SIR में जिनका हटा वोटर लिस्ट से नाम, वो नहीं कर सकते बंगाल विधानसभा चुनाव में मतदान: सुप्रीम कोर्ट का फैसला, 34 लाख आवेदन लंबित

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों का नाम वोटर लिस्ट से हटाया गया है और उनकी दोबारा नाम जोड़ने का आवेदन अभी लंबित है, ऐसे लोगों को आने वाले बंगाल विधानसभा चुनाव में वोट देने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

सोमवार (13 अप्रैल 2026) को वोटर लिस्ट की SIR को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉमाल्या बागची की बेंच ने यह टिप्पणी की। बेंच ने कहा, “ऐसे लोगों को वोट देने की अनुमति देने का सवाल ही नहीं उठता। अगर हम ऐसा करते हैं, तो फिर हमें उन लोगों के वोट देने का अधिकार भी रोकना पड़ेगा जिनका नाम सूची में शामिल है।”

कोर्ट ने यह भी बताया कि अब तक करीब 34 लाख लोगों ने अपने नाम वोटर लिस्ट में शामिल न होने के खिलाफ आवेदन दाखिल किया है, जो अभी संबंधित ट्रिब्यूनल में लंबित हैं।

9 अप्रैल तक आवेदन मंजूर होने पर वोटर लिस्ट में आएगा नाम

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर 9 अप्रैल 2026 या उसके कुछ दिनों बाद भी अगर नाम जोड़ने का आवेदन मंजूर हो जाता है, तो ऐसे व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में आ जाएगा और फिर वह वोट दे सकता है।

कोर्ट ने यह टिप्पणी याचिकाकर्ता की ओर से वकील के तर्क पर दी। वकील ने कहा, “ऐसा माहौल बना दिया गया है कि जैसे सभी लंबित मामलों का फैसला हो चुका है। 6 अप्रैल की वोटर लिस्ट प्रकाशित कर दी गई है और सभी वोटरों के मामले अभी जाँच के तहत हैं।”

इस पर कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों के आवेदन 9 अप्रैल तक मंजूर हो जाएगी, उनके नाम वोटर लिस्ट में जोड़ दिए जाएँगे। कोर्ट ने कहा, “अगर 9 अप्रैल तक या उसके कुछ दिनों बाद भी फैसला हो जाता है, तो उनके नाम चुनाव के लिए वोटर लिस्ट में शामिल कर लिए जाएँगे। यह बात पहले भी साफ की जा चुकी है।”

हालाँकि, कोर्ट ने यह भी साफ कहा कि जिन लोगों के मामले अभी लंबित हैं, उन्होंने चुनाव में वोट देने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

बंगाल में 90.8 लाख मतदाताओं के नाम कटे

बता दें कि पश्चिम बंगाल में लगभग 90.8 लाख नाम हटा दिए गए, जिसके बाद मतदाताओं की संख्या 7.6 करोड़ से घटकर 6.7 करोड़ रह गई। अधिकारियों ने बताया कि सत्यापन प्रक्रिया के तहत उचित न्यायिक जाँच के बाद हटाए गए नामों को भी हटा दिया गया है। हटाए गए नामों में से 34 लाख लोगों ने दोबारा नाम जोड़ने के लिए आवेदन दिए हैं।