मिडिल ईस्ट में जारी ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच की जंग अब सातवें दिन में प्रवेश कर चुकी है और हालात हर घंटे भयावह होते जा रहे हैं। इस युद्ध में अब तक ईरान के भीतर 2,100 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। मानवाधिकार संगठनों का अनुमान है कि यह आँकड़ा 2,600 के पार भी जा सकता है। तबाही का मंजर ऐसा है कि भारी संख्या में नागरिक और सैन्यकर्मी मलबे में दबे हुए हैं या लापता हैं।
ईरान को भारी सैन्य और नागरिक क्षति
इस संघर्ष में ईरान को जान-माल का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अब तक हुई मौतों में कम से कम 1,100 आम नागरिकों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 900 अन्य संदिग्ध मौतों की जाँच जारी है। केवल नागरिक ही नहीं, ईरान की सुरक्षा व्यवस्था को भी बड़ा झटका लगा है।
आशंका जताई जा रही है कि 1,000 से 1,500 के बीच ईरानी सैन्यकर्मी मारे गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन हमलों में सरकार और सेना के 48 वरिष्ठ अधिकारी (टॉप कमांडर्स) भी मारे जा चुके हैं।
बेरूत में इजरायल का बड़ा प्रहार: जैद अली जुमा ढेर
जंग के बीच इजरायली सेना (IDF) ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है। इजरायल का दावा है कि इस सटीक हमले में उसने हिजबुल्लाह के बेहद शक्तिशाली कमांडर जैद अली जुमा को मार गिराया है।
जैद अली जुमा हिजबुल्लाह के सैन्य ढांचे की रीढ़ माना जाता था और दक्षिणी लेबनान में संगठन के तोपखाने (Artillery) प्रमुख के तौर पर काम कर रहा था। IDF के अनुसार, जैद अली जुमा ही वह शख्स था जिसने इजरायल की ओर हजारों रॉकेट, मिसाइल और आत्मघाती ड्रोन हमलों की प्लानिंग की थी।
इजरायली सीमा पर हुए हालिया हमलों के पीछे जुमा का ही दिमाग बताया जा रहा था। इजरायल ने साफ कर दिया है कि वह हिजबुल्लाह और ईरान के सैन्य नेतृत्व को चुन-चुनकर निशाना बना रहा है ताकि उनकी हमला करने की क्षमता को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

