अयोध्या में सड़क चौड़ीकरण और ईदगाह मस्जिद का मुद्दा एक बार फिर धार्मिक और सामाजिक तनाव का केंद्र बन गया है। रौनाही–ड्योढ़ी संपर्क मार्ग के चौड़ीकरण परियोजना में बभनियावा चौराहे पर स्थित ईदगाह मस्जिद को हटाने की माँग को लेकर हिंदू संगठनों और संतों ने अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान कर दिया है।
विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने संतों के साथ मिलकर सोहावल तहसील में डेरा डाल दिया है। उनका कहना है कि विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए मस्जिद को हटाना आवश्यक है। संतों ने इसे ‘ऐतिहासिक कदम’ बताते हुए आंदोलन को व्यापक रूप देने की घोषणा की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल दलों और लोगों का कहना है कि रौनाही-ड्योढी मार्ग पर सड़क को चौड़ा करने के लिए मंदिर और बरगद-पीपल का पेड़ हटा दिये गए हैं, लेकिन रास्ते में ईदगाह भी आई तो उसे बचाकर सड़क मोड़ने की कोशिश की जा रही है। यह पक्षपातपूर्ण रवैया है जिसके विरोध में यह धरना प्रदर्शन किया जा रहा है।
स्थानीय मुस्लिम समुदाय का कहना है कि ये उनकी धार्मिक पहचान पर सीधा हमला है। उनका कहना है कि बाबरी मस्जिद विवाद के बाद अब ईदगाह मस्जिद को निशाना बनाया जा रहा है। समुदाय के नेताओं ने प्रशासन से अपील की है कि मस्जिद को बचाया जाए और सड़क निर्माण के लिए नए वैकल्पिक रास्ता खोजा जाए।
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रशासन फिलहाल मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की कोशिश कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि विकास कार्य और धार्मिक भावनाओं दोनों का सम्मान किया जाएगा।
गौरतलब है कि अयोध्या पहले ही राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद के विवाद से गुजर चुकी है। राम मंदिर निर्माण के बाद शहर का माहौल बेहद संवेदनशील है। ऐसे में ईदगाह मस्जिद का नया विवाद धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर असर डाल सकता है।
ईदगाह मस्जिद को लेकर उठे विवाद के बाद अयोध्या में सड़क चौड़ीकरण का मुद्दा अब केवल विकास का नहीं, बल्कि धार्मिक पहचान और सामाजिक संतुलन का प्रश्न बन गया है। प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह विकास और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन कैसे बनाए।

