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केरल के कॉलेज में गाजा पर डिबेट, नजारा अफगानिस्तान जैसा: पर्दे के पीछे बैठाई गईं हिजाब पहनी मुस्लिम छात्राएँ, इस्लामी कट्टरपंथी डॉ. अब्दुल्ला मंच पर चढ़ा

डॉ. अब्दुल्ला बेसिल वही इस्लामी कट्टरपंथी है जो अक्सर हिजाब का प्रचार करता है। बेसिल का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें एक छात्रा उससे हिजाब के खिलाफ में बहस करती है। इस पर बेसिल उसे सादगी जैसी थ्योरी देकर चुप करा देता है।

भारत में जहाँ हम विश्वगुरु बनने और विकसित भारत 2047 के सपने बुन रहे हैं, वहीं केरल में हाल ही में ऐसा नजारा सामने आया जो सीधे अफगानिस्तान की याद दिलाता है। यहाँ कासरगोड कॉलेज में गाजा पर चल रही डिबेट में छात्र और छात्राओं के बीच पर्दा लगा दिया गया। हिजाब पहनी मुस्लिम छात्राओं को पर्दे के पीछे बिठाया गया है।

चर्चा का विषय था- ‘गाजा से लेकर विज्ञान और मजहब तक।’ इस डिबेट प्रतियोगिता का एक फोटो सामने आया है। इसमें इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा वाले डॉ. अब्दुल्ला बेसिल सीपी बोलता दिखाई दे रहा है। इस फोटो में साफ देखा जा सकता है की लड़के और लड़कियों के बीच पर्दा लगाया गया है।

डॉ. अब्दुल्ला बेसिल वही इस्लामी कट्टरपंथी है जो अक्सर हिजाब का प्रचार करता है। इससे पहले भी बेसिल का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें एक छात्रा उससे हिजाब के खिलाफ बोलती है तो बेतुके तर्क देकर बेसिल उसे चुप करा देता है।

पाँच दिन पहले के इस वीडियो में छात्रा तर्क देती है- “लड़कियाँ अच्छे कपड़े और मेकअप किसी आदमी को रिझाने के लिए नहीं करती हैं बल्कि इससे आत्मविश्वास बूस्ट होता है।”

इस पर बेसिल हिजाब के समर्थन में बहस शुरू कर देता है और सादगी जैसे थ्योरी देकर छात्रा को चुप करवा देता है। बेसिल बेतुके तर्क देता है कि बिना मेकअप और अच्छे कपड़े पहनना चाहिए, इससे सादगी झलकती है और सादगी ही असली आत्मविश्वास को जगाती है।

अब्दुल्ला की इस्लामी कट्टरपंथ की विचारधारा को इस्लाम के प्रचार में लगा Umasking Anomalies नाम के संगठन ने भी खूब सराहा। ये संगठन बेसिल के तर्क को आज के युवाओं को समझाने के लिए प्रोपेगेंडा चलाना शुरू कर देता है। बेसिल की यह वीडियो शेयर करते हुए संगठन कहता है- खासकर मलयालम बोलने वाले लोगों को हिजाब पर हुई इस वार्ता को सुनना चाहिए।

Umasking Anomalies जैसे संगठन और डॉ. अब्दुल्ला बेसिल जैसे लोग कॉलेज में छात्र-छात्राओं को इस्लाम की दीन देने में लगे हुए हैं। एक इस्लामी कट्टरपंथी की सोच की तरह जब बात लड़कियों की आजादी और आत्मविश्वास की आती है तो पर्दा कर देते हैं और हिजाब पर लंबा-चौड़ा ज्ञान देने लगते हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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