उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विवादित बयान देते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ‘लतखोर' और 'धरनामंत्री’ कह डाला। उन्होंने केजरीवाल से सवाल करते हुए कहा कि AAP प्रमुख शहर की सरकार के मुखिया हैं अथवा धरना और प्रदर्शन के नेता हैं?
CM योगी द्वारा बाटला आतंकियों से सम्बन्ध पर उठाए सवाल से बौखलाए सलमान खुर्शीद ने कहा, "मुझे खुशी है योगी मुझसे लड़ाई मानते हैं, अगर उन्होंने मेरे बारे में कुछ कहा है तो जब चाहे जहाँ चाहे मुझसे बहस कर लें।"
योगी आदित्यनाथ सरकार की माफिया और आपराधिक नेटवर्क को ध्वस्त करने के कारण, कई दशकों में पहली बार, कई कुख्यात गैंगस्टर उत्तर प्रदेश में चल रहे लोकसभा चुनाव में भाग लेने से कतरा रहे हैं।
योगी ने अयोध्या और वाराणसी में मंदिरों के दर्शन को लेकर अपने ट्वीट में कहा, "मेरे आराध्य रामलला, बजरंग बली और महादेवजी के दर्शन को किसी भी प्रकार की राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि आस्था का अधिकार संविधान प्रदत्त है और मुझे इस अधिकार का प्रयोग करने से कोई रोक नहीं सकता।"
CM योगी ने अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि उन्होंने अपने भाषण (जिसके कारण उन पर साम्प्रदायिक होने का आरोप लगा) में केवल छद्म धर्मनिरपेक्षता को उजागर किया था, धर्म के नाम पर वोट नहीं माँगा था। अपने जवाब में उन्होंने यह भी लिखा कि हर नागरिक को अपने धर्म व आस्था की स्वतंत्रता है।
योगी ने कहा था, "जब गठबंधन के नेताओं को अली पर विश्वास है और वह अली-अली कर रहे हैं, तो हम भी बजरंगबली के अनुयायी हैं और हमें बजरंगबली पर विश्वास है।" साथ ही उन्होंने वेस्ट यूपी से हरा रंग साफ़ करने की अपील की थी। आयोग ने दोनों ही बयानों पर आपत्ति जताई है।
“बापू ने 1947 में कहा था, कॉन्ग्रेस का काम समाप्त, अब कॉन्ग्रेस का विसर्जन कर दो। वो जानते थे कि कॉन्ग्रेस का मतलब अब एक परिवार होने जा रहा है। बापू के सपने को साकार करने के लिए भाई-बहन आ चुके हैं।”
"देवी सीता यहीं ठहरी थीं। उनकी याद में आज भी सीताकुंड घाट है। सुल्तानपुर के गजेटियर में भी इस बात का उल्लेख है कि इसका नाम कुशभवनपुर ही था। बाद में मुगल शासकों ने इसका नाम बदल दिया था।"
सीएम योगी ने लिखा, “हमारी सरकार जब से सत्ता में आई है हमने लंबित 57,800 करोड़ रुपए का गन्ना बकाया भुगतान किया है। ये रकम कई राज्यों के बजट से भी ज्यादा है। पिछली सपा-बसपा सरकारों ने गन्ना किसानों के लिए कुछ नहीं किया जिससे किसान भुखमरी का शिकार हो रहा था।”