आम आदमी पार्टी की गुजरात ईकाई के प्रमुख इसुदान गढ़वी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में इसुदान PM मोदी को ‘नॉन-हिंदू’ होने का सर्टिफिकेट देते हुए यह दावा कर रहे हैं कि मोदी सरकार गायों और गौ वंशों को काटकर उनका मीट विदेश में एक्सपोर्ट करती है।
हालाँकि, समझदार लोग हमेशा कहते हैं कि कोई भी स्पीच या स्टेटमेंट देने से पहले एक बार पढ़ना जरूरी है। आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं और उनके समर्थकों को इससे बाहर रखा गया है क्योंकि उन्हें प्रोपेगैंडा चलाने में दिलचस्पी है।
इसुदान गढ़वी वीडियो में कह रहे हैं, “मैं नरेंद्र मोदी को यह भी बताना चाहता हूं कि मैं उन्हें हिंदू नहीं मानता। मैं पब्लिकली कह रहा हूं कि मैं उन्हें हिंदू नहीं मानता। क्योंकि जो आदमी गायों को स्लॉटरहाउस भेजता है, उनका मीट एक्सपोर्ट करता है, उससे कमाता है और उस इनकम से मोटी कमाई करता है, वह हिंदू नहीं हो सकता।”
इसके साथ ही उन्होंने BJP कार्यकर्ताओं को भड़काने की भी कोशिश की। उन्होंने कहा कि BJP वर्कर्स को प्रायश्चित करना चाहिए क्योंकि जिस कमल का वे उद्घाटन करने जाते हैं, वह गाय के मीट से बना है।
मेरा राम किसी की मस्जिद तोड़कर बनाए मंदिर में नहीं बस सकता.
— Aaditya. (@DrAadityaMehta) December 1, 2025
– #ArvindKejriwal n His Nani
में नरेंद्र मोदी को हिंदू नहीं मानता.
– #IsudanGadhvi
जैसा गुरु .. वैसा चेला.! pic.twitter.com/FE0iDOQjZn
इसुदान गढ़वी के इस वीडियो की तारीख के बारे में कोई पक्की जानकारी सामने नहीं आई है। एक बात बिल्कुल साफ है कि इस वीडियो में कई झूठे दावे किए गए हैं। आम आदमी पार्टी के नेता साफ-साफ कहते दिख रहे हैं कि नरेंद्र मोदी बीफ का निर्यात करते हैं और उसे विदेश भेजते हैं। हालाँकि, फैक्ट्स के हिसाब से उनके ये दावे पूरी तरह बेबुनियाद और बेतुके हैं। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
भारत में गाय की हत्या और बीफ एक्सपोर्ट पर बैन
सबसे पहले मूल बात समझ लेते हैं। भारत में ‘गाय की हत्या’ कोई आम कमर्शियल काम नहीं है बल्कि इसे संवैधानिक स्तर पर रोका गया है। भारतीय संविधान के नीति निर्देशक तत्वों के अनुच्छेद 48 में राज्यों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वे गायों और गौ वंश की हत्या पर रोक लगाने के लिए कदम उठाएँ।
इसी संवैधानिक निर्देश के आधार पर आज भारत में गायों और गौ वंश (बैल, बछड़ों आदि) की हत्या पर कानूनी प्रतिबंध है। हाल ही की एक रिपोर्ट के अनुसार, कई राज्यों ने अलग-अलग स्तर पर कानून बनाकर गाय की हत्या पर पूरी तरह रोक लगा दी है। गुजरात, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में गायों और गौ वंश की हत्या पूरी तरह प्रतिबंधित है।
गुजरात में, जहाँ से इसुदान गढ़वी स्वयं राजनीति करते हैं, वहाँ बॉम्बे एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट और उसके 2011 तथा 2017 के संशोधन न केवल गाय, बछड़ों और बैलों की हत्या को पूरी तरह प्रतिबंधित करते हैं बल्कि 2017 के संशोधन के बाद अवैध गौ-हत्या के लिए आजीवन कारावास का प्रावधान भी है। हाल ही में अमरेली की एक अदालत ने अवैध गौ-हत्या के एक मामले में तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
इसुदान गढ़वी का आरोप मुख्य रूप से दो बातों पर आधारित है: भारत ‘बीफ निर्यात’ में दुनिया के अग्रणी देशों में से एक है। उन्होंने सीधे ‘बीफ’ को ‘गौमांस’ कह दिया और फिर उसे मोदी सरकार की ‘गौ-हत्या नीति’ बना दिया। विदेशी व्यापार नीति और DGFT (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ फ़ॉरेन ट्रेड) के निर्यात नीति दस्तावेजों में साफ लिखा है कि बीफ (गाय, बैल और वील) के निर्यात पर प्रतिबंध है और इसके निर्यात की कोई अनुमति नहीं दी जाती।
यही बात संसद में बार-बार दोहराई गई है। 14 मार्च 2016 को लोकसभा में ‘EXPORT OF BEEF’ पर पूछे गए एक सवाल के लिखित उत्तर में तत्कालीन कॉमर्स राज्य मंत्री (निर्मला सीतारमण) ने कहा था, “वर्तमान विदेश व्यापार नीति के अनुसार बीफ (गाय, बैल और वील का मांस) के निर्यात पर प्रतिबंध है। केवल भैंस, बकरा और मटन के निर्यात की अनुमति है और आँकड़ों में इन्हें ही बीफ़ माना जाता है।”
2015, 2017, 2019 और 2020 में भी सरकार ने अलग-अलग सवालों के जवाब में यही बात दोहराई है कि बीफ, वील यानी गाय-बीफ निर्यात नीति में ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में है जबकि निर्यात में केवल भैंस, बकरे और मटन के कानूनी व्यापार की ही अनुमति है।
इसुदान गढ़वी जैसे अन्य विपक्षी नेता और ध्रुव राठी जैसे कई यूट्यूबर दावा करते हैं कि ‘भारत दुनिया का सबसे बड़ा बीफ निर्यातक है’। आँकड़ों के स्तर पर यह आंशिक रूप से सही है लेकिन यहाँ भाषा और डेफिनिशन की एक ट्रिक है। भारत की एपीडा (APEDA) की आधिकारिक वेबसाइट और रेड मीट मैनुअल में साफ लिखा है कि भारत केवल deboned & deglanded frozen buffalo meat का निर्यात करता है। गाय का मांस नहीं बल्कि भैंस का मांस जिसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कैराबीफ (carabeef) कहा जाता है।
भारत में जो ‘बीफ निर्यात’ के आँकड़े दिखते हैं, वे गाय-बीफ नहीं बल्कि भैंस के मांस के हैं। कानूनी रूप से गाय का मांस निर्यात सूची में है ही नहीं, इसलिए ‘मोदी गाय कटवा कर बीफ बेच रहे हैं’ जैसा दावा पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना और बेबुनियाद साबित होता है।
‘बीफ’ शब्द का भ्रम
अब एक और भ्रम देखिए- ‘बीफ’ शब्द की चालाकी। आम लोग बीफ का मतलब सिर्फ गौमांस समझते हैं। भारतीय कानून और FSSAI की आधिकारिक परिभाषा में ऐसा नहीं है। FSSAI के अनुसार, बीफ का मतलब बोवाइन जानवरों के खाने योग्य हिस्से से है, जिसमें भैंस भी शामिल है। (Beef is the edible portion of bovine animals (including buffaloes).
इसलिए कानूनी भाषा में ‘बीफ’ में गाय और भैंस दोनों का मांस शामिल होता है। अंतरराष्ट्रीय आँकड़े (UN, FAO) भी ‘Beef’ की श्रेणी में गाय और भैंस के मांस में अंतर नहीं करते। परिणामस्वरूप, भारत 100% भैंस का मांस (carabeef) निर्यात करता है, जो ग्राफ में ‘Beef Export’ के रूप में दिखाया जाता है।
और फिर राजनीति में, इन्हीं आँकड़ों को ‘बीफ’ कहकर प्रचार करने में उपयोग किया जाता है। इसुदान भी इसी प्रचार को हवा देने का काम कर रहे हैं। संक्षेप में, शॉर्ट में, शब्दों की यह चालाकी लोगों की भावनाओं से खेल रही है।
एक नेता (AAP के) का बयान है, जो जानबूझकर इन सभी तथ्यों को नजरअंदाज करके सीधे इस नतीजे पर पहुँच जाता है कि ‘मोदी हिंदू नहीं हैं, क्योंकि वे बीफ एक्सपोर्ट करते हैं’। राजनीति में आरोप–प्रत्यारोप होते रहते हैं, लेकिन जब कोई नेता गौमाता जैसी संवेदनशील भावना को निशाना बनाकर अधूरी सच्चाई के आधार पर पूरी बहस खड़ी करता है, तो उसे राजनीति नहीं बल्कि साफ-साफ ‘प्रोपेगैंडा’ कहा जाता है।
जहाँ तक ‘हिंदू होने या न होने का सर्टिफिकेट’ का सवाल है, तो इसुदान गढ़वी को गोपाल इटालिया के पुराने कामों और बयानों को देखना चाहिए, केजरीवाल के राम मंदिर पर दिए गए बयानों को देखना चाहिए। मोदी को ‘हिंदू न मानने’ से असलियत नहीं बदलेगी। आज देश में करोड़ों हिंदू PM मोदी के साथ खड़े हैं और इसका कारण भी हिंदुओं की आस्था है।


