष्ठा के दौरान ये कामना की थी कि राष्ट्र हमेशा उन्नति करता रहे, उस पर प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद बना रहे। लोकसभा चुनाव 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक और राम मंदिर उद्घाटन का समय तय करने वाले गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने इसे सनातन के लिए अपूरणीय क्षति करार दिया है।

लक्ष्मीकांत दीक्षित ने मंगलागौरी स्थित अपने आवास पर सुबह के 7 बजे अंतिम साँस ली। बीते कुछ दिनों से वो अस्वस्थ चल रहे थे। 1942 में मुरादाबाद में जन्मे पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित बाल्यावस्था में ही शुक्लयजुर्वेद शाखा और घनान्त अध्ययन के लिए काशी आए थे। 82 वर्ष की उम्र में उनके निधन के बाद मणिकर्णिका घाट पर उनके पुत्र जयराम दीक्षित ने उन्हें मुखाग्नि दी। उन्होंने बाल्यकाल में ही आजीवन काशी में रहने का निश्चय ले लिया था।

लक्ष्मीकांत दीक्षित का परिवार मूल रूप से महाराष्ट्र के शोलापुर के जेऊर का है। वो वाराणसी के मीरघाट स्थित सांगवेद महाविद्यालय के वरिष्ठ आचार्य भी थे। काशी नरेश के सहयोग से इसकी स्थापना हुई थी। उनके पूर्वज गागा भट्ट ने छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक कराया था। चाचा गणेश दीक्षित ने उन्होंने पूजा पद्धति की शिक्षा ली थी। वो यजुर्वेद के बड़े विद्वान थे। नागपुर सहित कई रियासतों में भी उनके पूर्वजों ने कई अनुष्ठान संपन्न कराए थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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