Homeराजनीतिकिसी का उठा मीडिया से विश्वास, कोई 'फर्जी' बताने पर तुला: जानिए कैसे बिहार...

किसी का उठा मीडिया से विश्वास, कोई ‘फर्जी’ बताने पर तुला: जानिए कैसे बिहार नतीजों से पहले एग्जिट पोल देख विपक्षी बौखलाए, अभी से रो रहे EVM-वोटचोरी का रोना

बिहार के लगभग सभी एग्जिट पोल में एनडीए की सरकार बन रही है। इसे महागठबंधन के नेताओं ने खारिज कर दिया है। विपक्ष हमेशा से एग्जिट पोल जब विरोध में होता है, तो उसे खारिज करता रहा है। यहाँ तक कि चुनाव नतीजे जब खिलाफ में आते हैं, तो उसे 'ईवीएम हैक' और 'वोट चोरी' से जोड़कर अपनी नाकामी छिपाने की कोशिश करता है।

बिहार में दोनों चरणों में हुई रिकॉर्डतोड़ वोटिंग के बाद लोगों की दिलचस्पी एग्जिट पोल में थी, क्योंकि सब जानना चाहते हैं कि वोटरों का उत्साह वर्तमान नीतीश सरकार के पक्ष में है या 20 साल सत्ता में रहने के बाद एंटी इनकम्बैंसी फैक्टर का असर चुनाव पर पड़ा है। एग्जिट पोल के नतीजों ने ‘एक बार फिर नीतीशे कुमार’ पर मुहर लगा दी है। यही वजह है कि अभी से पटना में पोस्टर लग गए हैं- ‘टाइगर जिंदा है’

इससे पहले हम के प्रमुख और केन्द्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा, ”मैं पहले दिन से ही कह रहा हूँ कि एनडीए 160 सीटें जीतेगा और सरकार बनाएगा. एग्ज़िट पोल भी बता रहे हैं कि एनडीए को कम से कम 40 सीटें मिलेंगी।” बीजेपी और जेडीयू के नेता भी मान रहे हैं कि एग्जिट पोल से साबित हो गया है कि जनता ने एनडीए के पक्ष में वोट किया है। जनता को ‘जंगलराज-2’ नहीं चाहिए।

एग्जिट पोल पचा नहीं पा रहा महागठबंधन

विपक्ष एग्जिट पोल को पचा नहीं पा रहा है। महागठबंधन के सीएम चेहरा तेजस्वी यादव ने एग्जिट पोल को फर्जी करार देते हुए कहा है कि 18 नवंबर को महागठबंधन की सरकार बनेगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मतगणना में किसी तरह की ‘गड़बड़ी’ की गई, तो जनता इसका जवाब देगी। उन्होंने यहाँ तक आरोप लगाया कि एग्जिट पोल गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के निर्देश के मुताबिक बनाया गया है।

तेजस्वी यादव ने कहा है कि एग्जिट पोल मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की है, ताकि रिजल्ट अधिकारियों पर दबाव बनाया जा सके। कुछ ऐसी ही प्रतिक्रिया बिहार चुनाव में बगैर उम्मीदवार उतारे जोर-शोर से महागठबंधन का प्रचार कर रहे एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव की भी है।

अखिलेश यादव ने एग्जिट पोल को ‘झूठा’ करार देते हुए इसे ‘भ्रमित’ करने वाला बताया है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, जब चुनाव आयोग मतदान के कई दिनों तक वोटों का आँकड़ा नहीं दे पाता है तो ये चैनल कैसे एक घंटे में सब बता देते हैं।”

उन्होंने कहा, “इनके झूठ के ग्राफ़िक्स कई दिनों पहले से तैयार हो जाते हैं, जहाँ से भोजन-पानी का इंतज़ाम होता है ये झूठे चैनल उसकी पंगत में जा बैठते हैं। जिनको लगता भी है कि ये एग्जिट पोल सही हैं वो उप्र के लोकसभा के चुनाव का एग्जिट पोल देख लें जहाँ बड़े-बड़े भाजपाई सूरमाओं की हार हुई और फेक एग्जिट पोलों की भी।”

आरजेडी के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “एग्जिट पोल पहले भी गलत साबित हुए हैं और आगे भी गलत साबित होंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि 14 नवंबर को महागठबंधन और तेजस्वी यादव भारी मतों से जीतेंगे। बिहार की जनता ने एनडीए सरकार के खिलाफ वोट दिया है और तेजस्वी को सरकार बनाने के लिए वोट दिया है। एग्जिट पोल देखकर जो लोग भ्रम में हैं, उन्हें भ्रम में रहने दें। सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।”

आरजेडी नेता और बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि हाई मतदान का ज्यादा होना, हमेशा सत्ताधारी दल के खिलाफ जनता का जनादेश माना जाता है। हमें अंतिम परिणाम का इंतजार करना होगा। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि बिहार में ‘महागठबंधन’ आराम से सरकार बनाएगा। एग्जिट पोल हकीकत से कोसों दूर हैं।

समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने एग्जिट पोल पर सवाल उठाते हुए कहा, “बिहार की जनता तेजस्वी यादव को सीएम बनाना चाहती है। जनता ने नीतीश सरकार को हटाने का फैसला कर लिया है।”

महागठबंधन की घटक कॉन्ग्रेस का भी यही हाल है। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने (12 नवंबर 2025) बुधवार को कहा, “मैं एग्जिट पोल पर कुछ नहीं कहूँगी। जब नतीजे आएँगे, तब इस पर बात करूँगी। उन्होंने कहा कि यहाँ लोगों के मताधिकार के साथ हेराफेरी की गई है इसलिए बिहार सबक सिखाएगा और मुझे पूरा विश्वास है कि महागठबंधन की सरकार बनेगी।”

कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने तो यहाँ तक दावा कर दिया है कि बिहार में दोनों गठबंधन के बीच मुकाबला बराबरी का था। यदि एनडीए को 140 से अधिक सीटें मिलती है तो ये ‘वोटर लिस्ट और ईवीएम में हेरफेर’ का कमाल होगा।

एग्जिट पोल पर दिग्विजय सिंह ने अविश्वास जताते हुए कहा कि उन्हें एग्जिट पोल पर कभी भरोसा ही नहीं रहा। ये चुनाव एकतरफा नहीं बल्कि दोनों गठबंधन के बीच बराबरी का था। वहीं सांसद पप्पू यादव ने एग्जिट पोल के नतीजो को खारिज करते हुए कहा कि एग्जिट पोल कब सही था? अगर वोट बढ़ा है तो कहाँ बढ़ा है। जाहिर है बिहार की जनता ने महागठबंधन को वोट दिया है।

कॉन्ग्रेस नेता तारिक अनवर ने कहा कि एग्जिट पोल कभी सटीक नहीं होते। ये सिर्फ एक अनुमान होते हैं कि क्या हो सकता है। इन्हें अंतिम नतीजा मान लेना सही नहीं होगा। वहीं आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह ने एसआईआर पर सवाल खड़े करते हुए अभी से कहना शुरू कर दिया है कि वोट चोरी हुई है उसका बहुत व्यापक असर इस चुनाव पर पड़ेगा।

बिहार में महागठबंधन के नेता जहाँ एग्जिट पोल को नकारने में लगे हैं और इसे भ्रम फैलाने वाला कह रहे हैं। अधिकारियों पर दबाव बनाने का तरीका बताने में लगे हैं, वहीं एनडीए के घटक दल के नेता इससे काफी उत्साहित दिख रहे हैं।

एग्जिट पोल में एनडीए की बन रही सरकार

अगर ‘पोल ऑफ पोल्स’ की बात करें तो एनडीए को 148 सीटें, महागठबंधन को 88 सीटें और अन्य के खाते में 7 सीटें आ रही हैं। किसी एग्जिट पोल में जेडीयू सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरती हुई दिख रही है, तो किसी एग्जिट पोल में बीजेपी को सबसे ज्यादा सीटें मिलती दिखाई दे रही है। लेकिन हर एग्जिट पोल एनडीए की सरकार बनवा रहा है।

MATRIZE एग्जिट पोल के अनुसार, बिहार चुनाव 2025 में NDA जीत हासिल करेगी। चुनाव में NDA को 147-167 सीटें मिलने वाली हैं। वहीं महागठबंधन को 70-90 सीटों पर सिमटकर रह जाएगा। उधर अन्य पार्टियों को 3-6 सीटें मिलने की संभावना है।

People’s Insight के एग्जिट पोल के हिसाब से बिहार चुनाव में NDA 133-148 सीटें हासिल करेगी। वही महागठबंधन को 87-102 सीटें मिलने का अनुमान है जबकि जनसुराज पार्टी केवल 0-2 सीटों पर सिमटकर रह जाएगी। उधर अन्य पार्टियों की झोली में 3-6 सीटें जाने की संभावना है।

दैनिक भास्कर के एग्जिट पोल में भी NDA को बढ़त मिल रही है। इसमें NDA 145-160 सीटें, महागठबंधन को 73-91 सीटें मिलने का अनुमान है। जनसुराज का खाता भी खुल सकता है, पार्टी को 0-3 सीटें मिल सकती हैं। वहीं अन्य दल 5-10 सीटों पर जीत हासिल कर सकते हैं।

Chanakya Strategies के एग्जिट पोल में NDA को 130-138 सीटें, महागठबंधन को 100 से 108 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है।

‘वोट चोरी’ और EVM के मत्थे फोड़ना चाहते हैं हार का ठीकरा

हालाँकि बिहार विधानसभा चुनाव में 2020 में एग्जिट पोल गलत साबित हुए थे। उस वक्त राज्य में महागठबंधन की जीत का दावा ज्यादातर एग्जिट पोल में किया गया था। लेकिन नतीजों ने महागठबंधन को फिर निराश किया था। यहाँ नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी। ऐसा ही 2015 के विधानसभा चुनाव के वक्त भी हुआ था।

फिलहाल एग्जिट पोल में मिल रही हार को लेकर महागठबंधन अभी से EVM और SIR पर ठीकरा फोड़ने की कोशिश में जुट गया है। एक तरफ ये कहा जा रहा है कि जनता बदलाव लाने जा रही है और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन की सरकार 18 नवंबर को शपथ लेगी। वहीं वोट चोरी, ईवीएम में गड़बड़ी जैसे बहाने तैयार कर चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया में ‘गड़बड़ी’ को निशाना बनाने की पूरी तैयारी है।

तेजस्वी यादव कह रहे हैं कि अगर काउंटिग धीमा हुआ तो इसका मतलब ‘हेराफेरी’ है, वहीं अखिलेश यादव कह रहे हैं कि भ्रम फैला कर चुनावी गिनती में गड़बड़ी करने की तैयारी है। यानी चुनाव में हार हुई तो मोदी सरकार और चुनाव आयोग ने मिलकर हराया दिया और जीत हुई तो जनता ने जिताया। आखिर विपक्ष कब अपनी हार को स्वीकार करेगा। ताकि नतीजों का विश्लेषण कर अपनी पकड़ जनता में बनाने के लिए खून-पसीना बहा सके।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

झाँसी में NSUI नेता पर हत्या का केस, घर में फंदे से लटकी मिली पत्नी: याद आई नैना साहनी, दिल्ली में कॉन्ग्रेस नेता ने...

झाँसी में NSUI नेता भरत व्यास पर दहेज हत्या का मामला दर्ज हुआ है। उनकी पत्नी की लाश फंदे से लटकी मिली है। घटना ने कॉन्ग्रेस युवा नेता से जुड़े दिल्ली के नैना हत्याकांड की याद दिला दी।

ममता से ज्यादा अभिषेक बनर्जी से क्यों नाराज है बंगाल? सत्ता, घोटालों और अहंकार की राजनीति ने कैसे बनाया जनता के गुस्से का सबसे...

बंगाल में TMC की करारी हार के बाद जनता का सबसे बड़ा निशाना ममता बनर्जी के भतीजे और राजनीतिक उत्तराधिकारी माने जाने वाले अभिषेक बनर्जी बने हैं।
- विज्ञापन -