रमजान में मुस्लिमों को ना लगे बुरा इसलिए स्कूल ने सारे बच्चों के खाने पर लगाई ‘रोक’, कनाडा में परिजन ने ‘नो फूड जोन’ पर किया हंगामा: 9 साल के बच्चे भी निशाने पर

कनाडा के एक स्कूल ने समावेशी बनने के चक्कर में एक ऐसा विवादास्पद फैसला लिया है जिससे गैर-मुस्लिम छात्रों की मुसीबत बढ़ गई है। कैलगेरी के ‘फेयरव्यू स्कूल’ ने रमजान के दौरान रोजा रखने वाले बच्चों के सम्मान के नाम पर कैफेटेरिया (भोजनालय) में खाने पर पाबंदी लगा दी है।

स्कूल प्रशासन के इस फरमान के बाद अब जो बच्चे रोजा नहीं रख रहे हैं, उन्हें भी लंच के समय भूखा रहने या खाने के लिए दूसरी जगह तलाशने को मजबूर किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर भारी गुस्सा है और लोग इसे दूसरे बच्चों पर मजहबी प्रथाएँ थोपने की कोशिश बता रहे हैं।

लंच ब्रेक में खाने पर बैन, बच्चे परेशान

अभिभावकों को भेजे गए स्कूल के आधिकारिक ईमेल के मुताबिक, कैफेटेरिया के लंच एरिया को अब ‘फूड फ्री’ (खाना मुक्त) घोषित कर दिया गया है। कक्षा 4 से 6 तक के छोटे बच्चों के लिए लंच ब्रेक के पहले आधे हिस्से में कैफेटेरिया में खाना प्रतिबंधित रहेगा।

वहीं, कक्षा 7 से 9 तक के छात्रों के लिए स्थिति और भी खराब है, उनके लिए पूरे एक घंटे के ब्रेक के दौरान लंच रूम के अंदर खाना खाने पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया है। सवाल यह उठ रहा है कि जो 911 छात्र स्कूल में पढ़ते हैं, उनमें से जो रोजा नहीं रख रहे, वे कड़ाके की ठंड में आखिर खाना खाएँगे कहाँ?

9 साल के मासूमों पर भी थोपा जा रहा नियम

आमतौर पर इस्लाम में रोजा तब अनिवार्य होता है जब बच्चा किशोरावस्था (13-14 साल) में पहुँचता है। लेकिन फेयरव्यू स्कूल ने इस नियम में चौथी कक्षा के बच्चों को भी शामिल कर लिया है, जिनकी उम्र महज 9 साल है। लोगों का कहना है कि स्कूल का यह फैसला उन छोटे बच्चों के लिए ‘क्रूर’ है जो रोजा नहीं रख रहे, क्योंकि उन्हें अब उन जगहों पर जाने से रोका जा रहा है जहाँ वे रोज बैठकर खाना खाते थे।

सोशल मीडिया पर नाराजगी: ‘खाने वालों को क्यों सजा?’

इस फैसले के वायरल होते ही इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है। लोगों का कहना है कि अगर कोई बच्चा रोजा रख रहा है, तो वह खुद कैफेटेरिया जाने से बच सकता है। एक यूजर ने लिखा, “जो रोजा रख रहे हैं उन्हें दूसरी जगह बैठाया जा सकता था, लेकिन यहाँ तो जो खाना चाहते हैं उन्हें ही बाहर किया जा रहा है।”

वहीं, कुछ मुस्लिम यूजर्स ने भी इसे गलत बताया और कहा कि उन्हें इस बात से कोई दिक्कत नहीं होती कि उनके सामने कोई खाना खा रहा है। लोगों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन जबरन बच्चों को भूखा रखने या उन्हें असहज करने की कोशिश कर रहा है।

स्कूल बोर्ड की गोलमोल सफाई

विवाद बढ़ता देख कैलगेरी बोर्ड ऑफ एजुकेशन (CBE) ने सफाई तो दी, लेकिन वह और भी भ्रम पैदा करने वाली थी। बोर्ड ने एक तरफ तो ईमेल भेजने की बात मानी, लेकिन दूसरी तरफ कहा कि ‘कोई बदलाव नहीं’ किया गया है।

लोगों के गुस्से को देखते हुए बोर्ड ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट का कमेंट सेक्शन भी बंद कर दिया है। बोर्ड का कहना है कि धार्मिक मान्यताओं के लिए ‘उचित व्यवस्था’ करना उनका कर्तव्य है, भले ही इसका असर दूसरे छात्रों की सुविधा पर पड़े।