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ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ₹40000 करोड़ का खरीदेगा रक्षा सामान: PAF के परखच्चे उड़ाने वाले ब्रह्मोस और स्काल्प क्रूज की बढ़ेगी आपूर्ति, तीनों सेनाओं के पास पहले से अधिक होगा गोला-बारूद

इन सभी हथियार और उपकरण को खरीदने के लिए समय सीमा तय की गई है। इसके भीतर ही सभी खरीदारी होनी चाहिए। इसमें डिलीवरी के लिए एक साथ के भीतर ही आश्वासन देना होगा।

पाकिस्तान के साथ जंग की स्थिति के बीच भारतीय सरकार ने सेना को अधिक मजबूत करने का फैसला लिया है। जहाँ ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तानी वायुसेना को नेस्तनाबूद करने के लिए भारत के अहम मिसाइलों का इस्तमाल किया गया। अब उन्हीं की स्पलाई बढ़ाने के लिए सरकार ने अधिक पैसे दिए हैं। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने आपातकालीन शक्तियों (EP) का इस्तमाल करते हुए सेनाओं के हथियार और गोला बारूद खरीदने के लिए ₹40,000 करोड़ की मंजूरी दी है।

दरअसल, शनिवार (17 मई 2025) को इससे संबंधित बैठक आयोजित की गई, जिसमें रक्षा मंत्रालय और तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बैठक में बताया गया कि आपातकालीन शक्तियों में सेनाएँ नजर रखने वाले ड्रोन, आत्मघाती (फिदायीन) ड्रोन, लॉन्ग रेंज लूटरिंग म्यूनिशन और तोप, मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम के लिए गोला बारूद खरीद सकेंगी। इस कदम से पाकिस्तान पर हुए हमलों में इस्तमाल हुई मिसाइलों जैसे ब्रह्मोस और स्काल्प क्रूज मिसाइलों की आपूर्ति और तेज हो जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन सभी हथियार और उपकरण को खरीदने के लिए समय सीमा तय की गई है। इसके भीतर ही सभी खरीदारी होनी चाहिए। इसमें डिलीवरी के लिए एक साथ के भीतर ही आश्वासन देना होगा। इन शक्तियों का उपयोग केवल तीनों सनाओं के उप अधिकारी द्वारा ही किया जाएगा। साथ ही यह 5वीं बार है, जब सेनाओं को इस तरह की आपातकालीन खरीद के लिए मंजूरी मिली है।

इस खरीद प्रक्रिया में रक्षा मंत्रालय के वित्त सलाहकार भी शामिल होंगे। रक्षा मंत्रालय ने निजी और सरकारी उद्योगों के साथ दूर तक की योजनाओं पर भी बातचीत शुरू कर दी है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड नाम की कंपनी को ड्रोन डिटेक्शन के लिए 10 नए लो-लेवल रडार का ऑर्डर मिलने की संभावना जताई गई हैं। इससे पहले 6 रडारों के लिए ऑर्डर दिया जा चुका है। इसके अलावा कुछ अन्य ड्रोन निर्माण वाली भारतीय कंपनियों को भी तीनों सेनाओं से बड़ा ऑर्डर मिल सकता है।

अधिकारियों ने बताया कि नई EP के तहत बजट की 15 प्रतिशत सीमा होगी और अनुबंधों को 40 दिनों के भीतर अंतिम रूप देना होगा। साथ ही EP खरीद वित्तीय सलाहकारों की सहमति से की जाएगी और किसी भी आयात या वैश्विक खरीद के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होगी।

बता दें कि इससे अतिरिक्त भारत सरकार बजट के आवंटन में अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सेना की धनराशि को बढ़ाने पर भी विचार कर सकती है। यह EP मंजूरी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मिली है, जिसमें भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान वायु सेना को भारी नुकसान पहुँचाया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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