Homeवीडियोकिसान आंदोलन या दूसरा शाहीन बाग? अजीत भारती का विश्लेषण | Ajeet Bharti Analysing...

किसान आंदोलन या दूसरा शाहीन बाग? अजीत भारती का विश्लेषण | Ajeet Bharti Analysing Farmer Protests

जैसे सीएए में लोगों से कहा गया कि इसमें उनकी नागरिकता छीन ली जाएगी। वैसे ही कृषि बिल को लेकर कहा जा रहा है कि इसके जरिए किसानों से उनकी जमीन सरकार छीन लेगी। सीएए से भी भारतीय मुस्लिमों का कोई लेना-देना नहीं था और कृषि बिल में भी किसानों की जमीन छीने जाने का कोई जिक्र नहीं है।

दिल्ली में चल रहे कृषि आंदोलन में बीते दिनों शाहीन बाग एंगल निकलने के बाद इस मसले पर चर्चा करना अति आवश्यक हो गया है। इस आंदोलन में एक ऐसा समूह है जो हर किसी को बरगलाना चाहता है। सीएए के दौरान ऐसा ही शाहीन बाग में देखने को मिला था। उस समय समुदाय विशेष को भ्रमित करने का कार्य हुआ था या ये कहें कि कुछ लोग भ्रमित होने के लिए बैठे ही थे।

अब वही काम कृषि बिल के नाम पर हो रहा है। जैसे सीएए में लोगों से कहा गया कि इसमें उनकी नागरिकता छीन ली जाएगी। वैसे ही कृषि बिल को लेकर कहा जा रहा है कि इसके जरिए किसानों से उनकी जमीन सरकार छीन लेगी। सीएए से भी भारतीय मुस्लिम समुदाय का कोई लेना-देना नहीं था और कृषि बिल में भी किसानों की जमीन छीने जाने का कोई जिक्र नहीं है।

आज इन किसान आंदोलनों के लिए जिन्हें बुलाया गया है वह खालिस्तानी समर्थक हैं। उधम सिंह से अपनी तुलना करके ऐसे लोग कैमरे के सामने आकर बोल रहे हैं कि इंदिरा को ठोंक दिया, मोदी क्या चीज है।

पूरा वीडियो इस लिंक पर क्लिक करके देखें।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत भारती
अजीत भारती
पूर्व सम्पादक (फ़रवरी 2021 तक), ऑपइंडिया हिन्दी

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?

मुस्लिमों को रिझाने में 2017 में औंधे मुँह गिरे थे अखिलेश, आरक्षण का वादा किया लेकिन घोषणापत्र खाली रहा: 2027 के चुनावी रण में...

मुस्लिम आरक्षण पर अखिलेश बयानों से लेकर मुलायम सिंह यादव की मुस्लिम राजनीति अपने पुराने ढर्रे पर रही है। हालाँकि अब यूपी में वोटर्स अपनी प्रथमिकताएँ बदल रहे हैं।
- विज्ञापन -