लैंड फॉर जॉब घोटाले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटों तेज प्रताप यादव व तेजस्वी यादव, बेटी मीसा भारती और हेमा यादव समेत परिवार के सदस्यों के खिलाफ आरोप तय कर दिए। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि लालू परिवार ने क्रिमिनल सिंडिकेट की तरह काम किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने कुल 98 आरोपितों में से 52 को सबूतों के अभाव में आरोपमुक्त कर दिया। पाँच आरोपितों की मृत्यु हो चुकी है, इसलिए अब 41 आरोपितों पर मुकदमा चलेगा। अगली सुनवाई 29 जनवरी 2026 को होगी।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोप गंभीर हैं और विस्तृत ट्रायल की जरूरत है। कोर्ट के मुताबिक, लालू प्रसाद यादव ने अपने पद का दुरुपयोग कर पत्नी और बच्चों के नाम पर अचल संपत्तियाँ जुटाईं। अन्य आरोपितों ने इस आपराधिक षड्यंत्र में सक्रिय सहयोग किया।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि रेलवे में नौकरियों के बदले जमीन लेने का एक तरह का विनिमय सिस्टम चल रहा था। कई लोगों को रेलवे में नौकरी दी गई और बदले में उनकी या उनके परिजनों की जमीन ली गई।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने आगे कहा, “लालू परिवार ने क्रिमिनल सिंडिकेट की तरह काम किया। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार आपराधिक षड्यंत्र का हिस्सा थे, जबकि अन्य आरोपितों ने इस षड्यंत्र को अंजाम देने में मदद की।”
आरोप भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) और 13(1)(डी) के तहत तय किए गए हैं।
यह मामला उस दौर का है जब लालू प्रसाद यादव यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल में ग्रुप डी नियुक्तियों के बदले उम्मीदवारों या उनके रिश्तेदारों से जमीन ली गई और बाद में ये जमीनें लालू परिवार के नाम ट्रांसफर कर दी गईं।

