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न्यूजलॉन्ड्री वाला अभिनंदन सेखरी करता है कर्मचारियों से दुर्व्यवहार: पूर्व इंटर्न ने बताई ‘ऑफिस के अंदर की बात’, सहकर्मी कहते थे ‘मीडिया में है ये सामान्य बात’

न्यूजलॉन्ड्री के पूर्व इंटर्न ने खुलासा किया है मीडिया संस्थान के सह संस्थापक अभिनंदन सेखरी कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करते थे। वह छोड़कर भाग गई। उसके मुताबिक सहकर्मियों ने उन्हें बताया कि मीडिया में ऐसा होना 'सामान्य' बात है।

वामपंथी मीडिया न्यूजलॉन्ड्री के एक और पूर्व कर्मचारी ने कार्यस्थल पर कथित उत्पीड़न और नकारात्मक माहौल का खुलासा किया है। 10 अगस्त को पत्रकार सायंतन घोष ने न्यूजलॉन्ड्री में काम करने के अपने अनुभव को साझा करते हुए एक पोस्ट में बताया कि न्यूजलॉन्ड्री के सह-संस्थापक अभिनंदन सेखरी कर्मचारियों को अपमानित करते हैं।

सायंतन घोष ने लिखा, “…न्यूजलॉन्ड्री से जब मुझे प्रस्ताव मिला, तो लिखित में औपचारिक रूप से तो नहीं, लेकिन यह तय हुआ था कि मैं तीन-चार महीने ट्रेनी के रूप में काम करूँगी और अगर मेरा काम अच्छा रहा तो मुझे स्थायी नौकरी मिल जाएगी। इंटर्नशिप के लिए कोई पैसा नहीं मिलना था। मुझे इसपर कोई आपत्ति नहीं थी। मैं युवा थी, मेरा एक सपना था, और मैं पत्रकार बनना चाहती थी। मैं दिल्ली आ गई और काम शुरू कर दिया। वहाँ का माहौल, जैसा कि मैंने अनुभव किया, बेहद नकारात्मक था। अभिनंदन सेखरी कर्मचारियों के लिए जिस अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते थे, वह मुझे बहुत आहत करती थी। मेरे आस-पास के लोगों ने मुझसे कहा कि मीडिया में यह ‘सामान्य’ बात है। न्यूजरूम इसी तरह काम करते हैं और किसी को भी इन सब बातों को सहने की आदत डालनी पड़ती है।”

घोष ने कहा कि न्यूजलॉन्ड्री में उनके आसपास के लोगों ने उन्हें बताया कि कर्मचारियों के प्रति इस तरह की अपमानजनक भाषा का प्रयोग मीडिया कार्यालयों में सामान्य बात है।

द टेलीग्राफ और द न्यू इंडियन एक्सप्रेस सहित मुख्यधारा के मीडिया न्यूज रूम में अपने अनुभव का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “मैंने न्यूजलॉन्ड्री में जिस तरह का दुर्व्यवहार देखा, वैसा मैंने कभी किसी संपादक को पत्रकारों या इंटर्न के साथ करते हुए नहीं सुना।”

घोष ने आगे कहा, “ इसलिए जब मुझे बताया गया कि मीडिया में ऐसा व्यवहार ‘सामान्य’ है, तो मैं इसे स्वीकार नहीं कर पाई। यह मेरे लिए सामान्य नहीं था। हर मामले में संबंधित व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार किया गया था। मैंने पहले कभी लोगों को अपने कर्मचारियों से इस तरह बात करते नहीं देखा था। लेकिन मुझे बार-बार यही कहा गया कि चीजें ऐसी ही होती हैं। इस घटना से मुझे इतना गहरा सदमा लगा कि ये घटनाएँ मुझे हमेशा याद रह गईं।”

सायंतन घोष ने आगे खुलासा किया कि न्यूजलॉन्ड्री के लिए धारा 66ए पर एक स्टोरी लिखने के बाद उन्हें इतनी गालियाँ दी गई कि वे कार्यालय छोड़कर भाग गए।

घटना को याद करते हुए घोष ने लिखा, “एक दिन, धारा 66ए पर एक स्टोरी लिखने के बाद, मुझे इतनी बुरी तरह से गालियाँ दी गईं कि मुझे याद है कि मैंने अपने रिपोर्टर से झूठ बोला और वहाँ से भाग गई। मैं एक और हफ्ते दिल्ली में रुकी रही, जब तक मेरे माता-पिता ने ट्रेन का टिकट नहीं करवा लिया और फिर मैं कोलकाता लौट आई। मैंने इस बारे में कई बार लिखने का सोचा, लेकिन कभी लिखा नहीं। मैं जानती थी कि लोगों को कैसे धमकाया और डराया जा सकता है और लंबे समय तक मुझे खुद पर शक होता रहा। मैंने खुद से सवाल किया कि क्या मैं बहुत ज्यादा संवेदनशील हो रही हूँ, क्या यह वाकई ‘सामान्य’ है, या क्या मैं मीडिया के काम करने के तरीके को ठीक से समझ नहीं पा रही हूँ। ”

उन्होंने देर से खुलासा करने को लेकर कहा, “मुझे पता है कि मुझे किस तरह की प्रतिक्रियाएँ मिलेंगी। मुझे पता है कि क्या कहा जाएगा और मुझे यह भी पता है कि कई लोग मुझसे सवाल कर सकते हैं। शायद मैं आज इसके लिए तैयार हूँ। लेकिन मुझे लगता है कि मुझे इस बारे में बहुत पहले ही बात कर लेनी चाहिए थी।”

गौरतलब है कि न्यूजलॉन्ड्री और इसके सह-संस्थापक अभिनंदन सेखरी को न केवल रेपिस्ट तरुण तेजपाल का बचाव करने के मामले में , बल्कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भी लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है।

इस विवाद के बीच, न्यूजलॉन्ड्री के कई पूर्व कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर उत्पीड़न के अपने अनुभव साझा किए हैं। इस मामले को सबसे पहले पत्रकार साईकिरण कन्नन ने उठाया था। न्यूजलॉन्ड्री की पूर्व वरिष्ठ संवाददाता सुमेधा मित्तल ने ट्वीट किया, “ मुझे उम्मीद है कि वह दिन भी आएगा जब वे अपने ही न्यूज़ रूम में यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर गंभीरता से विचार करेंगे। ”

न्यूजलॉन्ड्री की एक और पूर्व कर्मचारी प्रियंका ईश्वरी ने लिखा, “ मुझे उम्मीद है कि वे वरिष्ठ पत्रकारों को महिला संपादकों पर चिल्लाने और काम के दौरान फोन पर उन्हें ‘कब से देख रहा हूँ मैं तेरे को’ कहकर धमकाने से रोकने की ट्रेनिंग देंगे। पुरुष पत्रकारों को महिला सहकर्मियों के साथ पेशेवर तरीके से व्यवहार करना सिखाना और कार्यालय को लड़कों का अड्डा न बनाना समय की माँग है? ”

आर हसन नाम की एक महिला पत्रकार ने बताया कि कैसे 2005 में विक्रम ने उनके साथ ‘लगभग’ बलात्कार किया था। उन्होंने बताया, “ वह हिंसक हो गया—मेरे बाल खींचे, मेरी कलाई पकड़ी, मुझे दीवार से सटाकर रखा और फिर मुझे बिस्तर पर धकेल दिया। मैंने खुद को छुड़ाने की कोशिश की लेकिन नाकाम रही। मैं रोने लगी। उसने मुझे छोड़ दिया। बलात्कार से बाल-बाल बचने की यही मेरी सबसे भयानक घटना थी। ”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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