दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार (7 जनवरी 2026 ) को दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को शाही जामा मस्जिद के आस पास मौजूद अवैध निर्माण को हटाने के लिए सर्वे करने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने MCD को सर्वे करने के लिए दो महीने का वक्त दिया है।
कोर्ट के कहा, ” MCD इस पिटीशन पर विचार करें और उनमें दिए गए बयानों को वेरिफाई करें और 2 महीने में सर्वे करें। अगर कोई गैर-कानूनी कंस्ट्रक्शन पाया जाता है, तो कानून के तहत उचित कार्रवाई भी की जाएगी।”
यह आदेश एक पीआईएल पर दिया गया है। पीआईएल में MCD के पब्लिक पार्कों में अतिक्रमण और जामा मस्जिद के आसपास अवैध निर्माण को हटाने की माँग की गई थी। इसमें कहा गया है कि सार्वजनिक जमीन पर गैर-कानूनी पार्किंग स्पॉट, हॉस्पिटल, फेरीवाले और कमर्शियल स्टॉल हैं।
याचिका में क्या कहा गया?
याचिका में कहा गया है कि मस्जिद के आसपास की खुली जगहों पर शाही इमाम और उनके रिश्तेदारों ने अवैध निर्माण कर लिया है। कई कोल्ड ड्रिंक की दुकानें और पेड वॉशरूम भी थे।
याचिका के साथ में अवैध निर्माण वाली तस्वीरें भी लगाई गई हैं। हालाँकि कोर्ट ने कहा कि इन तस्वीरों के आधार पर कोई पक्की राय नहीं बनाई जा सकती और MCD को मामले को देखने का निर्देश दिया।
जामा मस्जिद दिल्ली वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी के कंट्रोल में है और शाही इमाम मस्जिद के ऊपर छत पर कैफे चलाकर वक्फ प्रॉपर्टी का कमर्शियल इस्तेमाल नहीं कर सकते। याचिका के मुताबिक, “इमाम, उनका परिवार और करीबी लोग मस्जिद का इस्तेमाल प्राइवेट इनकम सोर्स के तौर पर कर रहे हैं, जो धार्मिक पवित्रता, ASI हेरिटेज प्रोटेक्शन नॉर्म्स और दिल्ली म्युनिसिपल एक्ट का उल्लंघन है।”

