चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि याचिकाकर्ता एडीआर ने नाम काटे जाने का दावा किया था। उसने कहा था कि उसका नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल था, लेकिन अंतिम सूची से हटा दिया गया। दरअसल उसका नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं था, क्योंकि उसने वोटर वेरिफिकेशन वाला फॉर्म नहीं भरा था। उसने झूठा हलफनामा दायर किया है, जो झूठी गवाही के बराबर है।

द्विवेदी ने कहा, “अदालत में हलफनामा पेश करने से पहले सही तरह जाँच कर खुद को संतुष्ट करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि जिनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, उनके लिए अपील करने के लिए अभी भी 5 दिन का समय है। याचिकाकर्ताओं और राजनीतिक दलों को ऐसे लोगों को अपील करने में मदद करनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जे बागची की खंडपीठ ने एडीआर के वकील प्रशांत भूषण को बिना जाँचे परखे हलफनामा दायर करने पर नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, “व्यक्ति को सही जानकारी देनी चाहिए थी।” उन्होंने कहा कि जब वकील को कोई दस्तावेज सौंपा गया था, तो जिम्मेदारी होनी चाहिए थी। इस पर प्रशांत भूषण ने जवाब दिया कि हलफनामा उन्हें एक जिम्मेदार व्यक्ति ने सौंपा था। उन्होंने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण से हलफनामे की प्रामाणिकता की पुष्टि करने के लिए कहा जा सकता है।
प्रशांत भूषण ने जब बीस अन्य लोगों के हलफनामे की बात कही तो न्यायमूर्ति बागची नाराज हो गए। उन्होंने कहा, “इस हलफनामे के बाद, हमें नहीं पता कि अन्य हलफनामे कितने प्रामाणिक होंगे।”
न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि एडीआर को हलफनामा कोर्ट को सौंपने से पहले यह देखना चाहिए था कि क्या उसका नाम मसौदा सूची में है। न्यायमूर्ति कांत ने पूछा कि पीड़ित व्यक्ति अपीलीय उपायों का लाभ क्यों नहीं उठा सकते। उन्होंने कहा कि अदालत उनके लिए विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा मुफ्त कानूनी सहायता सुनिश्चित कर सकती है।
चुनाव आयोग के वकील द्विवेदी ने कहा कि कोई भी मतदाता यह कहते हुए अदालत नहीं आया है कि उन्हें आदेश नहीं मिला। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि अपील दायर की जाती है, तो उन पर फैसला लिया जाएगा।
कोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी, प्रशांत भूषण और वृंदा ग्रोवर पेश हुए। जबकि चुनाव आयोग की ओर से राकेश द्विवेदी ने दलीलें पेश की।

