ममता बनर्जी ने SIR के खिलाफ लोगों में फैलाया ‘डर’, सड़क पर उतरकर किया विरोध: 7 की मौत का किया फर्जी दावा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार (04 नवंबर 2025) को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ कोलकाता की सड़कों पर उतरकर पैदल मार्च निकाला। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया ‘शांत और अदृश्य धांधली’ है, जिसे केंद्र की बीजेपी सरकार और चुनाव आयोग मिलकर कर रहे हैं।

इस पैदल मार्च में हजारों TMC समर्थक शामिल हुए। जुलूस की शुरुआत रेड रोड पर बीआर अंबेडकर की प्रतिमा से हुई और यह करीब 3.8 किलोमीटर दूर जोरसांको ठाकुर बाड़ी तक गया, जो रविंद्रनाथ टैगोर का पुश्तैनी घर है। इस दौरान ममता बनर्जी अपनी पहचान वाली सफेद सूती साड़ी और चप्पल पहने सबसे आगे चल रही थीं। रास्ते में वे लोगों का अभिवादन करती जा रही थीं, जो बालकनी या सड़क के किनारे से उन्हें देख रहे थे।

साथ में उनके भतीजे और TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी उनके पीछे चल रहे थे और भीड़ की ओर हाथ हिला रहे थे। TMC के कई वरिष्ठ नेता और मंत्री भी इस रैली में मौजूद थे। चारों ओर पार्टी के झंडे लहरा रहे थे, समर्थक नारे लगा रहे थे और रंग-बिरंगे पोस्टर थामे हुए थे।

रैली के दौरान TMC नेताओं ने गंभीर आरोप लगाए। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पिछले सात दिनों में SIR प्रक्रिया ‘डर’ की वजह से 7 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने भीड़ से कहा कि अब ‘दिल्ली में एक बड़ा आंदोलन’ करने के लिए तैयार रहें। उन्होंने यह भी कहा कि 2026 का विधानसभा चुनाव सिर्फ ममता बनर्जी को चौथी बार मुख्यमंत्री बनाने का नहीं बल्कि बीजेपी को बंगाल में ‘शून्य सीटों पर लाने’ की लड़ाई है।

ममता बनर्जी ने भी केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने चुनाव आयोग से सवाल किया,”बिहार में ऐसी ही प्रक्रिया के बाद कितने रोहिंग्या या बांग्लादेशी मिले?” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बंगाल के एक भी योग्य मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटाया गया तो TMC ‘भाजपा सरकार को गिरा देगी।’ ममता ने कहा कि बीजेपी बंगाल के खिलाफ ‘झूठी खबरें’ फैला रही है और ‘बंगाली प्रवासियों को बांग्लादेशी’ कहकर बदनाम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने आधार कार्ड और दूसरे पहचान पत्रों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा, “आपने आधार कार्ड के लिए कितना पैसा लिया? केंद्र सरकार ने हर व्यक्ति से 1,000 रुपए लिए। फिर अब क्यों कहा जा रहा है कि आधार वोटर लिस्ट या राशन कार्ड के लिए जरूरी नहीं है? आखिर जनता को बेवकूफ कौन बना रहा है?”

उन्होंने बताया कि लोगों के पास पहले से कई कार्ड हैं, जैसे राशन कार्ड, स्वास्थ्य कार्ड, पैन कार्ड, आधार कार्ड, किसान कार्ड। तो अब सबसे अच्छा उपाय यही है कि ‘दिल्ली की सरकार को हटाया जाए।’

हाल ही में शुरू हुई SIR प्रक्रिया सल 2002 के बाद बंगाल में मतदाता सूची की सबसे बड़ी समीक्षा मानी जा रही है। यह अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। बीजेपी का कहना है कि यह प्रक्रिया ‘पारदर्शिता और शुद्धता’ लाने के लिए है ताकि मतदाता सूची साफ हो सके। लेकिन TMC का आरोप है कि चुनाव आयोग बीजेपी के दबाव में काम कर रहा है और ‘साल 2026 के चुनाव से पहले मतदाता सूचियों में हेरफेर’ की कोशिश की जा रही है।

राजनीतिक जानकार इसे एक ‘दो शक्तियों की लड़ाई’ बता रहे हैं, जहाँ एक ओर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की प्रशासनिक ताकत और दूसरी ओर TMC की जनता के बीच गहरी पकड़ और सड़कों पर उतरी ताकत है।