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जन-जन के मन में बसा मोदी-शाह का UP-YOGI अस्त्र, इसलिए हिंदुओं को बाँटने के लिए गढ़ी जा रही ‘मनोहर कहानियाँ’

अब जब सरकार के कामकाज पर सवाल नहीं उठा सकते, विकास के नाम पर नहीं घेर सकते, सरकारी स्तर पर भ्रष्टाचार लगभग खत्म हो चुका है, महिलाएँ पहले ही कहीं अधिक सुरक्षित हैं और माफिया राज से आगे बढ़कर UP भारत का ग्रोथ इंजन बन रहा है तो ऐसे में कपोल कल्पनाओं के जरिए लोगों के मन में शंकाएँ पैदा करने की कोशिश की जाती है।

2017 में जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आए और BJP को बंपर जीत मिली तो कई ‘बुद्धिजीवियों’ को यह भरोसा नहीं था कि पार्टी सांसद योगी आदित्यनाथ को प्रदेश का मुख्यमंत्री बना सकती है। हालाँकि, कई ‘बुद्धिजीवियों’ का सपना टूट गया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन BJP प्रमुख अमित शाह ने योगी को UP की कमान देने का फैसला कर लिया क्योंकि वो सर्वे में लोगों के बीच सबसे लोकप्रिय थे। आज तक भी ऐसे ‘बुद्धिजीवियों’ का वर्ग PM मोदी, CM योगी और गृह मंत्री शाह के बीच फूट दिखाने की कोशिश करता है लेकिन ये खयाली पुलाव सच से कोसों दूर हैं।

PM मोदी और CM योगी के बीच मतभेद की मनगढ़ंत खबरें फैलाने वाले भूल जाते हैं कि योगी, प्रधानमंत्री मोदी की पसंद से ही राज्य के मुख्यमंत्री हैं। उनका CM योगी को पूरा समर्थन है और रैलियों-सभाओं में जिस तरह वो योगी सरकार के कामकाज की तारीफ करते हैं उसमें यह साफ नजर आता है। 2024 में अलीगढ़ में एक रैली के दौरान पीएम मोदी ने योगी आदित्यनाथ को अपना साथी बताते हुए कहा था, ‘मैं गर्व की अनुभूति करता हूँ कि मेरे पास ऐसे साथी हैं।’ क्या वाकई मतभेद होने पर इस तरह से कोई सार्वजनिक मंच से तारीफ करेगा लेकिन इतनी सी यह बात इन बुद्धिजीवियों को समझ नहीं आती है।

वो प्रधानमंत्री मोदी ही हैं जिन्होंने मंच से ‘यूपी प्लस योगी (UP+Yogi), जो बहुत है उपयोगी’ जैसा नारा दिया था। योगी सरकार में जिस तरह उत्तर प्रदेश विकास के पथ पर बढ़ा है, एक्सप्रेसवे से लेकर इन्वेस्टमेंट तक और शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक, जिस तरह यूपी में विकास हुआ है उसकी तारीफ प्रधानमंत्री हर मंच से करते हैं। यूपी की कानून व्यवस्था हो या बेटियों की सुरक्षा, प्रधानमंत्री ने अलग-अलग मंचों से दर्जनों बार योगी सरकार के कामकाज की तारीफ की है। खुद इन ‘बुद्धिजीवियों’ को कभी ऐसा मौका नहीं मिला जहाँ PM मोदी ने मुख्यमंत्री के बारे में कुछ आलोचनात्मक जैसा भी बोला हो फिर भी ये खयाली पुलाव पकाते रहते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के अलावा सीएम योगी का शाह से भी 36 का आँकड़ा दिखाने की कोशिश की जाती है। इन तथाकथित ‘बुद्धिजीवियों’ ने इसके लिए एक कहानी भी रच ली है कि शाह और योगी के बीच प्रधानमंत्री पद को लेकर लड़ाई है। प्रधानमंत्री मोदी के पद पर होते हुए भी यह कहानी परोसने की कोशिश की जाती है क्योंकि इसके अलावा इनके पास दोनों के बीच भेद दिखाने का कोई ठोस तर्क नहीं है। हालाँकि, जिस तरह खुद शाह CM योगी और उनकी सरकार की जमकर तारीफ करते हैं उससे भी इनकी दाल गलती नहीं लगती है।

प्रधानमंत्री मोदी के अलावा सीएम योगी का शाह से भी 36 का आँकड़ा दिखाने की कोशिश की जाती है। इन तथाकथित ‘बुद्धिजीवियों’ ने इसके लिए एक कहानी भी रच ली है कि शाह और योगी के बीच प्रधानमंत्री पद को लेकर लड़ाई है। प्रधानमंत्री मोदी के पद पर होते हुए भी यह कहानी परोसने की कोशिश की जाती है क्योंकि इसके अलावा इनके पास दोनों के बीच भेद दिखाने का कोई ठोस तर्क नहीं है। हालाँकि, जिस तरह खुद शाह CM योगी और उनकी सरकार की जमकर तारीफ करते हैं उससे भी इनकी दाल गलती नहीं लगती है।

2019 में लखनऊ में निवेश समिट के दौरान अमित शाह ने एक किस्सा सुनाया था। शाह ने योगी को मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर कहा था, “कई लोगों के फोन आए, उन्होंने कहा कि जो कभी मंत्री नहीं रहा, नगर निगम तक में कोई जिम्मेदारी नहीं निभाई, योगी जी संन्यासी आदमी, उन्हें आप इतने बड़े राज्य की कमान सौंपने जा रहे हो। पार्टी ने उन्हें यह जिम्मेदारी दी और योगी जी ने अपनी नियुक्ति को सही ठहराया है।” अगस्त 2022 में भोपाल में मध्य क्षेत्रीय परिषद की एक बैठक में अमित शाह ने कहा था, “लंबे अरसे बाद UP में कानून व्यवस्था लागू की गई थी।”

मई 2024 में अमित शाह ने CM योगी की तारीफ करते हुए कहा था कि ‘योगी ने स्वच्छता अभियान से मच्छरों को समाप्त किया। यह उनका स्टाइल है। इसी स्टाइल से उन्होंने माफिया भी खत्म कर दिए’। अभी कुछ दिनों पहले जनवरी 2026 में भी शाह ने योगी सरकार की जमकर तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि ‘केंद्र में प्रधानमंत्री मोदी और प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य में विभिन्न विकास परियोजनाओं को निरंतर रफ्तार दी जा रही है’।

2017 से 2016 तक कोई ऐसा मंच आपको नहीं दिखेगा, जहाँ पीएम मोदी या अमित शाह, CM योगी के नेतृत्व पर शंका करते भी दिखें। योगी आदित्यनाथ ने भी केंद्रीय नेतृत्व पर पूरा भरोसा जाताय है और उनकी उम्मीदों पर चलते हुए यूपी को एक नए रफ्तार दी है। जो सुरक्षित है, संवदेनशील है और विकास की दौड़ में सरपट भाग रहा है। मोदी, योगी और शाह के बीच की यह दूरी मनगढ़ंत है जो केवल कुछ ‘बुद्धिजीवियों’ के मन में है।

क्यों मोदी-शाह-योगी के बीच दरार डालना चाहते हैं बुद्धिजीवी?

अब जब सरकार के कामकाज पर सवाल नहीं उठा सकते, विकास के नाम पर नहीं घेर सकते, सरकारी स्तर पर भ्रष्टाचार लगभग खत्म हो चुका है, महिलाएँ पहले ही कहीं अधिक सुरक्षित हैं और माफिया राज से आगे बढ़कर UP भारत का ग्रोथ इंजन बन रहा है तो ऐसे में कपोल कल्पनाओं के जरिए लोगों के मन में शंकाएँ पैदा करने की कोशिश की जाती है।

उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय राजनीति की धुरी है। यहाँ की राजनीतिक स्थिरता या अस्थिरता का सीधा प्रभाव केंद्र की राजनीति पर पड़ता है। इसलिए राज्य सरकार की छवि को कमजोर करने की कोशिश के तौर पर बस योगी आदित्यनाथ पर अविश्वास की कहानियाँ ही बचती हैं, जो ये बुद्धिजीवी लिए फिरते हैं।

इसमें एक पक्ष प्रदेश के विकास से जुड़ा भी है। पिछले वर्षों में एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, मेडिकल कॉलेजों का विस्तार, निवेश सम्मेलनों और कानून-व्यवस्था में बदलाव जैसे कदमों को सरकार अपनी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करती रही है। इन पहलों के बीच सामाजिक या राजनीतिक असंतोष का वातावरण पैदा करने की कोशिश की जाती है ताकि नैरेटिव के जरिए इसे किसी तरह बाधित किया जा सके। जिस रफ्तार से यूपी विकास की पटरी पर दौड़ रहा है उसे रोका जा सके या उसमें अड़चन पैदा की जा सके।

हजारों कल्पनाओं, कहानियों के बीच ना तो यूपी का विकास रुका है, ना योगी सरकार की रफ्तार। ना केंद्र का भरोसा योगी के नेतृत्व पर हिलता भी दिखा है। प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य को गति देने में योगी सबसे आगे हैं, शाह के देश को सुरक्षित बनाने के मिशन में यूपी आगे बढ़कर गुंडाराज को खत्म कर रहा है।

अंग्रेजों वाली साजिश रच रहा विपक्ष

योगी आदित्यनाथ का चेहरा किसी एक जाति या वर्ग का नहीं बल्कि पूरे हिंदू समाज को जोड़ने का प्रतीक है। जब कोई व्यक्ति संत का जीवन अपनाता है, तो वह अपनी जातिगत पहचान को पीछे छोड़ देता है। फिर भी विपक्ष द्वारा बार-बार उन्हें ‘ठाकुर’ या ‘बिष्ट’ कहकर संबोधित करना एक तरह से उनकी पुरानी पहचान को उभारना है, जिसे वे बहुत पहले त्याग चुके थे। ऐसा विपक्ष और वामपंथी लॉबी द्वारा जानबूझकर किया जाता है ताकि हिंदू समाज के भीतर जाति के आधार पर दूरी पैदा की जा सके।

जिस पहचान को CM योगी पीछे छोड़ चुके हैं उसे बार-बार उभारकर, बार-बार उनकी जातिगत पहचान को सामने लाकर वहीं कोशिश की जाती है जो अंग्रेज करते थे। यानी हिंदुओं को ‘बाँटो और राज करो’। योगी आदित्यनाथ, नरेंद्र मोदी और अमित शाह हिंदू समाज को एकजुट करने की बात करते हैं, इसलिए उनके विरोधी जातिगत पहचान को मुद्दा बनाकर एकता में दरार डालने की कोशिश करते हैं। ऐसी इसलिए भी है क्योंकि विकास या कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर योगी सरकार को घेरना मुश्किल है तो जाति का मुद्दा उठाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जाती है।

अखिलेश की सरकार के समय कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते थे, विकास कार्य ठप पड़े थे और सरकारी भर्तियों से लेकर सरकारी महकमों में जमकर भ्रष्टाचार के आरोप लगते थे। ऐसे में मौजूदा योगी सरकार ने इन क्षेत्रों में सुधार किया है, इसलिए अब विपक्ष के पास सीधे मुद्दों पर हमला करने की गुंजाइश कम है। इस वजह से वे सामाजिक विभाजन की राजनीति को आगे बढ़ा रहे हैं।

अगर इस विभाजन की कोशिश से हिंदू बँटता है, तो फिर वही स्थिति होगी। सरकार अगर बदलेगी तो दलितों के उत्पीड़न से लेकर महिलाओं की असुरक्षा जैसी स्थिति बन जाएगी। विकास की जिस रफ्तार पर यूपी आगे बढ़ रहा है वो फिर ठप हो जाएगी। हालाँकि, लोग भी इन ‘बुद्धिजीवियों’ के इस नैरेटिव को समझते हैं, उन्होंने योगी सरकार पर भरोसा दिखाया है और अब जब आगे वो अपने लिए नेतृत्व का चयन करेंगे तो इन सभी बातों का खयाल भी उनके मन में रहेगा।

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शिव
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7 वर्षों से खबरों की तलाश में भटकता पत्रकार...

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