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नुपुर शर्मा को मौत की धमकी, नारा दिया- जो सूफी की बात करेगा, वही भारत पर राज करेगा: जानिए कौन है नागपुर दंगों में गिरफ्तार हुआ हामिद इंजीनियर

एमडीपी का नेता हामिद इंजीनियर पहले सरकारी नौकर था, फिर कट्टरपंथ की राह पर चल पड़ा। लोग डरे हुए हैं कि कट्टरता ने शहर का माहौल बिगाड़ दिया।

नागपुर में हिंदू विरोधी मुस्लिमों की हिंसा केस में माइनॉरिटीज डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) का कार्यकारी अध्यक्ष मोहम्मद हामिद इंजीनियर पुलिस के हत्थे चढ़ गया। नागपुर पुलिस ने ये गिरफ्तारी 17 मार्च 2025 को नागपुर के हिंदू विरोधी हिंसा मामले में हुई। हामिद एक समय मुस्लिम समुदाय का बड़ा चेहरा था और 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में भी शामिल रहा था। मगर अब उस पर देशद्रोह और दंगे भड़काने जैसे संगीन इल्जाम हैं। पुलिस ने कहा कि हामिद ने भड़काऊ भाषणों से माहौल खराब किया और दंगों के सरगना फहीम खान की मेंटरिंग की।

साल 2022 में हामिद तब चर्चा में आया था जब उसने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा को जान से मारने की धमकी दी थी। नागपुर के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) लोहित मटानी ने उसकी गिरफ्तारी की तस्दीक की।

सरकारी नौकरी से कट्टरपंथी इस्लामी विचारधारा तक

हामिद ने शुरुआत में महाराष्ट्र के पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) में नौकरी की थी, इसीलिए लोग उसे ‘इंजीनियर’ कहने लगे। साल 2002 में वो लोगों की नजर में आया जब नागपुर के मोमिनपुरा में एक मस्जिद पर कब्जे का झगड़ा हुआ। मस्जिद पहले अहले सुन्नत जमात के पास थी, लेकिन तबलीगी जमात के लोगों ने उस पर कब्जा कर लिया। तबलीगी जमात देवबंदी विचारधारा से जुड़ा समूह है, जो कई बार कट्टरपंथी हरकतों में फंसा है। हामिद बरेलवी स्कूल से था, और इन दोनों में गहरे मतभेद हैं।

इस झगड़े के बाद हामिद ने कट्टरपंथ की राह पकड़ ली। उसने ‘ईमान तंजीम’ नाम का एक ग्रुप बनाया, जो बरेलवी सुन्नी पहचान और सूफी ढोंग को बचाने का दावा करता था। हामिद ने एक भाषण में कहा था, “हमें लगा कि प्रशासन हमेशा सियासी दबदबे वालों का साथ देता है, इसलिए ईमान तंजीम बनाया।”

हामिद को वहाबी और देवबंदी विचारों का सुन्नी संस्थानों पर कब्जा बर्दाश्त नहीं था। वो जमीयत उलेमा-ए-हिंद जैसे संगठनों पर खुलकर हमला बोलता था। उसने मौलाना अबुल कलाम आजाद को निशाने पर लेते हुए कहा था कि अबुल कलाम आजाद ने बरेलवी हितों को कुचल दिया था। उसके भाषण ज्यादातर सूफी ढोंग, दरगाहों का धंधा और पैगंबर के नाम पर कट्टरता फैलाने वाले होते थे।

साल 2009 में हामिद ने माइनॉरिटीज डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) बनाई। इसका नारा था, “जो सूफी संतों की बात करेगा, वही भारत पर राज करेगा”। इससे उसकी कट्टर सोच साफ दिखती थी। MDP ने कई राज्यों में चुनाव लड़ा, लेकिन कहीं कामयाबी नहीं मिली। फिर भी सांप्रदायिक तनाव के मौके पर ये पार्टी सड़कों पर कूद पड़ती थी।

सूफी बनकर की थी पीएम मोदी से मुलाकात

साल 2015 में हामिद चर्चा में तब आया था, जब उसने पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। ये मुलाकात पीएम की सूफी पहल के तहत हुई थी, जिसमें पहला मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल था। हामिद ने वहाँ वहाबी विचारधारा के बढ़ते असर का रोना रोया था।

उसने पीएम मोदी से कहा था, “सुन्नी वक्फ बोर्ड पर कट्टर सोच हावी हो गई है। कई सुन्नी संस्थानों पर कब्जा हो गया है, जहाँ कट्टरपंथी विचार फैलाए जा रहे हैं। अगर ये सोच भारत में फैली, तो देश के लिए खतरा होगा।”

उसने अहले सुन्नतुल जमात के लिए अलग वक्फ बोर्ड की माँग करते हुए कहा, “वहाबियों को उनका अलग वहाबी वक्फ बोर्ड दे दो।” उस वक्त कुछ लोग उसे नरम सूफी आवाज समझ बैठे, जो कट्टर इस्लामी जवाब दे रहा था।

पैगंबर के नाम पर धमकियों भरा अतीत

हामिद 15 साल पहले नजर में आया था, जब उसके टैबलॉयड ‘इमाम की आवाज’ में गुजरात और जयपुर में सिलसिलेवार बम धमाकों की बात कही गई। उसकी कॉपियाँ गुजरात के बड़े पुलिस अफसरों को भेजी गईं। हामिद ने सफाई दी कि मुस्लिम समुदाय में गुटबाजी और खूनखराबे की बात कर रहा था।

साल 2011 में उसे हिरासत में लिया गया था, जब मोमिनपुरा में कथित सूफी संत बाबा मुस्तफा के दफन को लेकर भीड़ ने हिंसा की थी। इस हंगामे में उसकी बड़ी भूमिका थी, जो आपसी झगड़ों से जुड़ी थी।

हामिद की कट्टरता 2022 में खुलकर सामने आई, जब उसने नुपुर शर्मा के खिलाफ जहरीले बयान दिए। जून 2022 के पहले हफ्ते में नागपुर में MDP के बैनर तले प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई, जिसमें उसने नुपुर शर्मा और दिल्ली बीजेपी के पूर्व नेता नवीन जिंदल को मौत की धमकी दी।

उसने कहा, “पैगंबर मोहम्मद की शान में गुस्ताखी करने की एक ही सजा है – मौत। कोई आपको रोक नहीं सकता। आप अपनी मौत का फरमान लिख रहे हैं।” उसने 2019 में कमलेश तिवारी की हत्या का हवाला देते हुए कहा, “ये मत सोचो कि मामला सुलझ गया तो आप बच जाओगे। ईशनिंदा मत करो।”

यही वो वक्त था जब MDP सिर्फ नाम की पार्टी से आगे बढ़कर सड़कों पर कट्टर आंदोलन करने लगी। ये लोग इस्लाम का अपमान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग लेकर हंगामा करते थे।

नागपुर में हिंदू विरोधी दंगों में रहा शामिल

बता दें कि 17 मार्च 2025 को नागपुर के महाल इलाके में मुस्लिमों ने हिंदुओं पर हमले किए थे। जिसमें हिंदुओं के घरों, गाड़ियों को निशाना बनाया गया, साथ ही पुलिस वालों पर भी हमले किए गए थे। अफवाह फैली कि कुरान का अपमान हुआ। ये अफवाह तब उड़ी जब हिंदू संगठन खुल्दाबाद में औरंगजेब की कब्र हटाने की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

पुलिस का कहना है कि MDP के नागपुर शहर अध्यक्ष फहीम खान ने इन अफवाहों को हवा दी। उसने भड़काऊ वीडियो फैलाकर उत्तरी और मध्य नागपुर में भीड़ जुटाई। 19 मार्च 2025 को उसे दंगों का सरगना बताकर पकड़ा गया।

फहीम की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की नजर हामिद इंजीनियर पर पड़ी। हामिद ने फहीम की गिरफ्तारी का विरोध किया और फहीम के समर्थन में बयानबाजी की। इस दौरान उसने यूट्यूब चैनल पर जहरीले बयान दिए, जिसके बाद 21 मार्च 2025 को पुलिस ने उसे धर दबोचा। उसके साथ ही यूट्यूबर मोहम्मद शहजाद खान को भी पकड़ा गया था, जो उसकी पार्टी MDP का सदस्य है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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