US में कारों-ट्रकों के प्रदूषण नियम पूरी तरह खत्म, डोनाल्ड ट्रंप ने 2009 के ऐतिहासिक एंडेंजरमेंट फाइंडिंग को भी किया रद्द

अमेरिका में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कारों और ट्रकों के लिए लागू प्रदूषण नियमों को खत्म कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने साल 2009 में किया गया वह अहम वैज्ञानिक निष्कर्ष भी रद्द कर दिया, जिसके आधार पर वाहनों से निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसों पर सख्त नियम लगाए गए थे।

व्हाइट हाउस ने इस कदम को ‘अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी नियमन खत्म करने वाली कार्रवाई’ बताया है। सरकार का कहना है कि इससे ऑटो उद्योग और उपभोक्ताओं दोनों को राहत मिलेगी, जबकि पर्यावरण विशेषज्ञ इसे प्रदूषण बढ़ाने वाला फैसला बता रहे हैं।

यह घोषणा गुरुवार (12 फरवरी 2026) को व्हाइट हाउस में पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) के प्रमुख ली जेल्डिन की मौजूदगी में की गई। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि पुराने नियमों की वजह से गाड़ियाँ महँगी हो गई थीं और उद्योग पर बेवजह का बोझ पड़ रहा था।

क्या था एंडेंजरमेंट फाइंडिंग?

साल 2009 में EPA ने कहा था कि कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और अन्य ग्रीनहाउस गैसें लोगों की सेहत और पर्यावरण के लिए खतरनाक हैं। इसी आधार पर वाहनों के लिए सख्त उत्सर्जन नियम बनाए गए थे। अब इस फैसले को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।

इससे 2012 से 2027 और आगे तक के सभी वाहनों पर लागू ग्रीनहाउस गैस मानक रद्द हो जाएँगे। साथ ही इन नियमों से जुड़े निगरानी और रिपोर्टिंग सिस्टम भी खत्म कर दिए गए हैं।

गाड़ियाँ सस्ती होने का दावा लेकिन पर्यावरण नीतियों से दूरी

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि पुराने नियमों से अमेरिकी ऑटो उद्योग को नुकसान हुआ और गाड़ियों की कीमतें बढ़ गईं। EPA का दावा है कि इस फैसले से करदाताओं को करीब 1.3 ट्रिलियन डॉलर की बचत होगी और नई गाड़ियों की कीमत औसतन 2,400 डॉलर तक कम हो सकती है।

सरकार का कहना है कि इससे उद्योग को राहत मिलेगी और आम लोगों के लिए वाहन खरीदना आसान होगा। यह फैसला ट्रंप प्रशासन की उन नीतियों का हिस्सा है, जिनमें इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स छूट खत्म करना, सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं पर रोक लगाना और कोयले से बिजली उत्पादन को बढ़ावा देना शामिल है।

ट्रंप पहले ही अमेरिका को पेरिस जलवायु समझौते से बाहर निकाल चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कदमों से प्रदूषण बढ़ सकता है और जलवायु परिवर्तन से लड़ने की कोशिशों को नुकसान पहुँचेगा, जबकि सरकार इसे आर्थिक विकास और उद्योग हित में जरूरी कदम बता रही है।