हिन्दुओं पर अत्याचार को सांप्रदायिक हिंसा नहीं मानती बांग्लादेश की यूनुस सरकार: रिपोर्ट कार्ड में बताया- 1 साल में 645 क्राइम हुए, लेकिन 574 नॉन-कम्युनल

बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में चल रही अंतरिम सरकार अल्पसंख्यक हिन्दुओं के खिलाफ हो रहे हिंसक घटनाओं को सांप्रदायिक हिंसा नहीं मानती है। यूनुस सरकार के ऑफिस की ओर से जारी बयान में पुलिस की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। जनवरी से दिसंबर 2025 में अल्पसंख्यकों के साथ 645 घटनाएँ हो चुकी हैं। इनमें से 71 घटनाएँ सांप्रदायिक कारण से हुई। हालाँकि रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि सालभर में करीब 3000-3500 लोग हिंसा की भेंट चढ़ गए।

दरअसल यूनुस सरकार ने अपनी पोल खुद ही खोल दी है। एक तरफ बता रहे हैं कि सालभर में सिर्फ 645 घटनाएँ हुई, वही मौत का आँकडा 3500 बताया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2025 में बांग्लादेश में हुए ज्यादातर क्राइम नॉन-कम्युनल और कॉमन क्राइम के थे और ज्यादातर क्राइम का धर्म या संप्रदाय से कोई कनेक्शन नहीं था।

यूनुस सरकार का मानना है कि हर घटना चिंता का विषय है लेकिन आंकड़ों से सच्चाई सामने आ रही है। दरअसल इन घटनाओं में मंदिरों में 38 जगहों पर तोड़फोड़, 8 आगजनी की घटनाएँ, हत्या और चोरी की 1-1 घटनाएँ हुई हैं। इसके अलावा मूर्तियों को तोड़ने की धमकी देना और सोशल मीडिया पर पूजा स्थलों को नुकसान पहुँचाने की धमकी देने की 23 घटनाएँ हुई हैं। कुछ 50 मामलों में पुलिस ने केस दर्ज किए और करीब 50 लोगों को गिरफ्तार किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 574 मामलों का धर्म से कोई लेना देना नहीं है।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुताबिक, भूमि विवाद के 23, चोरी के 106, पुरानी रंजिश के 26 मामले, 58 रेप, अस्वाभाविक मौत के 172 मामले पिछले 1 साल में सामने आए। इनमें से करीब 390 मामलों में केस दर्ज किए गए।

बांग्लादेश की अल्पसंख्यक संगठन ने हिन्दुओं के साथ हुई हिंसा को सांप्रदायिक नहीं बताए जाने पर सवाल खड़े किए हैं। बांग्लादेश हिंदू, बौद्ध ईसाई एकता परिषद का कहना है कि अगर ये घटनाएँ सांप्रदायिक नहीं थे, तो किसने कानून को हाथ में लिया। संगठन का कहना है कि सरकार के ऐसे बयान सांप्रदायिक ताकतों को मजबूत करते हैं। संगठन ने दावा किया कि चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं।