PoK, जम्मू-कश्मीर और अक्साई चीन सब है भारत का हिस्सा… अमेरिका का मैप देख वॉशिंगटन के पास गिड़गिड़ाने पहुँचा पाकिस्तान: रोना देख US अधिकारियों ने पोस्ट डिलीट किया

अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को घिरा देख पाकिस्तान एक बार फिर अमेरिका के सामने गुहार लगाने पहुँच गया है। मामला जुड़ा है एक नक्शे से, जिसमें अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के कार्यालय ने पूरे जम्मू-कश्मीर, पीओके (PoK) और अक्साई चिन को भारत के हिस्से के रूप में दिखाया था।

इस नक्शे के वायरल होते ही पाकिस्तान में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में पाक विदेश मंत्रालय ने अमेरिका से संपर्क कर अपनी ‘शर्मिंदगी’ दर्ज कराई। पाकिस्तान का कहना है कि यह नक्शा ‘गलत’ था, जिसे बाद में अमेरिकी अधिकारियों ने डिलीट कर दिया।

पाकिस्तान की ‘लाल’ हुई नाक, अमेरिका के सामने दी सफाई

अमेरिका के इस कदम से पाकिस्तान को तगड़ी मिर्ची लगी है। पाक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने एक ब्रीफिंग में कहा कि जैसे ही यह नक्शा सोशल मीडिया पर दिखा, उन्होंने तुरंत अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क किया।

पाकिस्तान का तर्क था कि यह चित्रण संयुक्त राष्ट्र (UN) के मानकों के अनुरूप नहीं है। पाकिस्तान ने रोते-बिसूरते अमेरिका को याद दिलाया कि कश्मीर एक विवादित क्षेत्र है। हालाँकि, अमेरिका ने विवाद बढ़ता देख उस पोस्ट को ही अपने आधिकारिक ‘X’ हैंडल से हटा दिया, जिसके बाद पाकिस्तान ने चैन की सांस ली और इसे अपनी ‘जीत’ बताने की कोशिश की।

भारत-अमेरिका डील ने उड़ाई पाकिस्तान की नींद

दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पिछले हफ्ते भारत और अमेरिका ने एक बड़े व्यापार समझौते (Trade Deal) का ऐलान किया। इस डील के जरिए 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था तक पहुँच बनाने का खाका तैयार किया गया।

इसी समझौते का विवरण साझा करते समय अमेरिकी कार्यालय ने भारत का वह नक्शा जारी किया, जिसमें PoK और अक्साई चिन को स्पष्ट रूप से भारतीय सीमा के भीतर दिखाया गया था।

क्या यह महज एक गलती थी या बड़ा संकेत?

भले ही भारत को अपनी संप्रभुता के लिए किसी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है, लेकिन अमेरिका के इस कदम ने पाकिस्तान और चीन दोनों के माथे पर बल ला दिए। कूटनीतिक जानकार इसे एक बड़े ‘रीसेट’ के तौर पर देख रहे हैं।

हालाँकि, अमेरिका ने फिलहाल पोस्ट डिलीट कर मामले को शांत कर दिया है, लेकिन पाकिस्तान की बौखलाहट यह साफ बताती है कि उसे डर है कि कहीं अमेरिका का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में न मुड़ जाए।