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मुर्शिदाबाद के हिंदुओं में डर ऐसा कि पिता-पुत्र के श्राद्ध में शामिल होने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे ब्राह्मण-नाई, इस्लामी भीड़ ने घर से खींचकर मार डाला था

परिजनों ने बताया कि ब्राह्मणों के मना करने के पीछे की असली वजह डर है। चंदन और हरगोबिन्द के एक सम्बन्धी चित्रदीप दास ने बताया, "आज हमारे यहाँ श्राद्धकर्म था। हमने एक पुरोहित से आने के लिए कहा था। लेकिन उसने यह कहते हुए आने से इनकार कर दिया कि यह सुरक्षा जुड़ा मामला है।"

इस्लामी कट्टरपंथियों के डर से पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में मारे गए हिन्दू पिता-पुत्र के अंतिम संस्कार में धार्मिक कर्मकांड में नाई और पुरोहित तक शामिल नहीं हुए। इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा के चलते उन्होंने कोई ना कोई कारण बता कर मृतक चंदन दास (40) और हरगोबिन्द दास (70) का क्रियाकर्म करवाने से इनकार कर दिया।

कोई पुरोहित-नाई आने को तैयार नहीं

दैनिक जागरण में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार (16 अप्रैल, 2025) को दोनों का अंतिम संस्कार के बाद श्राद्ध कर्म आयोजित किया जाना था। इसके लिए परिजन शमशेरगंज के ही एक पुरोहितों (ब्राह्मण) के पास गए। उन्होंने मृतकों के परिजनों से कहा कि यह मामला पुलिस के पास है, इसलिए वह किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहते।

परिजनों ने बताया कि ब्राह्मणों के मना करने के पीछे की असली वजह डर है। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए चंदन और हरगोबिन्द के एक सम्बन्धी चित्रदीप दास ने बताया, “आज हमारे यहाँ श्राद्धकर्म था। हमने एक पुरोहित से आने के लिए कहा था। लेकिन उसने यह कहते हुए आने से इनकार कर दिया कि यह सुरक्षा जुड़ा मामला है।”

हिन्दुओं के क्रियाकर्म में ब्राह्मण-पुरोहित के ना आने को लेकर नईदुनिया में प्रकाशित खबर

हरगोबिन्द दास के भतीजे बापोन दास ने बताया, “हमने एक और पुरोहित की व्यवस्था की। लेकिन वह बसुदेवपुर में रहता है, जो 5 किलोमीटर दूर है। उसने कहा कि वह नहीं आ सकता क्योंकि यहाँ कोई सुरक्षा नहीं है। मैं उसके घर गया और गंगाजल लेकर आया। हमने तय किया है कि जब हम सुरक्षित महसूस करेंगे, तभी श्राद्ध कर्म करेंगे।”

श्राद्धकर्म के लिए ब्राह्मणों के अलावा नाइयों ने भी हरगोबिन्द दास के घर आने से मना कर दिया। जागरण को उनके ही एक परिजन ने बताया कि वह अपने इलाके के 2 नाइयों के पास गए थे लेकिन उन्होंने जरूरी सामान ना होने की बात कह कर टाल दिया। उनके इस बहाने के पीछे भी इस्लामी कट्टरपंथियों का खौफ बताया गया है।

परिवार ने ठुकराया ममता सरकार का मुआवजा

गौरतलब है कि 11 अप्रैल, 2025 को मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज और सूती इलाकों में इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा की थी। यह हिंसा कई दिनों तक चली थी। इस्लामी कट्टरपंथियों ने यह हिंसा वक्फ कानून के विरोध के नाम पर की थी।

उन्होंने इसी दौरान मूर्तिकार चंदन दास और उनके पिता हरगोबिन्द दास की घर से खींच कर हत्या कर दी थी। दोनों को चाकुओं से गोदा गया था और उनके शव को सड़क पर फेंक दिया गया था। चंदन दास की पत्नी ने बताया कि इस्लामी कट्टरपंथी उनके घर में घुस कर दोनों को खींच ले गए और मार दिया। उन्होंने बताया कि घंटों तक पुलिस लगातार फोन करने के बावजूद नहीं आई।

चंदन दास और हरगोबिन्द दास के परिजनों ने राज्य की ममता बनर्जी सरकार से मुआवजा लेने से भी इनकार कर दिया है। ममता बनर्जी ने उनके परिवार को ₹10 लाख देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि उन्हें पैसा नहीं बल्कि न्याय चाहिए। मृतक चंदन और हरगोबिन्द के कई परिजन हिंसा के बाद झारखंड भी चले गए थे।

डर कर झारखंड चले गए थे परिजन

हरगोबिन्द दास के भतीजे हृदय दास भी झारखंड के पाकुड़ चले गए थे। उन्होंने बताया था कि वह लोग अपनी माँ को बीमार बना कर एक एम्बुलेंस में छुपते हुए आए हैं। वह झारखंड में एक रिश्तेदार के यहाँ रुके हुए थे। उनके साथ और भी परिजन जान बचा कर भागे थे।

पश्चिम बंगाल पुलिस इस बीच दोनों के हत्यारों को पकड़ने के लिए प्रयास करने का दावा कर रही है। अब तक इस मामले में तीन लोग गिरफ्तार किए गए हैं। पुलिस ने पहले कालू नदाब और दिलदार को गिरफ्तार किया था। इनमें से एक बांग्लादेश सीमा से गिरफ्तार किया गया था।

पश्चिम बंगाल पुलिस ने बताया है कि अब उसने इस मामले में तीसरा आरोपित इंजमाम उल हक़ गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया है कि इंजमाम अपराध में शामिल तो था ही, उसने CCTV कैमरे तोड़ कर सबूत मिटाने के प्रयास भी किए थे।

मुर्शिदाबाद में अभी तैनात रहेंगे केन्द्रीय सुरक्षाबल 

मुर्शिदाबाद में हिंसा के बाद कलकत्ता हाई कोर्ट ने केन्द्रीय सुरक्षाबल तैनात करने का आदेश दिया था। उनके आने के बाद यहाँ हिंसा रुक सकी थी। मुर्शिदाबाद में हिंसा रोकने के लिए BSF भी तैनात की गई थी। हाई कोर्ट ने गुरुवार (17 अप्रैल, 2025) को कहा है कि केन्द्रीय सुरक्षाबल कुछ दिन और मुर्शिदाबाद में रहेंगे। वहीं यहाँ के स्थानीय हिन्दुओं ने कहा है कि इस्लामी कट्टरपंथियों से सुरक्षा के लिए उन्हें स्थायी रूप से केन्द्रीय बलों की तैनाती चाहिए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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