दरअसल यूनुस सरकार ने अपनी पोल खुद ही खोल दी है। एक तरफ बता रहे हैं कि सालभर में सिर्फ 645 घटनाएँ हुई, वही मौत का आँकडा 3500 बताया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2025 में बांग्लादेश में हुए ज्यादातर क्राइम नॉन-कम्युनल और कॉमन क्राइम के थे और ज्यादातर क्राइम का धर्म या संप्रदाय से कोई कनेक्शन नहीं था।
On Incidents Affecting Minority Communities and the Broader Law and Order Situation in Bangladesh (January–December 2025)
— Chief Adviser of the Government of Bangladesh (@ChiefAdviserGoB) January 19, 2026
DHAKA, January 19: Bangladesh remains committed to confronting crime with transparency, accuracy, and resolve. A yearlong review of official police records…
यूनुस सरकार का मानना है कि हर घटना चिंता का विषय है लेकिन आंकड़ों से सच्चाई सामने आ रही है। दरअसल इन घटनाओं में मंदिरों में 38 जगहों पर तोड़फोड़, 8 आगजनी की घटनाएँ, हत्या और चोरी की 1-1 घटनाएँ हुई हैं। इसके अलावा मूर्तियों को तोड़ने की धमकी देना और सोशल मीडिया पर पूजा स्थलों को नुकसान पहुँचाने की धमकी देने की 23 घटनाएँ हुई हैं। कुछ 50 मामलों में पुलिस ने केस दर्ज किए और करीब 50 लोगों को गिरफ्तार किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 574 मामलों का धर्म से कोई लेना देना नहीं है।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुताबिक, भूमि विवाद के 23, चोरी के 106, पुरानी रंजिश के 26 मामले, 58 रेप, अस्वाभाविक मौत के 172 मामले पिछले 1 साल में सामने आए। इनमें से करीब 390 मामलों में केस दर्ज किए गए।
बांग्लादेश की अल्पसंख्यक संगठन ने हिन्दुओं के साथ हुई हिंसा को सांप्रदायिक नहीं बताए जाने पर सवाल खड़े किए हैं। बांग्लादेश हिंदू, बौद्ध ईसाई एकता परिषद का कहना है कि अगर ये घटनाएँ सांप्रदायिक नहीं थे, तो किसने कानून को हाथ में लिया। संगठन का कहना है कि सरकार के ऐसे बयान सांप्रदायिक ताकतों को मजबूत करते हैं। संगठन ने दावा किया कि चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं।

