प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूक्लियर प्रोग्राम के दूसरे चरण लगभग पूरे होने की जानकारी दी। उन्होंने भारत को प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) के ‘क्रिटिकलिटी स्तर’ हासिल करने पर वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी। उन्नत रिएक्टर की विशेषताओं पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने भारत के लिए इसे गौरवपूर्ण पल बताया।
सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात 9.40 बजे एक पोस्ट में लिखा, “आज भारत ने अपने सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम में एक अहम और ऐतिहासिक कदम उठाया है। देश ने अपने परमाणु ऊर्जा मिशन के दूसरे चरण में बड़ी प्रगति हासिल की है। कलपक्कम में स्वेदशी तकनीक से तैयार किया गया प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर अब सफलतापूर्वक क्रिटिकल हो गया है।”
Today, India takes a defining step in its civil nuclear journey, advancing the second stage of its nuclear programme.
— Narendra Modi (@narendramodi) April 6, 2026
The indigenously designed and built Prototype Fast Breeder Reactor at Kalpakkam has attained criticality.
This advanced reactor, capable of producing more fuel…
रिएक्टर की विशेषता बताते हुए पीएम ने कहा, “यह एक उन्नत प्रकार का रिएक्टर है, जो जितना ईंधन इस्तेमाल करता है, उससे ज्यादा ईंधन पैदा करने की क्षमता रखता है। यह उपलब्धि भारत के वैज्ञानिकों की गहरी समझ और हमारे इंजानियरों की मजबूत तकनीकी क्षमता को दिखाती है।”
इसी के साथ प्रधानमंत्री ने न्यूक्लियर प्रोग्राम के तीसरे चरण की ओर बढ़ने की भी बात कही। उन्होंने कहा, “साथ ही, यह हमारे न्यूक्लियर प्रोग्राम के तीसरे चरण की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम है, जहाँ भारत अपने विशाल थोरियम भंडार का बेहतर उपयोग कर सकेगा। यह देश के लिए गर्व का क्षण है। हमारे सभी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को इस बड़ी सफलता के लिए हार्दिक बधाई।”
आखिरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहाँ किस रिएक्टर की बात कर रहे हैं, जिसमें कई साइंस के शब्द हैं। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर है क्या ये प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर? इस रिएक्टर का काम क्या है? इसके ‘क्रिटिकलिटी स्तर’ हासिल करने का क्या मतलब है? और क्या वाकई भारत न्यूक्लियर प्रोग्राम के तीसरे चरण में पहुँच गया है?
क्या है प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर?
प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) एक बेहद उन्नत किस्म का न्यूक्लियर रिएक्टर है, जिसे भारत ने अपनी खास जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया है। ‘फास्ट’ का मतलब है कि इसमें तेज गति वाले न्यूट्रॉन का इस्तेमाल होता है और ‘ब्रीडर’ का मतलब है कि यह रिएक्टर जितना परमाणु ईंधन खर्च करता है, उससे ज्यादा नया ईंधन खुद बना लेता है।
आम न्यूक्लियर रिएक्टर जहाँ यूरेनियम का उपयोग करके ऊर्जा पैदा करते हैं, वहीं PFBR यूरेनियम और प्लूटोनियम के साथ-साथ भविष्य के लिए नया ईंधन भी तैयार करता है, जिससे ईंधन की कमी का खतरा कम हो जाता है। भारत के लिए यह बहुत अहम है, क्योंकि हमारे पास यूरेनियम सीमित है लेकिन थोरियम का भंडार काफी ज्यादा है।
यह रिएक्टर उसी दिशा में एक मजबूत कदम है, जिससे आगे चलकर थोरियम आधारित ऊर्जा को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। तमिलनाडु के कलपक्कम में बना यह रिएक्टर पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है, जो भारत की वैज्ञानिक ताकत और इंजनीयरिंग क्षमता को दिखाता है। आसान शब्दों में कहें तो यह सिर्फ बिजली बनाने वाली मशीन नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए ‘ईंधन बनाने वाली फैक्ट्री’ भी है, जो भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
रिएक्टर के ‘क्रिटिकलिटी स्तर’ हासिल करने से क्या मतलब है?
प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) के ‘क्रिटिकलिटी स्तर’ हासिल करने का मतलब यह है कि अब रिएक्टर के भीतर परमाणु प्रतिक्रिया (न्यूक्लियर फिशन) अपने आप लगातार और नियंत्रिति तरीके से चलने लगी है। आसान भाषा में कहें तो जब एक परमाणु टूटता है और उससे निकलने वाले न्यूट्रॉन ठीक उतनी ही संख्या में दूसरे परमाणुओं को तोड़ते रहते हैं, जिससे यह प्रक्रिया बिना रुके चलती रहे, उसी स्थिति को ‘क्रिटिकल’ कहा जाता है।
इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के अनुसार, क्रिटिकलिटी वह स्थिति है जब परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया (chain reaction) स्थिर रूप से खुद चलती रहती है, यानी हर फिशन से उतने ही न्यूट्रॉन पैदा होते हैं जितने अगले फिशन को जारी रखने के लिए जरूरी होते हैं।
यह किसी खतरे का संकेत नहीं होता, बल्कि यह दिखाता है कि रिएक्टर सही तरीके से शुरू हो चुका है और अब वह स्थिर रूप से ऊर्जा पैदा करने के लिए तैयार है। इस चरण के बाद वैज्ञानिक धीरे-धीरे इसकी क्षमता बढ़ाते हैं और इसे बिजली उत्पादन के लिए पूरी तरह तैयार करते हैं।
क्या वाकई भारत न्यूक्लियर प्रोग्राम के तीसरे चरण में पहुँच गया
भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम तीन चरणों में बनाया गया है, जिसे होमी जे भाभा ने तैयार किया था। अभी जो प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने ‘क्रिटिकलिटी’ हासिल की है, वह दूसरे चरण की एक बड़ी उपलब्धि जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पूरी तरह तीसरे चरण में पहुँच गया है। असल में, भारत अभी दूसरे और तीसरे चरण के बीच के संक्रमण (Transition) दौर में है।
दूसरे चरण का मकसद फास्ट ब्रडर रिएक्टर के जरिए प्लूटोनियम का इस्तेमाल करके ज्यादा ईंधन तैयार करना और आगे के लिए जरूरी सामग्री जुटाना है। PFBR का सफल होना दिखाता है कि यह तकनीक अब काम कर रही है, लेकिन पूरे देश में इस तरह के और रिएक्टर लगने औऱ स्थिर रूप से चलने के बाद ही कहा जा सकता है कि दूसरा चरण पूरी तरह सफल हुआ है।
तीसरे चरण में भारत का फोकस थोरियम पर आधारित रिएक्टरों पर होगा, क्योंकि भारत के पास थोरियम का बहुत बड़ा भंडार है। इसके लिए पहले पर्याप्त मात्रा में यू-233 जैसे ईंधन का उत्पादन जरूरी है, जो दूसरे चरण से ही मिलेगा। डिपार्टमेंट ऑप एटॉमिक एनर्जी के अनुसार, यह एक लंबी और चरणबद्ध प्रक्रिया है, जिसमें हर स्टेज अगले स्टेज के लिए आधार तैयार करता है।


