महात्मा बुद्ध की अस्थियाँ, सोने के गहने और प्राचीन सामान: PM मोदी ने पिपरहवा अवशेषों की प्रदर्शनी का दिल्ली में किया उद्घाटन, कहा- यह पूरी मानवता की साझा धरोहर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (3 जनवरी 2025) की सुबह 11 बजे दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपरहवा अवशेषों की ग्रैंड इंटरनेशनल एग्जीबिशन का उद्घाटन किया। इस ऐतिहासिक प्रदर्शनी का नाम ‘प्रकाश और कमल: जागृत व्यक्ति के अवशेष’ रखा गया, जिसमें भगवान बुद्ध से जुड़ी दुर्लभ और पवित्र धरोहरों को जनता के सामने प्रदर्शित किया गया।

उद्घाटन से पहले सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने संस्कृति और बौद्ध धर्म में रुचि रखने वाले लोगों से इस प्रदर्शनी को देखने की अपील की थी। यह आयोजन न केवल धार्मिक बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रदर्शनी में पिपरहवा के वे पवित्र अवशेष शामिल किए गए, जो उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में स्थित पिपरहवा स्थल की खुदाई के दौरान प्राप्त हुए थे। मान्यता है कि इनमें भगवान बुद्ध की अस्थियाँ (धातु अवशेष) और उनसे संबंधित प्राचीन वस्तुएँ शामिल हैं, जिन्हें उनके महापरिनिर्वाण के बाद अलग-अलग स्थानों पर संरक्षित किया गया था।

इसके अलावा नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय और कोलकाता के भारतीय संग्रहालय में सुरक्षित महत्वपूर्ण पुरातात्विक सामग्री भी इस एग्जीबिशन का हिस्सा बनी।

कब मिले थे अवशेष

बता दें कि उत्तर प्रदेश के पिपरहवा (कपिलवस्तु क्षेत्र) में वर्ष 1898 के दौरान हुई खुदाई में भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र अवशेष प्राप्त हुए थे। यह खुदाई ब्रिटिश शासनकाल में कराई गई थी, जिसका नेतृत्व तत्कालीन ब्रिटिश इंजीनियर डब्ल्यू. सी. पेपे ने किया था। उस समय इन अवशेषों को भारत से बाहर भेज दिया गया था। अब ये अवशेष भारत वापस लाए गए हैं और दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में आयोजित ‘भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेष’ प्रदर्शनी में रखे गए हैं।

क्या बोले पीएम मोदी

इस प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया और सभी प्राचीन वस्तुएँ भी देखीं। पीएम बोले- भगवान बुद्ध का ज्ञान किसी एक देश या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पूरी मानवता की साझा धरोहर है। बीते कुछ महीनों में यह भाव स्पष्ट रूप से देखने को मिला, जब बुद्ध के पवित्र अवशेष विभिन्न देशों में प्रदर्शित किए गए।

उन्होंने कहा कि जिन देशों में ये अवशेष पहुँचे, वहाँ श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ उमड़ पड़ी। थाईलैंड में इन अवशेषों के दर्शन के लिए 40 लाख से अधिक लोगों ने उपस्थिति दर्ज कराई। मंगोलिया में हजारों श्रद्धालु घंटों तक कतार में खड़े रहे। कई लोग भारतीय प्रतिनिधियों को केवल इसलिए स्पर्श करना चाहते थे क्योंकि वे बुद्ध की भूमि भारत से आए थे। रूस में भी लाखों लोगों ने इन अवशेषों के दर्शन किए।