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‘मैंने रामलला की मूर्ति बनाई, दिव्य आँखें तो खुद श्रीराम जी ने बनाई’ : अरुण योगीराज बोले, ‘आज तक किसी ने भी नहीं की बुराई, पूरे देश से मिल रहा प्यार’

मैंने भी फैसला किया है कि मैं लोगों के साथ समय बिताऊँगा, मैं भी लोगों के साथ रहना चाहता हूं। मैंने उनका प्यार अपने दिल में रखा है और जब भी मौका मिलेगा मैं अपने देश के लिए फिर कुछ करूँगा।

इस साल 22 जनवरी को सारी दुनिया की निगाहें अयोध्या पर थी। भगवान राम के भव्य मंदिर के गर्भगृह में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी थी। प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान जब भगवान राम के चेहरे को दुनिया ने देखा, तो बस देखती रह गई। हर कोई टकटकी लगाए रामलला की आँखों में खो गया। चहुँओर प्रभु राम की जय जय कार होने लगी और बाल रामलला पर माताएँ अपना प्यार लुटाने लगीं। कोई उनके चेहरे की तारीफ कर रहा था, कोई नाक की, तो अधिकतम रामलला की दिव्य आँखों की। अब 17 अप्रैल 2024 को जब रामनवमी मनाई जाने वाली है, तो रामलला की दिव्य मूर्ति बनाने वाले मूर्तिकार अरुण योगीराज का एक इंटरव्यू सामने आया है, जिसमें वो बोल रहे हैं कि उन्होंने तो भगवान राम की मूर्ति ही बनाई, उनकी दिव्य आँखों को तो स्वयं भगवान राम ने ही बनाया।

समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में मूर्तिकार अरुण योगीराज ने कहा कि उनके द्वारा बनाई गई राम लला की मूर्ति अयोध्या में भक्तों के भगवान राम के प्रति प्रेम के कारण सुंदर है। योगीराज ने कहा, मैं अयोध्या में बहुत सारे भक्तों से मिला और उन्होंने अपना दर्द, बलिदान और कभी-कभी भगवान राम लला के प्रति प्रेम साझा किया…मैंने सब कुछ सुना… भगवान राम लला के प्रति प्रेम के कारण मूर्ति सुंदर है।

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद उनके जीवन में काफी बदलाव आ गया है। उन्होंने कहा कि अब लोग मुझे देखते ही पहचान जाते हैं। हर जगह मुझे प्यार मिलता है। लोग मुझसे भगवान श्री राम की मूर्ति के बारे में बात करना चाहते हैं। लोगों के सबसे ज्यादा सवाल भगवान श्रीराम की आँखों को लेकर होते हैं।

अरुण योगीराज ने कहा कि भगवान श्री राम की आँखों को देखने के बाद हर किसी को ऐसा लगता है कि वे उस पल उनसे बात करेंगे। यह एक जीवित मूर्ति की तरह प्रतीत होती है। तो वे मुझसे पूछते हैं कि मैंने भगवान श्री राम की आँखें कैसे बनाईं। मेरा हमेशा यही जवाब होता है कि ये मैंने नहीं बनाई, भगवान राम ने बनाई हैं। बहुत से लोग जानना चाहते हैं कि भगवान रामलला की मूर्ति बनाने के पीछे की पूरी प्रक्रिया क्या थी।

योगीराज ने बताया कि जब वह मूर्ति बना रहे थे, तो कुछ लड़के कहते थे कि ऐसा लग रहा है जैसे भगवान राम उनसे बात कर सकते हैं और अब हर भक्त अयोध्या मंदिर में भगवान राम लला के दर्शन के बाद यही बात कहता है। योगीराज ने कहा, जब मैं श्री राम की मूर्ति बना रहा था तो चार-पांच लड़के जो लगभग 18-19 साल के थे, कहते थे कि ऐसा लगता है कि भगवान राम बस उनसे बात करने जा रहे हैं। ऐसी ही प्रतिक्रिया अब लोगों की मिलती हैं, मानों उन लड़कों की बात सच हो गयी। अब पूरा देश भी यह कहता है कि भगवान श्री राम की आँखों को देखकर ऐसा लगता है कि भगवान उस वक्त उनसे बात करेंगे। उनकी आँखें बहुत जीवंत हैं, यह एक कलाकार के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है।

किसी ने नहीं निकाला खोट, सबने दिया प्यार : योगीराज

मूर्तिकार अरुण योगीराज ने कहा कि आर्टवर्क में हर काम की आलोचना होती है। पिछले कई कामों में मेरी भी आलोचना हुई, लेकिन भगवान राम लला की मूर्ति तैयार के लिए किसी ने मेरे काम की बुराई नहीं की। मुझसे जो भी मिला, सभी ने मुझे प्यार और सराहनी दी। योगीराज ने कहा कि हर काम को लगभग 70 प्रतिशत लोग पसंद करते हैं, लेकिन 30 प्रतिशत लोग बुराई भी करते हैं, लेकिन इस काम में मुझे 100 प्रतिशत लोगों का प्यार मिला। एक प्रतिशत लोगों ने भी मेरी बुराई नहीं की। योगीराज ने कहा कि वो स्वयं को भाग्यशाली पाते हैं कि उन्हें भगवान रामलला की मूर्ति बनाने का अवसर मिला।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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