बांग्लादेश के कट्टरपंथी और भारत-विरोधी नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के मामले में पुलिस ने जाँच और तेज कर दी है। जाँच एजेंसियों ने हत्या के मुख्य आरोपित की पहचान फैसल करीम मसूद के तौर पर कर ली है और उसके विदेश जाने पर रोक लगा दी गई है।
साथ ही, देशभर में उसकी तलाश के लिए अभियान शुरू कर दिया गया है और लुक आउट नोटिस जारी किया गया है। इस बीच, हादी की मौत के बाद बांग्लादेश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन भी जारी हैं।
ढाका की एक अदालत ने रविवार (21 दिसंबर 2025) को इस हत्याकांड के मुख्य आरोपित फैसल करीम मसूद के देश छोड़ने पर रोक लगा दी है। मसूद को उस गोलीबारी का मुख्य संदिग्ध माना जा रहा है, जिसमें शरीफ उस्मान हादी की मौत हो गई थी। पुलिस ने मसूद और अन्य संदिग्ध हमलावरों के खिलाफ गिरफ्तारी नोटिस भी जारी कर दिया है।
सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, फैसल करीम मसूद के अब भी बांग्लादेश के भीतर ही होने की आशंका है लेकिन गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपना ठिकाना बदल रहा है। उसे पकड़ने के लिए कई विशेष टीमों को लगाया गया है और कई जिलों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
बांग्लादेश का दावा: हत्यारे भारत भागे
हादी की हत्या की जाँच कर रहे लोगों द्वारा यह दावा किया गया है कि गोलीबारी के तुरंत बाद हमलावर भारत भाग गए। हालाँकि, जाँच एजेंसियों ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि आरोपितों के देश छोड़ने की कोई पुख्ता जानकारी उनके पास नहीं है
मीडिया रिपोर्ट में जाँच करने वाली टीम के सूत्र के हवाले से दावा किया गया है कि फैसल करीम मसूद और एक अन्य आरोपित मोहम्मद आलमगीर शेख मयमनसिंह के हालुआघाट इलाके से एक सुनसान सीमा मार्ग के जरिए भारत के मेघालय राज्य में दाखिल हुए। बताया गया है कि उन्हें इस दौरान मानव तस्करी नेटवर्क की मदद मिली। आरोप है कि फैसल ने बेहद नजदीक से गोली चलाई थी जबकि आलमगीर मोटरसाइकिल चला रहा था।
जाँचकर्ताओं का दावा है कि हमले के बाद दोनों आरोपितों ने कई बार वाहन बदले और ढाका के अलग-अलग इलाकों से होते हुए मयमनसिंह पहुँचे, जिसके बाद अगले दिन तड़के सीमा पार कर ली।
हालाँकि, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बांग्लादेश पुलिस के अतिरिक्त महानिरीक्षक (एआईजी) खंदाकर रफीकुल इस्लाम ने कहा कि फैसल के देश छोड़ने को लेकर कोई पुख्ता सबूत नहीं है। उन्होंने कहा, “हमें ऐसी कोई विश्वसनीय जानकारी नहीं मिली है जिससे यह साबित हो कि वह सीमा पार कर चुका है।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि आरोपित अक्सर जाँच को भटकाने के लिए अफवाहें फैलाते हैं।

