इंदौर नगर निगम की बजट बैठक उस समय अखाड़ा बन गई जब कॉन्ग्रेस पार्षद फौजिया शेख ने ‘वंदे मातरम’ गाने से साफ इनकार कर दिया। इस घटना के बाद सदन में भारी हंगामा हुआ, जिसके चलते सभापति ने उन्हें सदन से बाहर जाने का आदेश दे दिया।
बैठक की शुरुआत में जब राष्ट्रगीत हुआ, तो फौजिया शेख अपनी जगह पर खामोश रहीं। भाजपा पार्षदों के विरोध पर उन्होंने तर्क दिया कि ऐसा कोई कानून नहीं है जो किसी जनप्रतिनिधि को वंदे मातरम गाने के लिए मजबूर करे।
फौजिया शेख ने आगे कहा कि संविधान हर नागरिक को अपनी आस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है। उनके मजहबी विश्वास उन्हें यह गीत गाने की अनुमति नहीं देते और देशभक्ति साबित करने के लिए किसी एक गीत की जरूरत नहीं है।
इस बयान से नाराज भाजपा पार्षदों ने नारेबाजी शुरू कर दी और सभापति के आसन तक जा पहुँचे। माहौल बिगड़ता देख सभापति मुन्नालाल यादव ने सख्त रुख अपनाते हुए फौजिया शेख को बाहर जाने का निर्देश दिया।
सदन के बाहर भी कॉन्ग्रेस पार्षद फौजिया शेख अपने स्टैंड पर कायम रहीं और चुनौती दी कि उन्हें वह कानून दिखाया जाए जिसमें यह गीत गाना अनिवार्य हो।

