झूठे मामले सिर्फ कागज पर दर्ज शब्द नहीं होते, ये पूरी जिंदगी और परिवार को तोड़ देते हैं। एक बार कोई झूठा केस लग जाए, तो आदमी टूट जाता है, परिवार दुखी हो जाता है और इंसान का आत्मविश्वास खत्म हो जाता है। लेकिन समाज अक्सर इस दर्द को नहीं देख पाता।
कल गुरुवार (12 दिसंबर 2025)को संसद में माननीय रवि किशन जी ने इस मुद्दे को उठाया। यह सिर्फ कानूनी बहस नहीं थी, बल्कि उन दर्दनाक हकीकतों की बात थी जिनका सामना हमारे समाज के पुरुष कर रहे हैं।
— Ravi Kishan (@ravikishann) December 12, 2025
बेंगलुरु के इंजीनियर अतुल सुभाष ने अपने वीडियो और नोट में बताया कि कैसे परिवार और कानूनी दबाव ने उसे तोड़ दिया और उसने खुदकुशी कर ली। वही दिल्ली के व्यवसायी पुनीत खुराना ने भी तनाव और मानसिक दबाव के कारण अपनी जान दे दी। आगरा के मानव शर्मा ने अपने वीडियो में परिवार और मानसिक उत्पीड़न की बातें बताईं और खुदकुशी कर ली।
नितिन पडियार और विष्णु तिवारी के मामले भी यही दिखाते हैं कि झूठे आरोप कैसे इंसान की पूरी दुनिया उजाड़ देते हैं। बात करे मेरठ के सौरभ राजपूत केस की तो वो और भी दर्दनाक है, जहाँ परिवार और पत्नी के गलत कामों के कारण उसकी जान चली गई। ये सिर्फ खबरें नहीं हैं, ये उन परिवारों की पीड़ा हैं जो टूट चुके हैं, उन लोगों की जिंदगी हैं जो न्याय के लिए लड़ते रहे और अंत में हार गए।
मैं, बरखा त्रेहान, पुरुष आयोग NGO की अध्यक्ष, पिछले एक दशक से अधिक समय से इन दर्दनाक कहानियों को सामने ला रही हूँ। मैंने देखा है कि कैसे निर्दोष पुरुष न्याय की उम्मीद में टूटते हैं, परिवार बिखरता है और समाज उन्हें गलत समझता है।
मैं दिल से रवि किशन जी का धन्यवाद करती हूँ जिन्होंने इस मुद्दे को संसद में उठाया। यह सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि उन लाखों नामहीन पुरुषों की आवाज थी जो चुपचाप पीड़ा झेल रहे हैं। मैं उन सभी कार्यकर्ताओं, समर्थकों और परिवारों का भी आभार व्यक्त करती हूँ जिन्होंने मेरे काम पर भरोसा किया और मेरे संघर्ष में साथ दिया।
अब समय है कि सरकार सख्त कानून, तत्काल कार्रवाई और निष्पक्ष जवाबदेही सुनिश्चित करे। और इसमें प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत के संकल्प के अनुसार कदम उठाना बहुत जरूरी है, ताकि हर निर्दोष पुरुष को न्याय मिले। मैं वादा करती हूँ, जब तक हर निर्दोष पुरुष को न्याय नहीं मिलता, मैं उसकी आवाज बनकर खड़ी रहूँगी।

