‘नॉर्थ इंडिया वाले तो टेबल साफ करते हैं’: DMK नेता और स्टालिन के मंत्री MRK पन्नीरसेल्वम ने किया उत्तर भारतीयों का अपमान, हिंदी के विरोध में पार की सारी हदें

तमिलनाडु के कृषि मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम के उत्तर भारतीयों को लेकर दिए गए बयान पर देशभर में विवाद खड़ा हो गया है। बुधवार (4 फरवरी) को शिक्षा में केंद्र सरकार के थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूले पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर भारत से आने वाले लोग कंस्ट्रक्शन लेबर का काम करते हैं, पानीपुरी बेचते हैं और टेबल साफ करते हैं, क्योंकि उन्हें केवल हिंदी आती है।

पन्नीरसेल्वम ने यह भी कहा कि तमिलनाडु में बच्चों को तमिल के साथ इंग्लिश सिखाई जाती है, इसलिए वे विदेश जाकर अच्छी नौकरियाँ करते हैं और करोड़ों कमाते हैं।

DMK सरकार तमिलनाडु के स्कूलों में हिंदी अनिवार्य करने का विरोध कर रही है। केंद्र की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी के तहत राज्य की भाषा और इंग्लिश के साथ हिंदी पढ़ाने की व्यवस्था है। स्टालिन सरकार का कहना है कि इससे बच्चों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा और राज्य में हिंदी अनिवार्य करने का कोई औचित्य नहीं है।

पन्नीरसेल्वम के बयान पर विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई। BJP सांसद गिरिराज सिंह ने कहा कि तमिलनाडु में DMK को कॉन्ग्रेस का समर्थन है, इसलिए राहुल गाँधी को इस पर जवाब देना चाहिए। JDU सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि उत्तर भारतीय जहाँ भी जाते हैं, वहाँ की अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हैं और इस बयान पर कॉन्ग्रेस को सफाई देनी चाहिए। SP सांसद अवधेश प्रसाद ने इसे घटिया और निम्न स्तर का बयान बताते हुए कहा कि यह अनेकता में एकता के सिद्धांत को कमजोर करता है।

कॉन्ग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि ऐसे बयान गैर-जिम्मेदार लोग देते हैं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु को दूसरे राज्यों से वर्क फोर्स की जरूरत होती है, इससे अर्थव्यवस्था को गति मिलती है और सभी उत्तर भारतीय यहां सुरक्षित हैं।

विवाद बढ़ने के बाद पन्नीरसेल्वम ने गुरुवार सुबह वीडियो मैसेज जारी कर कहा कि तमिलनाडु में टू-लैंग्वेज पॉलिसी पर्याप्त और सफल रही है। उन्होंने कहा कि इंग्लिश सीखने से बच्चों को वैश्विक स्तर पर करियर के ज्यादा अवसर मिलते हैं, जबकि उत्तर भारत में इंग्लिश को प्राथमिकता नहीं मिलने से शैक्षिक विकास प्रभावित होता है।