कर्नाटक में लागू होगा विवादित ‘रोहित वेमुला एक्ट’, जातिगत भेदभाव के लिए छात्रों को जेल भेजने की तैयारी: बजट में सिद्धारमैया सरकार का ऐलान

कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक अत्यंत सख्त और विवादित कानून लाने की घोषणा की है। शुक्रवार (6 मार्च 2026) को राज्य का बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने ‘रोहित वेमुला (प्रिवेंशन ऑफ एक्सक्लूजन और इंजस्टिस) बिल, 2025’ पेश किया।

इस विधेयक के प्रावधान इतने कड़े हैं कि अब कॉलेजों में जातिगत भेदभाव या उत्पीड़न के आरोपित पाए जाने पर छात्रों और प्रबंधन को सीधे जेल की हवा खानी पड़ सकती है। हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या को आधार बनाकर तैयार किया गया यह बिल अपनी कठोर सजाओं के कारण चर्चा का विषय बन गया है।

क्यों विवादों में है यह नया कानून?

इस बिल का मुख्य उद्देश्य दलित (SC), आदिवासी (ST), ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को सुरक्षा देना है। लेकिन विवाद इसकी सजा के प्रावधानों और ‘भेदभाव’ की परिभाषा को लेकर है।

कर्नाटक सरकार ने आधिकारिक तौर पर रोहित वेमुला की मौत को जातिगत भेदभाव का नतीजा मानते हुए यह कानून बनाया है, जिसे लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में बहस छिड़ गई है।

संस्थागत और अप्रत्यक्ष भेदभाव की नई परिभाषा

इस प्रस्तावित बिल के तहत सरकार ने ‘भेदभाव’ को दो श्रेणियों में बाँटकर शिकंजा कसा है। पहला है ‘संस्थागत भेदभाव’, जो तब माना जाएगा जब यूनिवर्सिटी का प्रशासन या उसकी कमेटियाँ जानबूझकर ऐसे फैसले लें जिससे आरक्षित वर्ग के छात्रों को नुकसान पहुँचे।

दूसरा है ‘अप्रत्यक्ष भेदभाव’, जिसमें ऐसी नीतियाँ शामिल हैं जो देखने में तो निष्पक्ष और सामान्य लगती हैं, लेकिन असल में उनका बुरा नतीजा सिर्फ पिछड़े वर्ग के छात्रों को ही भुगतना पड़ता है। इन नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए सरकार ने कड़े दंड का भी इंतजाम किया है।

अगर कोई व्यक्ति पहली बार जातिगत भेदभाव का दोषी पाया जाता है, तो उसे एक साल की जेल और 10,000 रुपए का जुर्माना भरना होगा। वहीं, दूसरी बार यही गलती दोहराने पर सजा बढ़कर तीन साल की जेल और 1 लाख रुपए जुर्माने तक हो सकती है।

सख्त रुख अपनाते हुए सरकार ने संस्थानों पर भी लगाम कसी है। नियमों का उल्लंघन करने वाले कॉलेजों पर 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लग सकता है और उनकी सरकारी मदद भी छीनी जा सकती है। साथ ही, पीड़ित छात्र को न्याय दिलाने के लिए कोर्ट आरोपी को 1 लाख रुपए तक का मुआवजा देने का आदेश भी दे सकती है।

कॉलेजों में बनेगी ‘इक्विटी कमेटी’

शिकायतों के निपटारे के लिए हर कॉलेज में ‘इक्विटी कमेटी’ बनाना अनिवार्य होगा। यह कमेटी यौन उत्पीड़न रोकने वाली ICC कमेटी की तर्ज पर काम करेगी और उसे न्यायिक शक्तियाँ प्राप्त होंगी। बिल में यह प्रावधान भी है कि छात्र अपनी जातिगत पहचान गुप्त रख सकते हैं और किसी भी ऐसी गतिविधि का बहिष्कार कर सकते हैं जो उन्हें पूर्वाग्रह से ग्रसित लगे।