इतिहासकार और लेखक आभास मालदहियार का ‘भोपाल लिट फेस्ट’ में तय सत्र कैंसिल कर दिया गया। आभास ने बताया कि ऐसा उनके ऊपर झूठे दावों के चलते हुआ, जिसमें कहा गया कि उन्होंने मुगल तानाशाह बाबर की तारीफ की थी। ‘बाबर: द क्वेस्ट फॉर हिंदुस्तान’ किताब लिखने वाले आभास मालदहियार भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने वाले थे।
रविवार (11 जनवरी 2026) को आभास मालदहियार ने इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ओपन लेटर लिखते हुए एक्स पर एक पोस्ट किया। पोस्ट में उन्होंने बताया कि ‘स्वदेश’ नाम के एक अखबार ने उनके खिलाफ मानहानिकारक रिपोर्ट छापी और झूठा दावा किया कि उन्होंने मुगल तानाशाह की तारीफ की है।
आभास ने आगे बताया कि उन्हें कुछ संगठनों से उनके बुकस्टोर में तोड़फोड़ करने और किताब जलाने की धमकियाँ भी मिली थीं। इसके साथ ही आभास ने मध्य प्रदेश के संस्कृति मंत्रालय और साहित्य अकादमी के डायरेक्टर की प्रतिक्रिया पर भी नाराजगी जताई।
I had no option but to write this open letter to the Hon’ble Prime Minister, @narendramodi ji.
— Aabhas Maldahiyar 🇮🇳 (@Aabhas24) January 11, 2026
My scheduled session on my new book, Babur: The Quest for Hindustan, at the @bhopal_lit_fest 2026 was cancelled after the newspaper Swadesh published false and defamatory reports… pic.twitter.com/GnVWkkJNy6
आभास ने एक्स पोस्ट में लिखा,”यह मध्य प्रदेश के संस्कृति मंत्रालय की कार्यप्रणाली और बौद्धिक ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जहाँ साहित्यिक कृतियों का मूल्यांकन उन्हें पढ़े बिना किया जा रहा है।”
उन्होंने आगे लिखा, ” मैं सत्र का विरोध करने वाले सभी लोगों को, जिसमें ऊपर उल्लेखित व्यक्ति और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी भी शामिल हैं। उनको खुले तौर पर चुनौती देता हूँ कि वे मेरी किताब का एक भी ऐसा पन्ना दिखाएँ जहाँ बाबर का महिमामंडन किया गया हो। इसके विपरीत, इस कृति की पहले वामपंथ के कुछ वर्गों द्वारा बाबर की आलोचना करने के कारण आलोचना की जा चुकी है।”
इतिहासकार ने कहा कि उनका उद्देश्य ‘भोपाल वसीयतनामा’ के उस प्रचार को नष्ट करना है, जिसमें मुगल अत्याचारी बाबर को हिंदुओं के प्रति सहिष्णु दिखाया गया है।
आभास ने दुख जताते हुए कहा, “सत्र को रद्द करके खुद को इस मुद्दे का रक्षक बताने वाले लोगों ने उसी भोपाल पर एक बड़े मार्क्सवादी झूठ को उजागर करने का मौका नष्ट कर दिया, जहाँ से वह पैदा हुआ था। अगर उन्हें सच में ऐतिहासिक सत्य की परवाह होती, तो वे इस जाली दस्तावेज को बहुत पहले ही चुनौती दे चुके होते। लेकिन भावनाओं की रक्षा के नाम पर उन्होंने विद्वतापूर्ण प्रयास को जानबूझकर नुकसान पहुँचाया।”
उन्होंने आगे कहा, “यह किताब उन बहुत कम कृतियों में से एक है जो प्राथमिक स्रोतों के आधार पर साफतौर पर साबित करती है कि तैमूरी, जिन्हें गलत तरीके से मुगल कहा जाता है, कभी भी हिंदुस्तान को अपनी मातृभूमि नहीं मानते थे और हमेशा समरकंद को ही अपना असली केंद्र समझते थे।”
आभास मालदहियार ने पीएम मोदी से मदद की अपील करते हुए कहा, “मुझे पूरी उम्मीद है कि आप इस विषय पर ध्यान देंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि जो लोग इतिहास और सभ्यता के अध्ययन को अपना जीवन समर्पित करते हैं,अक्सर मेरी तरह वास्तुकला जैसे कठिन पेशे के साथ:उन्हें उन लोगों द्वारा रोका न जाए जो शोर और बाधा डालने के अलावा बहुत कम योगदान देते हैं और जिस उद्देश्य की रक्षा का दावा करते हैं, उसी के रास्ते में रुकावट बनते हैं।”

