ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के माहौल में भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान चार दिन की आधिकारिक यात्रा पर आर्मेनिया की राजधानी येरेवन पहुँचे हैं। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत ने हाल ही में आर्मेनिया को स्वदेशी गाइडेड पिनाका रॉकेट्स की पहली खेप भेजी है।
इस यात्रा को भारत-आर्मेनिया रक्षा संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है। जनरल अनिल चौहान एक उच्चस्तरीय रक्षा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और आर्मेनिया के बीच लंबे समय से विकसित हो रही रक्षा और सुरक्षा साझेदारी को और मजबूत करना है।
दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग, रणनीतिक समन्वय और भविष्य की रक्षा परियोजनाओं को लेकर बातचीत होने की संभावना है।
An Indian defence delegation led by General Anil Chauhan, Chief of Defence Staff #CDS, reached Republic of Armenia on a four days official visit on 01 Feb.
— HQ IDS (@HQ_IDS_India) February 2, 2026
The visit marks an important step in taking forward shared strategic interests and enhancing long-term defence and… pic.twitter.com/K7YPUEXMYj
पिनाका रॉकेट डील से बढ़ी भारत की रक्षा मौजूदगी
इस दौरे की अहमियत इसलिए भी है क्योंकि कुछ ही हफ्ते पहले भारत ने आर्मेनिया को गाइडेड पिनाका रॉकेट सिस्टम की पहली खेप सौंपी है। आर्मेनिया DRDO द्वारा विकसित पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम का पहला अंतरराष्ट्रीय ग्राहक बन गया है।
साल 2022 में दोनों देशों के बीच करीब 2,000 करोड़ रुपए की डील हुई थी, जिसके तहत आर्मेनिया ने चार पिनाका सिस्टम खरीदने का फैसला किया था। इससे पहले भारत अनगाइडेड रॉकेट सिस्टम की डिलीवरी भी पूरी कर चुका है। यह डील भारत के बढ़ते डिफेंस एक्सपोर्ट और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में एक बड़ा संकेत मानी जा रही है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और पाकिस्तान के लिए संदेश
आर्मेनिया की भौगोलिक स्थिति इस दौरे को और भी महत्वपूर्ण बनाती है क्योंकि देश रूस, तुर्की और ईरान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के करीब स्थित है और ईरान के साथ इसकी सीमित लेकिन रणनीतिक भूमि सीमा भी है। हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंधु’ के तहत ईरान से भारतीय नागरिकों की निकासी में भी आर्मेनिया की भूमि सीमा का उपयोग किया गया था।
वहीं आर्मेनिया और पाकिस्तान के बीच लंबे समय तक कोई औपचारिक संबंध नहीं रहे हैं। पिछले साल सितंबर में ही दोनों देशों ने कूटनीतिक रिश्ते बहाल करने की दिशा में कदम बढ़ाया था। इससे पहले पाकिस्तान आर्मेनिया से दूरी बनाए हुए था, क्योंकि मुस्लिम बहुल अजरबैजान के साथ उसके करीबी संबंध थे और अजरबैजान का आर्मेनिया से पुराना विवाद है।
इसके अलावा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान तुर्की के करीबी सहयोगी अजरबैजान ने भी भारत के खिलाफ अपनी वास्तविक सोच और मंशा को सामने ला दिया। ऐसे हालात में आर्मेनिया में भारत की नई रणनीतिक सक्रियता पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका साबित हो रही है।

