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आतंकियों के समर्थक ‘पत्रकार’ वाजिद खान को पुलिस ने दबोचा: बांग्लादेश की तरह भारत में भी ‘तख्त गिराने’ का देखता है सपना, नरसिंहानंद की हत्या के लिए उकसाता है

वाजिद खान न केवल यहूदियों के प्रति, बल्कि हिंदू समुदाय के प्रति भी नफरत से भरा हुआ है। दोनों के प्रति अपनी घृणा व्यक्त करने के लिए वह मौत की धमकी देने से भी नहीं चूकता है। वह मुस्लिमों के आतंकवाद के खिलाफ इजरायल के साथ खड़े हिंदुओं से घृणा करता है। यह यति नरसिंहानंद के खिलाफ कार्रवाई की माँग करने वाली सबसे मुखर आवाज़ों में से एक था।

राजस्थान पुलिस ने सोशल मीडिया पर हिंदूफोबिक कंटेंट डालने वाले इस्लामी आतंकवाद समर्थक वाजिद खान को हिरासत में ले लिया है। पुलिस फिलहाल उसके कंटेंट और उसके संपर्कों की जाँच कर रही है। पुलिस पता लगा रही है कि वाजिद का किसी आतंकी नेटवर्क या देशद्रोही तत्वों के साथ संपर्क तो नहीं है। वह सोशल मीडिया पर हिंदू और यहूदी घृणा से पोस्ट किया करता था और कट्टरपंथी इस्लाम का समर्थन करता था।

वाजिद खान राजस्थान के अजमेर जिले के गवाना के कायड़ रोड का रहने वाला है। उसने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर खुद को पत्रकार बता रखा है। इसके साथ ही अपने बायो में ‘अल जजीरा अंग्रेजी’ लिख रहा है। हालाँकि, वह अल जजीरा में काम करता है या नहीं या वहाँ अपने लेख छपवाता है या नहीं, ऑपइंडिया इसकी पुष्टि नहीं करता है।

मुस्लिम मुल्क कतर का सरकार समर्थक मीडिया हाउस अल जजीरा अपने हिंदूफोबिक कंटेंट और इस्लाम परस्ती के साथ-साथ आतंकवादियों के पक्ष में वैश्विक स्तर पर नैरेटिव तैयार करने के लिए कुख्यात है। वाजिद खान यहाँ काम करने का दावा करता है। वाजिद खान कुछ दिन पहले आतंकवादी समूह द्वारा निर्दोष यहूदी नागरिकों पर क्रूर हमले की पहली वर्षगाँठ मनाने के लिए कई ट्वीट पोस्ट किया था।

हमास के प्रति हमदर्दी और यहूदियों से घृणा

बता दें कि पिछले साल 7 अक्टूबर को फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर हमला करके यहूदियों का बड़े पैमाने पर नरसंहार किया था। इस साल 7 अक्टूबर को इसके एक साल पूरे हुए। इस दौरान वाजिद खान ने अपने X हैंडल पर लिखा, “7 अक्टूबर की यादगार तस्वीरें।” इसके साथ ही उसने एक तस्वीर भी पोस्ट की थी।

इस पोस्ट में एक हथियारबंद आतंकवादी एक इजरायली सैनिक को टैंक के ऊपर पकड़े हुए है। वाजिद खान ने इस तस्वीर को विजय वाले इमोजी के साथ पोस्ट करके इसके जरिए इस्लामी आतंकवादियों का महिमामंडन किया था। उसने यह भी कहा कि यह दिन किसी त्यौहार से कम नहीं है, जो फिलिस्तीन से इजरायल की भारी हार की याद दिलाता है।

उसने एक दो अलग-अलग पोस्ट में लिखा था, “7 अक्टूबर की शुभकामनाएँ। 7 अक्टूबर को फिलिस्तीनियों ने इजरायल का सुपर पावर होने का घमंड तोड़ दिया था।” एक अन्य पोस्ट में उसने लिखा था, “इसराइल पर हमले को आज एक साल पूरा हो गया है, उसका ताकतवर बनने वाला भ्रम टूट गया है।” उसने इजरायल पर हमला करने वाले हमास के चीफ याह्या सिनवार ‘गाजा का शेर’ बताया।

हिंदुओं से नफरत और जिहादियों से वाजिद खान का प्यार

वाजिद खान न केवल यहूदियों के प्रति, बल्कि हिंदू समुदाय के प्रति भी नफरत से भरा हुआ है। दोनों के प्रति अपनी घृणा व्यक्त करने के लिए वह मौत की धमकी देने से भी नहीं चूकता है। वह मुस्लिमों के आतंकवाद के खिलाफ इजरायल के साथ खड़े हिंदुओं से घृणा करता है। यह यति नरसिंहानंद के खिलाफ कार्रवाई की माँग करने वाली सबसे मुखर आवाज़ों में से एक था।

वाजिद खान ने 4 अक्टूबर को नरसिंहानंद और उनके अनुयायियों को मौत की धमकी दी और कहा था, “कल अति (उनके नाम का मजाक उड़ाते हुए) नरसिंहानंद ने नबी ए करीम की शान में ग़ुस्ताखी की थी .. लेकिन कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई। और अब उस मलूँन के चेले भी नबी ए करीम और हज़रत अली की शान में ग़ुस्ताखीं कर रहे है … इनका इलाज एक ही है वो है हज़रत अली की ज़ुल्फ़िकार !!”

जुल्फिकार मुस्लिमों के पैगंबर मुहम्मद के दामाद अली इब्न अबी तालिब की तलवार का नाम है। वाजिद खान इस पोस्ट के जरिए कहना था कि हिंदू संत नरसिंहानंद और उनके अनुयायियों को वही मौत के घाट उतारा दिया जाएगा, जो मुस्लिम खलीफाओं और शासकों के शासनकाल के दौरान इस्लाम को अस्वीकार करने वालों को भुगतना पड़ा था।

एक अन्य पोस्ट में उसने लिखा था, “इज़राइल के धर्मगुरु मूर्ति पूजा के बारे में क्या धारणा रखते हैं यह उन्हीं से खुद सुन लीजिए। इनके मुताबिक़ यहूदियों की किताब तल्मूड के अनुसार जो लोग मूर्ति पूजा करते हैं उन्हें इस दुनिया में जीने का अधिकार नहीं है। दुनियाभर के वह 6 बिलियन लोग बोझ है, जो मूर्ति पूजा कर पाखंड कर रहे है, अकाल ही उन्हें अब ख़त्म करना चाहता है, मूर्ख 21 वी सदी में भी पत्थर कलेंडर और पाखंड को पूज रहे हैं! इस वीडियो में इस यहूदी धर्मगुरु ने भारत का भी नाम लिया है।”

बांग्लादेश में जब शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट हुआ था, तब इसने कट्टरपंथी बातें लिखी थीं। 5 अगस्त 2024 को उसने बांग्लादेश में इस्लामी झंडा की तस्वीर डालते हुए लिखा था, “सब ताज उछाले जाएँगे, सब तख्त गिराए जाएँगे। बस नाम रहेगा अल्लाह का! Islamic Movement.” यह कट्टर इस्लामी मोहम्मद फैज की कविता का अंश है। वह इस नज्म के माध्यम से भारत में भी तख्ता पलट का सपना देख रहा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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