मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में महापौर के जनता दर्शन कार्यक्रम में एक पीड़ित ने रियल-टाइम भ्रष्टाचार का खुलासा कर दिया। स्थानीय निवासी पंकज राठौर ने एक व्यक्ति को फोन मिलाया जिसने फोन पर साफ शब्दों में रिश्वत माँगी और ‘रेट लिस्ट’ भी पढ़कर सुनाई।
पीड़ित ने ये कॉल मुरैना नगर निगम की मेयर शारदा सोलंकी के सामने की। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
पंकज राठौर भवन निर्माण अनुमति के लिए स्वीकृति चाहते थे, पर उनसे रिश्वत माँगी जा रही थी। इसके बाद 11 नवंबर 2025 नगर निगम कार्यालय में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में पहुँचे। मेयर शारदा सोलंकी की मौजूदगी में राठौर ने आरोप लगाया कि एक दलाल लगातार नगर निगम अधिकारियों के नाम पर रिश्वत माँग रहा है।
अपने आरोप को साबित करने के लिए पंकज राठौर ने उसी व्यक्ति को मेयर के सामने फोन मिलाया और कॉल को स्पीकर पर डाल दिया। राठौर ने रिश्वत माँगने वाले से कहा कि उनकी स्लिप जारी हो गई है, अब उन्हें क्या करना चाहिए।
इस पर उस व्यक्ति ने कहा कि फाइल का पीडीएफ भेजो और फिर राठौर की भवन अनुमति फाइल को पास कराने के लिए माँगी जाने वाली रिश्वत की रकम विस्तार से बताने लगा।
This video is reportedly from Morena, Madhya Pradesh, where a young man approached the Mayor with a corruption complaint. When the Mayor asked him how he knew about the bribery, the youth immediately called the corrupt officials on the spot and exposed them right in front of the… pic.twitter.com/0dn4RuprCG
— The Nalanda Index (@Nalanda_index) November 16, 2025
उसने कहा कि केके शर्मा के लिए ₹10,000, ‘किसी फोटो वाले’ के लिए ₹4,000, अजय परिहार के लिए ₹1,000 और अपने लिए ₹3,000 चाहिए। कुल मिलाकर रिश्वत की रकम लगभग ₹15,000 से ₹18,000 तक थी।
एफपीजे की रिपोर्ट के अनुसार, रिश्वत की पूरी माँग इस प्रकार थी- आरआई अशोक भारती ने ₹10,000 माँगे, मोहर सिंह ने नामांतरण के लिए ₹8,000 माँगे, शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने ₹6,000 माँगे और केके शर्मा ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए ₹10,000 माँगे।
रियल-टाइम भ्रष्टाचार खुलासे से हैरान मेयर सोलंकी ने तुरंत कार्रवाई का आदेश दिया। नगर निगम आयुक्त सतेंद्र सिंह धाकरे ने बताया कि जिन कर्मचारियों और अधिकारियों के नाम इस फोन कॉल में सामने आए हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि नोटिसों के जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि भवन अनुमति की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है और आवेदकों को नगर निगम कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने कहा, “लोग आर्किटेक्ट के माध्यम से आवेदन करते हैं, शुल्क ऑनलाइन लिया जाता है और अनुमति भी डिजिटल रूप से जारी की जाती है। शिकायत की तारीख तक उनसे कोई ऑनलाइन आवेदन प्राप्त नहीं हुआ था।”

