गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित आद्यशक्ति धाम अंबाजी भारत के 51 शक्तिपीठों में विशेष स्थान रखता है। माँ अम्बा के दर्शन के लिए हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस पवित्र स्थल पर पहुँचते हैं खासकर भादरवी पूर्णिमा महा मेले के दौरान यहाँ भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा और मार्गदर्शन से गुजरात सरकार इस स्थान को विश्वस्तरीय आधुनिक और आदर्श तीर्थ स्थल बनाने के उद्देश्य से महत्वाकांक्षी शक्ति कॉरिडोर (अंबाजी-गब्बर कॉरिडोर) प्रोजेक्ट शुरू कर रही है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस परियोजना का शिलान्यास किया है।
इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 1,632 करोड़ रुपए है जिसमें से विकास कार्यों के पहले चरण के लिए 950 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। यह दूरदर्शी मास्टर प्लान अगले 25 वर्षों तक श्रद्धालुओं की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इस परियोजना को गुजरात पवित्र यात्रा धाम विकास बोर्ड और अरासुरी अंबाजी माता देवस्थान ट्रस्ट के सहयोग से किया जा रहा है।
अंबाजी शक्ति कॉरिडोर प्रोजेक्ट के पहले फेज की रखी गई नींव
अंबाजी शक्ति कॉरिडोर परियोजना के प्रथम चरण का शिलान्यास 7 फरवरी 2026 को ऐतिहासिक समारोह में किया गया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने आद्यशक्ति धाम अंबाजी पहुँचने के बाद सबसे पहले माता अम्बा के दर्शन किए। इसके बाद उन्होंने औपचारिक रूप से 950 करोड़ रुपए की लागत से होने वाले विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास किया। यह समारोह अंबाजी के मुख्य मंदिर परिसर में आयोजित हुआ जिसमें श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों, अधिकारियों और राजनीतिक प्रतिनिधियों की भी उपस्थिति रही।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल हेलीकॉप्टर से अंबाजी के निकट चिखला हेलीपैड पर उतरे और वहाँ से सीधे मंदिर परिसर पहुँचे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह परियोजना PM मोदी की प्रेरणा और मार्गदर्शन में ‘विकास भी विरासत भी’ के मंत्र को अपनाते हुए लागू की जा रही है। उन्होंने बताया कि अगले 25 वर्षों तक श्रद्धालुओं की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया यह दूरदर्शी मास्टर प्लान अंबाजी को विश्वस्तरीय तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करेगा।
प्रथम चरण में पूरे किए जाने वाले काम
प्रथम चरण में 950 करोड़ रुपए की लागत से होने वाले ये कार्य कुल 1,632 करोड़ रुपए की मेगा परियोजना का हिस्सा हैं, जिसे दो चरणों में लागू किया जाएगा। इस चरण का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और आध्यात्मिक अनुभव को और बेहतर बनाना है। इसके तहत मल्टी-लेवल पार्किंग का निर्माण किया जाएगा, जिससे वाहनों की आवाजाही और यातायात जाम को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकेगा।
इसके अलावा अंडरपास सड़कें और पैदल मार्ग बनाए जाएँगे जिससे श्रद्धालुओं को सड़क पार करने में सुरक्षित और सहज सुविधा मिलेगी। परियोजना के अंतर्गत आधुनिक तीर्थयात्री आवास का निर्माण किया जाएगा जिसमें आरामदायक ठहरने की व्यवस्था, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाएँ शामिल होंगी। दिव्य दर्शन चौक का निर्माण किया जाएगा जहाँ श्रद्धालुओं को विशेष दर्शन और आध्यात्मिक माहौल मिलेगा।
शक्तिपथ का निर्माण भी किया जाएगा जो लगभग 2.5 किलोमीटर लंबा भव्य मार्ग होगा और मुख्य मंदिर को गब्बर पर्वत तथा मानसरोवर से जोड़ेगा। परियोजना के अंतर्गत एक एम्फीथिएटर का निर्माण किया जाएगा जहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रम, गरबा, मेले और अन्य आयोजनों का आयोजन किया जा सकेगा। इसके अलावा लाइट एंड साउंड शो को उन्नत और विस्तारित किया जाएगा जो गब्बर पर्वत पर देश का सबसे बड़ा शो बनेगा और इसमें पौराणिक कथाओं तथा माता जी की महिमा दिखाई जाएगी।
इसके अतिरिक्त, इवेंट प्लाजा, सांस्कृतिक ग्राम और चाचर चौक का तीन गुना विस्तार किया जाएगा जिसके जरिए मेलों और परिक्रमा के लिए अधिक स्थान उपलब्ध हो सके। आध्यात्मिक गैलरी, पौराणिक भित्तिचित्रों और गब्बर पर्वत के लिए केबल कार यानी रोपवे को भी उन्नत किया जाएगा।
इस समारोह में राज्य मंत्री प्रवीनभाई माली, डॉ. जयरामभाई गामित, कमलेशभाई पटेल, स्वरूपजी ठाकोर, बनासकांठा जिले के विधायक, पदाधिकारी, पर्यटन सचिव कुलदीप आर्य, जिला कलेक्टर मिहिर पटेल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। समारोह के दौरान 16 फीट ऊँचे अखंड शक्ति त्रिशूल का भी अनावरण किया गया जो हिमालय की 1,500 वर्ष पुरानी पौराणिक ऊर्जा का प्रतीक है।
‘PM मोदी की लीडरशिप में ऐतिहासिक धार्मिक काम हुए’
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि आद्यशक्ति पीठ अंबाजी का समग्र और दूरदर्शी विकास आद्यशक्ति के परम उपासक पीएम मोदी की प्रेरणा और मार्गदर्शन में किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि पीएम मोदी ने ‘विकास भी विरासत भी’ के मंत्र के साथ देश के तीर्थ स्थलों के पुनरोद्धार और आद्यशक्ति की उपासना का ऐतिहासिक कार्य किया है।
अन्य विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल लोक, केदारनाथ और बैजनाथ धाम जैसे पवित्र स्थलों के विकास ने उन्हें एक नई पहचान दिलाई है। राम मंदिर का संदर्भ देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और पावागढ़ में 500 वर्षों के बाद ध्वजारोहण जैसी ऐतिहासिक उपलब्धियाँ भी उनकी लीडरशिप में संभव हुई हैं।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि 51 शक्तिपीठों में प्रथम स्थान पर स्थित अंबाजी धाम के विकास के लिए प्रधानमंत्री की परिकल्पना अब साकार हो रही है। हर वर्ष 51 शक्तिपीठ परिक्रमा महोत्सव का सफल आयोजन किया जाता है जिसमें लाखों श्रद्धालु माता जी के दर्शन का लाभ लेते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में आयोजित परिक्रमा महोत्सव में 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
प्रधानमंत्री मोदी की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तीर्थ स्थलों के विकास को पर्यटन से जोड़ने की प्रधानमंत्री की सोच के अनुरूप अंबाजी के गब्बर पर्वत पर देश का सबसे बड़ा लाइट एंड साउंड शो शुरू किया गया है और परिक्रमा पथ तथा सांस्कृतिक ग्राम जैसी परियोजनाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को नई सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अंबाजी-तरंगा रेल परियोजना से इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होगी जिससे श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ेगी और स्थानीय आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
अंबाजी शक्ति कॉरिडोर परियोजना का महत्व
अंबाजी शक्ति कॉरिडोर परियोजना का उद्देश्य अंबाजी को विश्वस्तरीय तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करना है। इस परियोजना से श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों, अर्थव्यवस्था और पर्यटन क्षेत्र को कई बड़े लाभ मिलने वाले हैं।
श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों के लिए लाभ
इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ श्रद्धालुओं को मिलेगा क्योंकि इसमें उनकी सुविधा और आध्यात्मिक अनुभव को प्राथमिकता दी गई है। पहले चरण में मल्टी-लेवल पार्किंग, अंडरपास सड़क, पैदल मार्ग, आधुनिक तीर्थयात्री निवास, दिव्य दर्शन चौक और एम्फीथिएटर जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे वाहनों की भीड़, असुविधा और सुरक्षा संबंधी समस्याएं कम होंगी। शक्ति कॉरिडोर श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को अधिक सहज और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाएगा।
गब्बर पर्वत पर देश के सबसे बड़े लाइट एंड साउंड शो, आध्यात्मिक गैलरी, पौराणिक चित्रों और सांस्कृतिक ग्राम जैसी सुविधाएँ श्रद्धालुओं के आध्यात्मिक अनुभव को और भी विशेष और भावनात्मक बनाएँगी।
स्थानीय लोगों और बनासकांठा को आर्थिक लाभ
इस परियोजना के निर्माण और बाद के चरणों में हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। CM पटेल और मंत्रियों ने स्पष्ट किया है कि इन विकास कार्यों से स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में नई नौकरियाँ सृजित होंगी। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से होटल, धर्मशाला, रेस्तरां, दुकानें, हस्तशिल्प, प्रसाद और स्थानीय उत्पादों के कारोबार में तेजी आएगी।
इससे स्थानीय व्यापारियों, युवाओं और पूरे उत्तर गुजरात के आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। अंबाजी-तरंगा रेल परियोजना से जुड़ाव के कारण कनेक्टिविटी मजबूत होगी जिससे दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा आसान होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।
पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को लाभ
यह परियोजना अंबाजी को गुजरात का प्रमुख तीर्थ स्थल और विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे देश-विदेश से अधिक पर्यटक यहाँ आएँगे। इवेंट प्लाजा, एम्फीथिएटर और गरबा-मेले के लिए विस्तारित स्थान गुजराती संस्कृति, परंपराओं और लोक कला को नई पहचान देंगे।
यह परियोजना काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और महाकाल लोक जैसी विकास और विरासत के समन्वय वाली योजनाओं पर आधारित है जिससे आध्यात्मिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।
क्या होंगे दीर्घकालिक लाभ?
यह परियोजना आने वाले दशकों में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित की जा रही है। इसके साथ ही इसमें स्वच्छता, पर्यावरण और सतत विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे आध्यात्मिक अनुभव के साथ पर्यावरणीय संतुलन भी मजबूत होगा।
यह योजना अंबाजी को एक आदर्श तीर्थ स्थल के रूप में स्थापित करेगी जहाँ भक्ति, संस्कृति और आधुनिक विकास का अनूठा संगम दिखाई देगा। मुख्यमंत्री और सरकारी अधिकारियों ने कई बार कहा है कि यह विकास न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाएगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी मजबूत करेगा।


