ओवैसी ने ‘मियाँ’ पर पूछे सीएम से सवाल
एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि क्या कोई नेता ऐसा कह सकता है कि ऑटो रिक्शा में कोई मियाँ ड्राइवर है तो उसे किराया पाँच रुपए की जगह चार रुपए दो। उनका कहना है कि असम में मियाँ बंगाली मुस्लिम को कहते हैं, जो 150-200 साल पहले अंग्रेजों द्वारा लाकर यहाँ बसाए गए। ये भारत के नागरिक हैं और इन्हें ऑटो के लिए 1 रुपए कम देने की बात खुद मुख्यमंत्री कह रहे हैं। उन्होंने कहा, “असम के मुख्यमंत्री, आप कितने छोटे हैं?”
"How small are you?": Owaisi attacks Assam CM Sarma over "Miya" remark
— ANI Digital (@ani_digital) February 5, 2026
Read @ANI Story | https://t.co/qwmuihQ5VE#AsaduddinOwaisi #AIMIM #HimantaBiswaSarma pic.twitter.com/ThN7SVuBkm
मियाँ शब्द पर विपक्ष बीजेपी को घेरने में लगी हुई है। राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक में कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने ये बयान समुदाय विशेष यानी मुस्लिमों को ध्यान में रख कर दिया है। कॉन्ग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मियाँ शब्द को मुख्यमंत्री पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने न तो ऐसे शब्द लिखे हैं और न ही इसे माना है।
‘मियाँ’ शब्द अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए हो रहा इस्तेमाल
दरअसल सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने खुद ही असम में प्रवासियों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि उनकी आलोचना करने वालों को असम में गैर-कानूनी माइग्रेशन पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि इस शब्द का इस्तेमाल लोकल लेवल पर बिना डॉक्यूमेंट वाले बांग्लादेशी मुस्लिम माइग्रेशन को लेकर किया गया था।
बांग्लादेश से आए हुए लोग खुद को मिया कहकर ही संबोधित करते हैं। वे मिया कविता लिखते हैं, मिया संग्रहालय की मांग करते हैं, तो अगर मैं उन्हें मिया कहकर संबोधित करूँ, तो उसमें दिक्कत क्या है। pic.twitter.com/z57lzJr94s
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) January 29, 2026
सीएम सरमा शुरुआत से ही ‘मियाँ’ शब्द को परिभाषित करते आ रहे हैं। हर बार सार्वजनिक मंच से उन्होंने कहा कि ‘मियाँ’ शब्द बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो असम में तेजी से फैल रहे हैं। असमिया संस्कृति और राज्य के साथ-साथ ये घुसपैठिए देश के लिए बड़ा खतरा हैं। इसलिए इनलोगों को असम से बाहर निकाल कर ही वे दम लेंगे।
असम में 'मिया' का मतलब बांग्लादेशी घुसपैठिया है।
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) January 31, 2026
एक नहीं, चाहे 1000 राहुल गांधी चिल्लाएँ, मैं रुकने वाला नहीं हूँ। घुसपैठियों को असम छोड़ना ही पड़ेगा। यह असम के अस्तित्व का सवाल है। pic.twitter.com/ThCw7Crtwf
मुख्यमंत्री ने इसे असम के अस्तित्व की लड़ाई बताते हुए विपक्ष को ललकारा है। उन्होंने राहुल गाँधी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि चाहे एक नहीं, बल्कि 1000 राहुल गाँधी भी चिल्लाएँ तो भी वे अपने इस अभियान से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
‘मियाँ’ लोगों को तकलीफ देना मेरा काम- हिमंता
मुख्यमंत्री ने विपक्ष और कॉन्ग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा, “कॉन्ग्रेस मुझे भले गाली दे, लेकिन मेरा काम मियाँ लोगों को तकलीफ देना है।” सीएम सरमा ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर मियाँ लोग परेशान नहीं होंगे, तो वे दुलियाजान और तिनसुकिया जैसे इलाकों में घुस आएँगे। सीएम हिमंता ने तिनसुकिया में जमीन के लेन-देन की एक लिस्ट का हवाला देते हुए चिंता जताई कि हिंदू अपनी जमीनें बेच रहे हैं और मियाँ मुसलमान उन्हें खरीद रहे हैं। सीएम ने सवाल उठाया, “अगर हम अभी सावधान नहीं हुए, तो कब होंगे?”
सीएम ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट में जो सुधार चल रहा है, उसका मकसद यही है कि मियाँ लोग वोट न दे सकें। सीएम हिमंता ने कहा, “यह तो अभी शुरुआत है। जब राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) लागू होगा, तब 4 से 5 लाख मियाँ वोटों को चुन-चुनकर लिस्ट से बाहर किया जाएगा।” उनके मुताबिक, यह ध्रुवीकरण हिंदू-मुस्लिम के बीच नहीं, बल्कि ‘असमिया बनाम बांग्लादेशी’ के बीच है, जिसमें असमिया मुसलमान उनके दुश्मन नहीं हैं।
‘आत्मसमर्पण नहीं, आखिरी दम तक लड़ेंगे’
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह एक असमिया होने के नाते कभी घुटने नहीं टेकेंगे। उन्होंने कहा कि जो लोग जनसांख्यिकीय बदलाव के आगे हार मान चुके हैं, वे आत्मसमर्पण कर दें, लेकिन वह लड़ेंगे और ध्रुवीकरण करेंगे। हिमंता बिस्वा सरमा ने साफ कर दिया कि घुसपैठियों के कारण राज्य की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान खतरे में है और इसे बचाने के लिए कड़े कदम उठाना अब वक्त की जरूरत है।
विपक्ष की आलोचनाओं के बीच हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उन्होंने बांग्लादेशियों को मियाँ नाम नहीं दिया है, बल्कि वे खुद को मियाँ कहते हैं। उन्होंने मियाँ कविता लिखी। उन्होंने कहा कि अगर बांग्लादेशी घुसपैठियों को वे मियाँ कहते हैं तो वे लोग असम के लोगों को असमिया कह सकते हैं। इसमें दिक्कत क्या है।
असम में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। असमिया अस्मिता की रक्षा और बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा अहम है, क्योंकि राज्य में घुसपैठ की समस्या से जनता त्रस्त है। मियाँ वाले नैरेटिव का काट कॉन्ग्रेस को नहीं मिल रहा है। बस वह विरोध ही जता पा रही है। वह खुल कर मुस्लिमों का समर्थन भी नहीं कर पा रही है।
असम में घुसपैठ बड़ी समस्या
असम विधानसभा में सरकार ने साल 2025 में घुसपैठियों पर पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में बताया था कि राज्य में 1971 से लेकर 2014 के बीच 47,928 घुसपैठियों की पहचान की गई है। इन लोगों को राज्य के फॉरेन ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित किया है। असम विधानसभा में मुख्यमंत्री और गृहमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बताया कि इन 47,928 विदेशी लोगों में से 27,309 मुस्लिम हैं जबकि 20613 हिन्दू हैं। यानी कुल घुसपैठियों में 56% मुस्लिम हैं।
राज्य विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, 27,309 मुस्लिम घुसपैठियों में से सबसे अधिक 4182 जोरहाट जिले में जबकि 3897 मुस्लिम गुवाहाटी शहर में पहचाने गए हैं। डिब्रूगढ़ में 2782 लोगों को मुस्लिम घुसपैठिया बताया गया है। इसके अलावा होजाई, सिवासनगर, नगांव और कछार में भी 2000 से अधिक मुस्लिम घुसपैठियों की पहचान हुई है। इसके अलावा भी असम के कई जिलों में मुस्लिम घुसपैठियों को पहचाना गया है। वहीं बाहर से आने वाले सबसे अधिक हिन्दुओं की सँख्या कछार, गुवाहाटी और लखीमपुर जैसे जिलों में हैं।
घुसपैठ से त्रस्त असम में अगर असमिया संस्कृति और परंपरा की रक्षा करनी है, तो घुसपैठियों को बाहर निकालना बेहद जरूरी है। यही वजह है कि सीएम हिमंता इस मुद्दे पर आक्रामक हैं और राज्य से लगातार घुसपैठियों को खदेड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने साफ कहा है कि असमिया पहचान बचाने के लिए अगले 30 साल तक ‘ध्रुवीकरण की राजनीति’ जारी रहेगी।


