बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए 12 हिंदू शरणार्थियों को आखिरकार CAA के तहत भारतीय नागरिकता मिल गई है। लंबे इंतजार और अनिश्चितता के बाद उन्हें कानूनी पहचान प्राप्त हुई है।
बांग्लादेश से सालों पहले अपने धर्म और पहचान पर हुए हमलों के कारण भारत आए हिंदू शरणार्थियों के लिए बड़ा राहत भरा दिन आया है। पश्चिम बंगाल के विभिन्न सीमावर्ती इलाकों में बसे इन लोगों को Citizenship Amendment Act (CAA) के तहत 12 लाभार्थियों को नागरिकता प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं।
ये वे परिवार हैं जो बिना घर, बिना जमीन और बिना किसी दस्तावेज के केवल इस विश्वास के साथ सीमा पार आए थे कि भारत ही उनका सुरक्षित घर है।
They crossed the border with nothing but the clothes on their bodies.
— Akhilesh Mishra (@amishra77) November 29, 2025
No home. No land. No papers. Only faith that India was their motherland.
Persecuted in East Bengal for their religion and identity, thousands of Hindu families fled to India with fear in their hearts and… pic.twitter.com/k1MDnAMpRm
पिछले दो महीनों में राज्य के नादिया और कूच बिहार जैसे जिलों में CAA सहायता केंद्रों के माध्यम से आवेदनों की प्रक्रिया पूरी की गई। दस्तावेजों की जाँच के बाद प्रशासन ने इन शरणार्थियों को आधिकारिक तौर पर भारतीय नागरिकता प्रदान की। इसमें विशेष रूप से मातुआ और ठाकुरबाड़ी समुदाय के परिवार शामिल हैं, जो लंबे समय से पहचान और अधिकारों के अभाव में असुरक्षा में जी रहे थे।
सरकार का कहना है कि यह नागरिकता किसी उपकार के रूप में नहीं, बल्कि सालों से लंबित न्याय के रूप में दी गई है। नागरिकता प्रमाण पत्र मिलने के बाद लाभार्थियों ने राहत व्यक्त की और कहा कि अब उन्हें न तो अपनी पहचान साबित करनी पड़ेगी, न ही भविष्य को लेकर भय में जीना होगा।
Nadia, West Bengal: A resident of Palpara in Chakdaha Municipality has been granted Indian citizenship.
— IANS (@ians_india) November 29, 2025
The individual is extremely happy to receive the citizenship certificate and expressed gratitude to the Government of India pic.twitter.com/1zwYN1m75g
2019 के बाद नागरिकता से जुड़े नियमों में बदलाव और 2024 में जारी प्रमाणपत्र वितरण अभियान के तहत यह नागरिकता सौंपी गई। प्रमाणपत्र प्राप्त करते हुए व्यक्ति ने कहा कि अब उन्हें अपने अस्तित्व या पहचान साबित करने का भय नहीं रहेगा। सरकार ने इसे पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए उत्पीड़ित हिंदुओं के लिए किए गए वादे की पूर्ति बताया है।

