‘1984 के सिख विरोधी दंगे मानवता के खिलाफ अपराध’: इलाहाबाद HC ने केस रद्द करने से किया इनकार, योगी सरकार की SIT ने खोली न्याय की राह

1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने कानपुर दंगों के 9 आरोपितों की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिनमें उन्होंने अपने खिलाफ चल रहे कानूनी मुकदमों को खत्म करने की माँग की थी।

जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने इन दंगों को ‘नरसंहार’ (Genocide) और ‘मानवता के खिलाफ अपराध‘ करार देते हुए कहा कि केवल समय बीत जाने या पुलिस रिकॉर्ड के गायब होने (दीमक लग जाने) के आधार पर दोषियों को छोड़ा नहीं जा सकता।

कोर्ट ने ठुकराई आरोपितों की दलीलें

आरोपितों ने कोर्ट में तर्क दिया था कि मूल FIR और पोस्टमार्टम रिपोर्ट मौजूद नहीं है, इसलिए उन पर केस नहीं चलना चाहिए। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने पुननिर्माण किए गए रिकॉर्ड पर जाँच का आदेश दिया है, तो हाई कोर्ट उसमें दखल नहीं देगा।

अदालत ने स्पष्ट किया कि मानवता के खिलाफ इतने बड़े अपराध को अनदेखा नहीं किया जा सकता और गवाहों की गवाहीं आरोपितों को सजा दिलाने के लिए पर्याप्त आधार है।

केंद्र की पहल और SIT का शिकंजा

इस मामले में न्याय की उम्मीद तब जागी जब केंद्र सरकार ने नानावटी आयोग की सिफारिशों के बाद मामले को गंभीरता से लिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर SIT (विशेष जाँच दल) का गठन किया गया। जाँच में सामने आया कि उस समय पुलिस ने आरोपितों को बचाने के लिए जल्दबाजी में केस बंद कर दिए थे।

अब SIT ने उन 20 केसों को दोबारा खोला है जिनमें ‘फाइनल रिपोर्ट’ लगाकर मामला रफा-दफा कर दिया गया था। केंद्र सरकार की इस सख्ती की बदौलत ही आज 38-40 साल बाद भी गवाहों के बयान दर्ज हो रहे हैं और आरोपितों पर चार्जशीट दाखिल की जा रही है।

योगी सरकार में न्याय की नई उम्मीद: 38 साल बाद हुई गिरफ्तारियाँ

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए SIT को पूरी आजादी दी। योगी सरकार के कार्यकाल में ही फरवरी 2019 में SIT का गठन हुआ, जिसने दशकों से धूल फाँक रही फाइलों को बाहर निकाला। नतीजा यह हुआ कि कानपुर के निराला नगर में सिखों को जिंदा जलाने वाले दरिंदों को सालों बाद सलाखों के पीछे भेजा गया।

प्रशासन की इस मुस्तैदी के कारण अब तक 11 मामले की जाँच पूरी हो चुकी है और दर्जनों आरोपितों की पहचान कर उन्हें न्याय के दायरे में लाया जा रहा है। सिख संगठनों ने भी समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना की है।