दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके से पहले आतंकी डॉ उमर नबी को पुरानी दिल्ली की एक मस्जिद में जाते हुए देखा गया था। सीसीटीवी फुटेज में वह रामलीला मैदान के पास तुर्कमान गेट के सामने स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद में प्रवेश करते और कुछ देर बाद बाहर निकलते दिखाई दिया।
जाँच में पता चला है कि वह वहाँ करीब 10 मिनट तक रुका और फिर 10 नवंबर 2025 की दोपहर 2:30 बजे लाल किले की ओर बढ़ा। यह मस्जिद तबलीगी जमात की गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र मानी जाती है।
#BREAKING: Major revelation in the Red Fort blast case, Terrorist Umar Mohammad , also known as Umar Nabi , visited a mosque in Old Delhi before the explosion. He reportedly stayed there for over ten minutes before heading towards the Red Fort, where the blast later occurred:… pic.twitter.com/qHWn9zzI9S
— IANS (@ians_india) November 13, 2025
उमर ने अपनी ह्युंडई i20 कार में विस्फोट किया, जिससे राजधानी के सबसे व्यस्त पर्यटक स्थलों में से एक पर दहशत फैल गई। जाँच एजेंसियों का मानना है कि उमर ने यह कदम जल्दबाजी में उठाया, क्योंकि उसके साथी आतंकियों को पुलिस ने पहले ही 2900 किलो विस्फोटक, असॉल्ट राइफल्स और गोला-बारूद के साथ गिरफ्तार कर लिया था।
‘व्हाइट कॉलर आतंकी समूह’ का सबसे कट्टर सदस्य
डॉ उमर उन नबी को ‘व्हाइट कॉलर आतंकी समूह’ का सबसे कट्टर सदस्य बताया जा रहा है। धमाके के समय वही कार चला रहा था। उसके शव के अवशेषों से DNA मिलान के बाद उसकी पहचान पक्की हुई, जो कश्मीर के पुलवामा जिले से संबंध रखता था। वह तुर्की की राजधानी अंकारा में बैठे एक हैंडलर ‘यूकासा’ से संपर्क में था।
जाँच में यह भी सामने आया है कि उमर धमाके से पहले फरीदाबाद से निकलकर मेवात होते हुए फिरोजपुर झिरका पहुँचा था और फिर दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे के रास्ते वापस दिल्ली लौटा। उसने रास्ते में एक ढाबे पर अपनी कार में ही रात बिताई।
इसके बाद वह बदरपुर बॉर्डर से दिल्ली में दाखिल हुआ। इन सभी स्थानों पर उसकी मौजूदगी CCTV फुटेज में दर्ज हुई है। जाँच एजेंसियाँ अब उमर की दूसरी लाल रंग की फोर्ड इकोस्पोर्ट कार की भी जाँच कर रही हैं, जो हरियाणा के एक गाँव से बरामद हुई है। शक है कि इसी गाड़ी का इस्तेमाल अमोनियम नाइट्रेट लाने और इकट्ठा करने में किया गया था।
इस मामले में कश्मीर के दो अन्य डॉक्टर, डॉ आदिल अहमद राथर और डॉ मुझम्मिल शकील (मुसैब गनई) को भी गिरफ्तार किया गया है। इनके साथ एक महिला डॉ शाहीन सईद को भी पकड़ा गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शाहीन को जैश-ए-मोहम्मद (JeM) की महिला विंग ‘जमात-उल-मोमिनात’ का नेटवर्क भारत में खड़ा करने की जिम्मेदारी मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर ने दी थी। ये तीनों अल-फलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद में काम करते थे, जो अब जाँच के घेरे में है।

