SC ने राजस्थान के अजमेर दरगाह मामले में रोक की माँग ठुकराई, कहा- वर्शिप एक्ट लागू नहीं, जिला अदालत में जारी रहेगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के अजमेर दरगाह से जुड़े मामले में सुनवाई पर रोक लगाने की माँग वाली हस्ताक्षर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता इस मामले में मूल पक्षकार नहीं है, इसलिए उसकी इंटरवेंशन एप्लीकेशन मेंटेनेबल नहीं है और उसे पार्टी नहीं बनाया जा सकता।

कोर्ट ने आवेदन वापस लेने का विकल्प दिया, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यह विवाद प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991 के दायरे में नहीं आता और जिला अदालत में सुनवाई जारी रहेगी।

यह याचिका कर्नाटक के एक मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि 12 दिसंबर 2024 के अंतरिम आदेश के तहत निचली अदालतों को ऐसे विवादों पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए।

वहीं हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने कहा कि अजमेर दरगाह से जुड़े मामले में सत्य को सामने आने से रोकने की कोशिश की जा रही है। उनका दावा है कि यह स्थल भगवान शिव का प्राचीन मंदिर था। यह मामला अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह से जुड़ा यह मामला फिलहाल निचली अदालत में लंबित है, जहाँ आगे सुनवाई जारी रहेगी।