हथियार कारोबारी संजय भंडारी की याचिका खारिज, बरकरार रहेगा ED का ‘फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर’ वाला टैग: ₹21 करोड़ की संपत्तियाँ हो रही जब्त

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार (9 अप्रैल 2026) को ब्रिटेन में रह रहे हथियार कारोबारी संजय भण्डारी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर (FEO) घोषित किया गया था।

जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने अपील खारिज कहते हुए साफ कर दिया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) अब उनकी संपत्तियों की जब्ती की कार्रवाई आगे बढ़ा सकता है। 63 साल के संजय भंडारी 2016 में उस समय लंदन भाग गए थे, जब आयकर विभाग ने दिल्ली में उनके ठिकानों पर छापेमारी की थी।

बाद में ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में उनकी करीब 21 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की। यह मामला आयकर विभाग की चार्जशीट से शुरू हुआ था, जिसके बाद फरवरी 2017 में ED ने उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया।

रॉबर्ट वाड्रा कनेक्शन और लंदन प्रॉपर्टी का मामला

जाँच के दौरान ED ने 2020 में पहली चार्जशीट दाखिल की, जिसमें भंडारी के कथित संबंध रॉबर्ट वाड्रा से जोड़े गए। रॉबर्ट वाड्रा, कॉन्ग्रेस सांसद प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति हैं। 2023 में दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोप लगाया गया कि भंडारी ने 2009 में लंदन के 12, ब्रायनस्टन स्क्वायर में एक प्रॉपर्टी खरीदी, उसे वाड्रा के निर्देश पर रेनोवेट कराया और इसके लिए वाड्रा से फंड भी लिया।

तीस हजारी कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव अग्रवाल ने 5 जुलाई 2025 को भंडारी को फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर घोषित किया था। कोर्ट ने कहा था कि अगर एक्स्ट्रडिशन की कोशिशें नाकाम भी हो जाएँ, तो इससे आरोपित को भारतीय कानूनों के तहत कार्रवाई से छूट नहीं मिलती।

भंडारी ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जहाँ उनकी ओर से कपिल सिब्बल ने पैरवी की, जबकि ED की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने दलीलें रखीं।

अब संपत्तियों की जब्ती की कार्रवाई तेज होगी

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब ED भंडारी की भारत में मौजूद संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेगा। इससे पहले एक विशेष अदालत ने ED की जब्ती याचिका पर फैसला इसलिए टाल दिया था क्योंकि FEO घोषित किए जाने का मामला हाई कोर्ट में लंबित था।

अब इस पर तेजी आने की संभावना है। भंडारी के खिलाफ भारत ने ब्रिटेन से एक्स्ट्रडिशन की भी माँग की है। वहाँ की अदालत में मनी लॉन्ड्रिंग और ब्लैक मनी एक्ट के तहत मामलों पर सुनवाई हुई है। हालाँकि, भंडारी ने इन फैसलों के खिलाफ अपील कर रखी है, जिसकी वजह से वह अभी भी यूके में ही रह रहे हैं।