बताया जा रहा है कि मंगलवार (3 जनवरी 2026) को उन तीनों बहनों के ऑनलाइन गेम का आखिरी टास्क था। तीनों ने टास्क के तहत 9वीं मंजिल से कूद कर जान दे दी। हालाँकि इसकी पुष्टि अभी नहीं हो पाई है, क्योंकि तीनों के फोन की जाँच के बाद ही इसका खुलासा हो पाएगा।
तीनों बहनें पिछले 2 साल से स्कूल नहीं जा रही थीं। इनका पढ़ने में मन नहीं लगता था। पिता ने इसकी वजह से इन्हें डाँटा भी था। तीनों कोरियन कल्चर से काफी प्रभावित थीं। माता-पिता के विरोध के बावजूद ये तीनों मोबाइल पर लगी रहती थीं।
पिता चेतन कुमार के मुताबिक बच्चियाँ काफी वक्त से ये गेम खेल रही थीं और 3 जनवरी को इनका 50वाँ यानी आखिरी टास्क था। इस टास्क को पूरा करने के बाद इनलोगों ने मौत को गले लगा लिया। अब आखिरी टास्क के मुताबिक इन्हें 9वीं मंजिल से कूदना था या टास्क पूरा करने के बाद इनलोगों ने अपने पिता के गेम खेलने से रोकने की वजह से जान दी, ये जाँच का विषय है
बालकनी से कूद गई बच्चियाँ
अभी तक जो बात सामने आई है, इसके मुताबिक बच्चियों ने दो स्टेप वाली सीढ़ी का सहारा लिया और फिर ऊपर चढ़ कर रेलिंग के ऊपर से कूद गई। इस दौरान एक बहन ने दूसरी बहन का हाथ पकड़ा और एक को पीठ पर बैठाया और कूद गई। इन बहनों में 14 साल की प्राची इस गेम की लीडर थी। उसके निर्देश के मुताबिक बाकी दोनों बहनें काम करती थी। हमेशा तीनों साथ रहती थीं। सुसाइड से पहले इनके कमरे में फर्श पर बिखरे हुए फोटो मिले हैं।
इनलोगों ने एक पन्ने का सुसाइड नोट भी लिखा है जिसके अंत में ‘मम्मी पापा सॉरी’ लिखा है। सुसाइड नोट में कहा है कि मुझे माफ कर दो पापा, सॉरी पापा। हार्ट ब्रेक की इमेज बनाई गई है, फिर लिखा है कि ‘इस डायरी में जो कुछ लिखा है, वह सब सच है’ अभी पढ़िए। आई ए रियली सॉरी, सॉरी पापा। दिवारों पर लिखा था, ‘आई एम वेरी वेरी अलोन, मेक मी ए हार्ट ऑफ ब्रोकन।’
पुलिस गेम के कंट्रोलर यानी उस लिंक की तलाश कर रही है, जिसके सहारे इन बच्चियों को निर्देश मिल रहे थे कि कौन-सा टास्क करना है। आखिर फोन में ही वह सारे टास्क होंगे जिसका पालन इन लोगों ने किया है।
भोपाल में भी बच्चे ने दी जान
भोपाल में मोबाइल गेमिंग की लत के चलते एक 14 साल के बच्चे अंश साहू ने फाँसी लगाकर अपनी जान दे दी। परिजनों को शक है कि उसने ऑनलाइन टास्क पूरी करने के लिए फाँसी लगाई। अंश 8वीं क्लास का छात्र था और परिवार का इकलौता बेटा था। उसके माता-पिता प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते हैं।
पुलिस के मुताबिक, कुछ दिनों से वह ऑनलाइन गेम खेलने लगा था। माता-पिता ने उसे बहुत समझाया, लेकिन वह मान नहीं रहा था। वह काफी शांत बच्चा था और इनदिनों अकेले रहना पसंद करता था। 3 जनवरी 2026 को दोपहर में माता-पिता घर पर नहीं थे। उस वक्त उसने फाँसी लगा ली। वह कौन सा गेम खेल रहा था और उसकी मौत से इसका क्या संबंध है, इसकी जाँच के लिए फोरेंसिक टीम मोबाइल ले गई है।
ऑनलाइन गेमिंग का बच्चों पर असर
ऑनलाइन गेम्स जैसे पबजी, फ्री फायर और दूसरे गेम्स में बच्चों को टास्क दिया जाता है। एक के बाद एक मिल रहे टास्क को पूरा करने पर बच्चों में जोश आ जाता है। इस दौरान गेम की ऐसी लत लग जाती है कि बच्चा उन्हें पूरा करने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार रहता है। एक तरह के वह मानसिक तौर पर गेम की गिरफ्त में आ जाता है। इसे ‘गेमिंग डिसऑर्डर’ भी कहा जाता है।
इस दौरान बच्चा अपनी दिनचर्या भी भूल जाता है। पढ़ना-लिखना, खेलना-कूदना, स्कूल जाना सब कुछ वह भूल जाता है। बच्चा अकेला रहना पसंद करता है। परिजनों और दोस्तों से वह दूरी बनाने लगता है। आउटडोर गेम खेलना नहीं चाहता। परिजनों के टोकोटाकी से वह गुस्सा जाता है और उसके स्वभाव में चिढ़चिढ़ापन आ जाता है। कई बार बच्चा हिंसक भी हो जाता है।
ऑनलाइन गेमिंग के दौरान बच्चों को पता नहीं होता कि वह किसके साथ गेम खेल रहा है। ऐसे में साथ खेल रहा खिलाड़ी उसे साइबर बुलिंग का शिकार बना सकता है। कई बार दोस्ती करने की कोशिश करते हैं और विश्वास जीत कर निजी जानकारियाँ हासिल करते हैं।
इसी तरह का मामला एक्टर अक्षय कुमार ने सार्वजनिक मंच पर शेयर किया था। उनका कहना था कि उनकी बेटी को ऑनलाइन गेमिंग के दौरान न्यूड होकर फोटो खिंचने की माँग की गई थी। उन्होंने बेटी को समझाया और ऑनलाइन गेमिंग से दूर करने के लिए डॉक्टर से सलाह ली।
ऑनलाइन गेमिंग को छोड़ना इतना आसान नहीं होता, इसलिए जो इसे खेलते हैं, वे खेले बगैर नहीं रह पाते। फाइटिंग और शूटिंग वाले गेम से बच्चों में हिंसक प्रवृति बढ़ती है और इसका उनके दिमाग पर काफी बुरा असर पड़ता है। बच्चों की भाषा असभ्य भी हो जाती है। कई बार बच्चों को डराया धमकाया जाता है।
बच्चों के ‘मन की बात’ को समझना जरूरी
ऑनलाइन गेम कई तरह के होते हैं। कई गेम में दो व्यक्ति खेल रहे होते हैं तो कई गेमों में कई लोग एक साथ खेलते हैं। ऐसे गेम का इस्तेमाल बच्चों के ब्रेनवॉश करने में होता है। उन्हें पेरेंट्स से दूर करने, असामाजिक कार्यों की ओर प्रोत्साहित करने के लिए भी हो सकता है।
एक्सपर्ट के मुताबिक, बच्चों को भावनात्मक तौर पर सहारे की जरूरत होती है। पेरेंट्स से खुल कर बात नहीं कह पाना, जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम और ऑनलाइन रहना, बच्चों को गलत आदतों का शिकार बना सकता है। इसलिए बच्चों से बातचीत करने, उसे भरोसे में लेने और ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है, जिससे बच्चा खुद ब खुद अपनी बातें शेयर करे और उसे पेरेंट्स समझा पाएँ।
बच्चों को अगर गेम की लत से दूर रखना या उबारना चाहते हैं तो उसके साथ वक्त बिताएँ। उसे अकेला न छोड़े। परिवार में अनुशासन लाएँ। परिवार कम से कम एक बार एक साथ बैठकर खाना खाय, ये तय करें। बच्चे को प्रोत्साहित करें और उसके साथ बातें करें। बच्चे को अपनी बात कहने देने का पूरा मौका दें। डाँटने-डपटने की जगह उससे दोस्ताना व्यवहार करें और उसके मन की बात को समझने की कोशिश करें। पुरानी पसंदीदा चीजों से उसे जोड़ने की कोशिश करें। मोबाइल और इंटरनेट को सीमित करें। उसके साथ माता-पिता या बहन-भाई, जिससे बच्चा ज्यादा घुल मिल जाता है, वे उसके साथ खेलें। उसे दूसरी चीजों की ओर प्रोत्साहित करे।
बच्चों को मोबाइल देकर न छोड़ें, बल्कि उसकी एक्टिविटी पर नजर रखें। ऑनलाइन गेम खेलने वाले बच्चों पर तो खास तौर पर नजर रखनी चाहिए, ताकि उसके गेम का पता पैरेंट्स को हो। पैरेंट्स अपने बैंक अकाउट की जानकारी बच्चों से शेयर न करें। बच्चों को अगर पैसे देते हैं, तो ये ध्यान दें कि कहीं वह उन पैसों को गेमिंग में तो खर्च नहीं कर रहा।
कई बार बच्चे ऑनलाइन चीजों को सही मान लेते हैं। चाहे गेम में टास्क मिला हो या चैलेंज। उन्हें वह सब सही लगता है और वे उसके परिणाम को समझ नहीं पाते। भोपाल का अंश और गाजियाबाद की तीनों बहनें ऐसे ही टास्क का शिकार थे और उसके लिए उन्होंने खुदकुशी कर ली।
भारत समेत कई देशों ने ऑनलाइन गेम रोका
भारत में ‘प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025’के तहत ऑमलाइन गेमिंग पर रोक लगाई गई थी। इसके तहत सरकार ने पैसे लगाने वाले और जुए जैसे गेम, सट्टेबाजी और बेटिंग वाले गेम पर पाबंदी लगा दी। भारत के अलावा चीन में 18 साल से नीचे के बच्चों को एक दिन में सिर्फ 3 घंटे गेम खेलने की इजाजत होती है।
इसमें भी विदेशी गेम्स पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। वेनेजुएला, कंबोडिया, तुर्की, सऊदी अरब, अफगानिस्तान, मलेशिया, सिंगापुर जैसे कई देश हैं, जहाँ ऑनलाइन गेम्स खेलने को लेकर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं।
भारत में सभी ऑनलाइन गेम्स पर प्रतिबंध नहीं लगाए गए हैं। केवल पैसे वाले गेम्स पर रोक लगी है। वक्त आ गया है जब ऐसे गेम्स पर भी रोक लगे। बच्चों को गेमिंग और एडल्ट कंटेंट से दूर रखने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है। केन्द्र सरकार ने ऑनलाइन गेम्स को लेकर हेल्पलाइन नंबर 155260 जारी किया है। किसी भी तरह के साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में संपर्क करें।


